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लहसुन की खेती बन रही घाटे का धंधा, लागत लग गई ज्यादा, भाव मिल रहा कम

दो हजार हेक्टेयर में हुई है बोवनी, पिछले वर्षों में मिले थे अच्छे दाम

सागर

Updated: April 21, 2022 08:26:24 pm

बीना. पिछले वर्षों में लहसुन की खेती किसानों के लिए लाभ का धंधा रही है और लागत से कई गुना अधिक मुनाफा हुआ, लेकिन इस वर्ष जब ज्यादा किसानों ने इस खेती को अपनाया है, तो दाम बहुत कम हो गए हैं। ऐसी स्थिति में लहसुन की खेती करने वाले किसान ठगा महसूस कर रहे हैं। यदि वर्तमान में चल रहे दामों पर किसान लहसुन बेचेंगे तो उन्हें मुनाफा की जगह घाटा होगा। इस वर्ष क्षेत्र में दो हजार हेक्टेयर में लहसुन की खेती हुई थी और अब लहसुन बिकने के लिए तैयार है, लेकिन बाजार में दाम 25 रुपए किलो मिल रहे हैं, जिससे किसानों के सामने संकट खड़ा हो गया है। जिन किसानों ने पहली बार बीज खरीदकर इस खेती की शुरुआत की है, उनकी तो लागत निकलना भी मुश्किल हो रही है। किसान अब शासन से कुछ मदद मिलने की आस लगाए हुए हैं। इस वर्ष लहसुन की क्वालिटी भी अच्छी नहीं है, मौसम अनुकूल न होने से छोटा रह गया है। इसका असर भी दामों पर पड़ेगा।
बुआई से लेकर लहसुन तैयार होने तक की लागत
लहसुन की बोवनी के समय किसानों ने 80 और 90 रुपए किलो में बीज की खरीदी की थी और एक एकड़ में बीस हजार रुपए का बीज लगा, फिर इसकी बुआई भी मजदूरों की मदद से होती है, जिसमें एक एकड़ में पंद्रह हजार का खर्च आता है। इसके बाद निदाई में करीब पंद्रह हजार रुपए खर्च होते हैं और फिर छह से दस बार तक पानी देना पड़ता है। दवाईयां, खाद और फिर कटाई, छनाई से लेकर पूरी फसल तैयार होने में 80 हजार रुपए के करीब खर्च आता है और एक एकड़ में 30 क्विंटल तक उत्पादन होता है।
अगली बार से कम कर देंगे बोवनी
चार वर्षों से लहसुन की खेती करते आ रहे सतौरिया के किसान अजब सिंह पटेल ने बताया कि इस वर्ष उन्होंने 18 एकड़ में बोवनी की थी, लेकिन मौसम के प्रभाव से लहसुन छोटा रह गया है और दाम भी कम हैं। बीज स्वयं का था, लेकिन उसके बाद भी ज्यादा मुनाफा नहीं होगा। अगली बार से यह खेती कम करेंगे। पिछली बार 5 हजार से 7 हजार रुपए क्विंटल तक नागपुर में लहसुन बेचा था, लेकिन इस बार 2500 रुपए क्विंटल बिक रहा है। नागपुर जाने में भी 250 रुपए क्विंटल का खर्च आएगा। शासन को समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरू करनी चाहिए।
जिले में नहीं है मंडी
पहली बार लहसुन की खेती करने वाले किसान सत्यजीत सिंह ने बताया कि उन्होंने एक एकड़ में करीब 80 हजार रुपए की लागत लगाई है और 25 रुपए किलो बेचने में लागत भी नहीं निकल रही है। क्षेत्र में लहसुन का रकबा बढ़ रहा है, इसलिए जिले में मंडी शुरू होना चाहिए। साथ ही जिन शहरों में दाम ज्यादा है वहां के व्यापारियों से किसानों का सीधा संपर्क कराया जाए, निर्यातकों से भी संपर्क कराया जाए, जिससे अच्छे दाम मिल सके। इस वर्ष जैसी स्थिति रही तो किसानों का लहसुन से मोह भंग हो जाएगा।
नहीं कर सकते स्टॉक
किसान लहसुन का स्टॉक नहीं कर सकते हैं, क्योंकि वह सूखने लगता है। इसके लिए कोल्ड स्टोर की जरूरत होती है, जो उपलब्ध नहीं है। इसलिए मजबूरी में कम मुनाफा में ही किसानों को लहसुन बेचना पड़ेगा।
फैक्ट फाइल
लहसुन की बोवनी- 2 हजार हेक्टेयर
बीज सहित लागत एक एकड़ में- 80 हजार
बाजार में मिल रहे दाम-2500 रुपए क्विंटल

Cultivation of garlic is becoming a loss business, the cost has increased, the price is getting less
Cultivation of garlic is becoming a loss business, the cost has increased, the price is getting less

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