बायोटेक्नोलॉजी विभाग ने तैयार किया १०० लीटर सेनिटाइजर, लॉक डाउन के कारण नही हो रहा उपयोग

- डॉ हरिसिंह गौर विवि ने कोरोना के संक्रमण से बचने के लिए तैयार किया कारगर लिक्विड

सागर. डॉ हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय के बायोटेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट में १०० लीटर सैनिटाइजर बनकर तैयार रखा हुआ है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस सैनिटाइजर का उपयोग विश्वविद्यालय प्रशासन नहीं कर पा रहा है। २१ दिनों के लॉक डाउन के कारण डिपार्टमेंट बंद है। वहीं स्टाफ व विद्यार्थी भी नहीं हैं। इस वजह से भी इसका उपयोग भी नहीं हो पा रहा है।
कोरोना वायरस से निपटने के लिए शहर में सैनिटाइजर की मारामारी चल रही है। लोग महंगी कीमतों में इसे लेने को तैयार हैं, लेकिन यह आसानी से हर किसी को उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसी मंशा के तहत अपने विश्वविद्यालय को कोरोना से मुक्त रखने के लिए बड़ी मात्रा में सैनिटाइजर तैयार किया है।

...तो अस्पतालों में करा सकते हैं मुहैया

लॉक डाउन होने की स्थिति में अभी विश्वविद्यालय में किसी भी प्रकार की कार्यों पर रोक है। २१ दिन बाद कोरोना का असर खत्म होता है या फिर लॉक डाउन आगे बढ़ दिया जाएगा। इस बारे में अभी कुछ कहा नही जा सकता। ऐसे में यदि सैनिटाइजर का उपयोग विश्वविद्यालय प्रशासन कहीं और करना चाहे तो कर सकता है। मसलन जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में सैनिटाइजर की कमी है। विश्वविद्यालय प्रशासन इसे सस्ते दर पर बीएमसी को उपलब्ध करा सकता है। इससे सैनिटाइजर बनाने वाले विशेषज्ञों की मेहनत भी जाया नहीं जाएगी।

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मार्केट में मिलने वाले सैनिटाइजर की तुलना में यह बेहद फायदेमंद है। विभाग के एचओडी यदि डिपार्टमेंट खोलने की अनुमति देते हैं तो इसका उपयोग किया जा सकता है।
डॉ सीपी उपाध्याय, सहायक प्राध्यापक बायोटेक्नोलॉजी

वर्जन

ये सैनिटाइजर रिसर्च से तैयार किया गया है। इसे तैयार ही कोरोना से निपटने के लिए किया गया है। विश्वविद्यालय में अभी इसकी जरूरत यदि नही है तो जरूरतमंद संस्थाओं को उपलब्ध कराया जाएगा।

प्रो. आरपी तिवारी,कुलपति

आकाश तिवारी Desk
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