video: बारिश का कहर, पानी कमने के बाद दिखने लगी तबाही, गिरे कच्चे मकान, फसलें भी हुईं खराब

sachendra tiwari | Updated: 16 Aug 2019, 11:30:00 PM (IST) Sagar, Sagar, Madhya Pradesh, India

बारिश रुकने के बाद रात में हो हुआ नदियों का जलस्तर कम

बीना. बुधवार की शाम से शुरू हुई लगातार बारिश से गुरुवार की सुबह तक पूरा क्षेत्र जलमग्न हो गया था। शहर हो या गांव हर जगह लोग पानी से परेशान रहे। शहर के कई वार्डों में मोतीचूर नदी का पानी पहुंच गया था और ग्रामीण क्षेत्रों में बीना, वेतबा, सिलार, नरेन, परासरी नदी सहित छोटे-छोटे नालों का पानी मुसीबत बना। साथ ही बारिश के कारण चारों तरफ के रास्ते बंद हो गए थे। पुल-पुलियों के ऊपर पानी आने से घंटों वाहन नहीं निकल पाए, लेकिन प्रशासन पूरे समय एलर्ट रहा और लोगों को राहत पहुंचाई। गुरुवार की रात से ही बारिश रुक गई थी और शुक्रवार को भी बारिश नहीं हुई। अभी तक कुल बारिश 983 एमएम दर्ज की गई है। बुधवार की रात से गुरुवार दोपहर तक 185 एमएम बारिश हुई। जिन गांवों में बाढ़ का पानी पहुंचा था वहां अब तबाही दिखने लगी है।
मोतीचूर नदी का पानी नईबस्ती, प्रताप वार्ड, कटरा वार्ड सहित अन्य वार्डों में भर गया था। बजरा घाट के पास नदी का पानी ज्यादा हो जाने पर एक परिवार फंस गया था, इसकी सूचना तहसीलदार प्रशांत अग्रवाल को मिली उन्होंने पुलिस के साथ पहुंचकर स्थानीय तैराकों की मदद से परिवार को बाहर निकाला। मोतीचूर नदी का पानी कटरा मंदिर परसिर तक पहुंच गया था और वहां बने घरों के चारों तरफ सिर्फ पानी नजर आ रहा था। नईबस्ती में लोगों के घरों में पानी भर गया था। यह पानी नदी का जलस्तर कम होने के बाद निकल पाया। ग्राम चिकनोटा और मेवली में भी दो परिवार फंस गए थे, इन परिवारों को होमगार्ड सागर से आई रेस्क्यू टीम द्वारा बाहर निकाला गया। मेवली गांव में रहने वाले परिवार के लिए ग्राम नौगांव के शासकीय स्कूल में रुकने की व्यवस्था कराई गई। बारिश रुकने बाद रात को नदियों का जलस्तर कम हुआ और लोगों ने राहत की सांस ली। वेतबा नदी का जलस्तर बढऩे से हांसलखेड़ी, ढिमरोली, लखाहर सहित नदी किनारे बसे अन्य गांवों में पानी पहुंच गया था। यदि बारिश नहीं रुकती तो यह गांव टापू बन जाते। तसहीलदार द्वारा इन ग्रामों में लगातार मुनादी गई और बढ़ रहे जलस्तर पर नजर रखी गई। हांसलखेड़ी के एक टापू पर करीब 12 मकान बने हैं, जिनके चारों तरफ पानी भर गया था और प्रशासन ने उन्हें बाहर आने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने सभी प्रकार की व्यवस्थाएं होने की बात कहकर बाहर आने से मना कर दिया था। एसडीएम केएल मीणा भी अधिकारियों के साथ स्थिति पर पूरे समय नजर बनाए रहे।
रास्ते रहे बंद, फीका पड़ा त्योहार
नदियां उफान पर होने के कारण गुरुवार की सुबह से ही रास्ते बंद हो गए थे। कुरवाई रोड, आगासौद रोड, देहरी रोड, भानगढ़ रोड, नौगांव सहित अन्य गांवों के रास्ते बंद थे। बारिश रुकने के बाद दोपहर में कुछ रास्ते खुल गए थे, लेकिन जहां पानी ज्यादा था वह रास्ते देर रात खुल पाए। रास्ते बंद होने के कारण लोग घरों तक भी नहीं पहुंच सके, जिससे रक्षाबंधन का त्योहार भी फीका रहा।
फसलों को हुई क्षति
नदियों के पास जिन खेतों में पानी भरा रहा है वहां की फसल को भी क्षति पहुंची है। साथ ही तेज बहाव में फसलें बह भी गई हैं। यदि अब कुछ दिनों तक बारिश नहीं रुकेगी तो फसलें ज्यादा प्रभावित हो जाएंगी।
चिकनोटा में गिरे मकान
ग्राम चिकनोटा में बाढ़ के बाद लोगों के कच्चे मकान गिर गए हैं, जिससे उनको रहने तक के लिए जगह नहीं बची है। साथ ही गृहस्थी का सामान भी खराब हो गया है। तहसीलदार ने बताया कि हल्का पटवारियों को भेजकर क्षतिग्रस्त मकान का सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार राहत राशि दी जाएगी।

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