cyber crime : अगर आप भी हुए हैं साइबर क्राइम के शिकार तो जरूर पढ़ें यह खबर

Sanjay Sharma

Publish: Oct, 12 2017 08:51:13 (IST)

Sagar, Madhya Pradesh, India
cyber crime : अगर आप भी हुए हैं साइबर क्राइम के शिकार तो जरूर पढ़ें यह खबर

मोबाइल चोरी, ऑनलाइन ठगी, सोशल साइट्स पर बेतुके कमेंट व पोस्ट की शिकायतों में से आधी का भी निराकरण नहीं हो पाया है।

सागर. बेदम साइबर नेटवर्क के कारण ऑनलाइन ठगी, मोबाइल चोरी व सोशल साइट्स पर पोस्ट डालकर वैमनस्य पैदा करने वाले बदमाश पुलिस की पकड़ से दूर हैं। तकनीकी और एक्सपर्ट की कमी के चलते पुलिस की साइबर सेल को एक शिकायत की जांच में ही इतना समय लग जाता है कि अपराधी के बच निकलने के चांस बढ़ जाते हैं। स्थिति यह है कि एक माह में मोबाइल चोरी, ऑनलाइन ठगी, सोशल साइट्स पर बेतुके कमेंट व पोस्ट की शिकायतें आती हैं उनमें से आधी का भी निराकरण नहीं हो पाता, नतीजा बदमाशों के हौसले बढ़ रहे हैं।

साइबर सेल की स्थिति
जिले के एक महिला सेल, एक महिला थाना और एक अजाक थाने के अलावा ३० पुलिस थाने हैं। इन थानों में महीने भर में मोबाइल व सोशल साइट्स व ग्रुप पर अशोभनीय कमेंट, आपत्तिजनक पोस्ट संबंधी में १५० से ज्यादा शिकायतें पहुंचती हैं। जबकि मोबाइल गुम होने, चोरी होने की ५०० से ज्यादा शिकायत थानों व साइबर सेल में आती हैं।

महीने में 800 शिकायतें
एक महीने में 650 से 800 तक शिकायतें साइबर सेल पहुंचती हैं जिनमें प्राथमिकता के आधार पर पड़ताल होती हैं। शिकायतों का डेटा बेस जुटाने, सीडीआर व लोकेशन टे्रस करने का काम 3 आरक्षकों पर है। एक्सपर्ट अफसर की कमी और शिकायतों के दबाव का अनुपात बेमेल होने से पचास फीसदी मामले तो शिकायत तक ही सिमट जाते हैं।

केस-1
एमआरसी निवासी सैनिक के घर अज्ञात बदमाश ने मोबाइल पर कॉल किया। घर पर मौजूद सैनिक की पत्नी ने कॉल रिसीव किया तो बदमाश ने बैंक अधिकारी बन अकाउंट नंबर, एटीएम नंबर और ओटीपी हासिल कर लिया। इसके बाद उसने 17 ट्रांजेक्शन कर खाते से 94 हजार रुपए की राशि उड़ा ली। सैनिक परिवार ने शिकायत केंट थाने में दर्ज कराई लेकिन 3 माह बाद भी पुलिस बदमाश तक नहीं पहुंच सकी।

केस-2
ईद-मोहर्रम के समय राहतगढ़ में एक व्हाट्सएप ग्रुप पर धर्म विशेष की भावनाओं को भडक़ाने वाला पोस्ट भेजा गया। शिकायत थाने पहुंची तो पुलिस ने दबाव देख ग्रुप एडमिन पर केस दर्ज कर लिया। डेढ़ माह पुराने मामले में अब जांच जारी है। ग्रुप पर आपत्तिजनक संदेश किसने भेजा यह खुलासा पुलिस ने अब तक नहीं किया है। वहीं केस दर्ज होने के बाद भी आरोपी युवक खुद को झूठा फंसाने की सफाई दे रहा है।

केस-4
संभाग में पुलिस के सबसे ऊंचे ओहदे पर बैठे आईजी सतीश कुमार सक्सेना के फेसबुक अकाउंट पर 26 अगस्त को पीएम को लेकर हुए आपत्तिजनक पोस्ट ने खासी हलचल मचाई थी। महकमे के आला अफसर का मामला होने से पूरा अमला हरकत में आ गया। तुरंत जांच एएसपी पंकज पांडेय के निर्देशन में साइबर सेल को सौंपी गई। आईजी ने अपना एफबी अकाउंट तो बंद कर दिया लेकिन पोस्ट किसने अपलोड किया यह अब भी सामने नहीं आया है।

केवल हाईप्रोफाइल पर होती है जांच
साइबर सेल में आने वाली शिकायत पर एसपी की अनुशंसा पर जांच की जाती है। इसके अलावा थाने से भेजे जाने वाले इक्का-दुक्का मामलों में ही सीधे तौर पर पड़ताल होती है। यानि मामला हाईप्रोफाइल व्यक्ति या संगीन-संवेदनशील अपराध से जुड़ा हो तो पुलिस त्वरित कार्रवाई कर चंद दिन या कुछ ही घंटे में मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल या सीडीआर रिपोर्ट हासिल कर लेती है। इसके उलट सामान्य केस होने पर वह शिकायत के रूप में कई-कई दिन या महीनों तक साइबर सेल की टेबल या फाइल पर भी धूल खाता रहता है। कई बार तो शिकायत बिना कार्रवाई के ही नस्ती हो जाती है।

उपकरण न एक्सपर्ट, कंपनियों के भरोसे
जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय में एक 8 गुणा 10 आकार के कमरे में चल रही साइबर सेल में ३ लोगों के बैठने की जगह है। यहां पदस्थ आरक्षक स्तर के तकनीकी जानकार साइबर संबंधी शिकायतों का अनुसंधान करते हैं लेकिन उनके पास एक डेस्कटॉप और दो लैपटॉप ही है। न तो इंटरनेट संबंधी अपराधों की पड़ताल करने वाले आधुनिक और अपडेट उपकरण है न ही सॉफ्टवेयर। शिकायत आने पर साइबर सेल मेल संबंधी टेलीकॉम कंपनी को भेजती है और वहां से जब कॉल डिटेल, सीडीआर आ जाती है तो उसके आधार पर जांच आगे बढ़ती है। कई मामलों में तो टेलीकॉम कंपनी से समय पर जानकारी न मिलने से जांच भी गड़बड़ा जाती है।

कमी पूरी करेंगे
साइबर सेल अधिकारियों के मार्गदर्शन में काम कर रही है। बड़ी सफलताएं भी सेल की मदद से मिली हैं। कुछ कमी हो सकती है उसे जल्द दूर कर लिया जाएगा।
पंकज पांडेय, एएसपी सागर

Rajasthan Patrika Live TV

1
Ad Block is Banned