Doctors Day 2019 : बुंदेलखंड के ये डॉक्टर अपना खून देकर बचा रहे जान

पांच साल से कर रहे ब्लड डोनेट

By: आकाश तिवारी

Published: 01 Jul 2019, 06:52 PM IST

सागर. बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्तदान करने के मामले में नजीर पेश कर रहे हैं। इलाज का गुर सीखने के अलावा वे समाज सेवा के लिए गंभीर मरीजों को आधी रात में रक्त देने पहुंच जाते हैं। इसकी शुरुआत 2014 में हुई। इस बैच के मेडिकल छात्रों ने एक वाट्सऐप ग्रुप तैयार किया है, जिसमें धीरे-धीरे तीन नए बैच के मेडिकल छात्र शामिल हो गए हैं, जो उस व्यक्ति, महिला और वृद्ध के लिए ब्लड डोनेट करते हैं, जिन्हें कहीं से ब्लड नहीं मिलता है। बीएमसी में इस ग्रुप में 100 जूनियर डॉक्टर जुड़े हैं, जो ब्लड डोनेट करने का काम पिछले 5 साल से कर रहे हैं।
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इन्होंने की यह सराहनीय शुरुआत
वर्ष 2014 बैच के पांच जूनियर डॉक्टरों ने इसकी शुरुआत की है। इनमें चर्चित बंसल, प्रांजल पीपरे, शिफा खान, हिना खान और शुभी जैन शामिल हैं। इनकी प्रेरणा से आने वाले अगले बैच के मेडिकल छात्र शामिल हुए। वर्तमान में 2016 बैच के गोहर नवाज खान, आशुतोष आर्या, मीना मैथ्यू और जयश्री गौतम, 2017 बैच से निशांत सिंह, ध्रुव नायक, नेहल गर्ग व शिखा सिंह और वर्ष 2018 बैच से रीतेश गुप्ता, सौरभ पटेल, शिवांगी जैन और कलश सिंह शामिल हैं। कई मामलों में देखा गया है कि मेडिकल ऑफिसर भी जरूरतमंद मरीजों को ब्लड देने के लिए आगे आए हैं। हाल ही में सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को एमओ डॉ. सौरभ शुक्ला और डॉ. उमेश मिश्रा ने ब्लड दिया। इसके बाद अन्य एमओ ने भी मरीज ब्लड दिया है। बीएमसी में परिजनों द्वारा किए जाने वाले हंगामे और मारपीट करने की कोशिशों के बाद भी डॉक्टर मरीजों की जान बचाने में हर संभव प्रयास करते हैं।

देश और प्रदेश में डॉक्टर
1157771 एलोपैथिक डॉक्टर रजिस्टर्ड राज्य चिकित्सा परिषद/भारतीय चिकित्सा परिषद में
9.26 लाख के लगभग डॉक्टर सक्रिय सेवा के लिए उपलब्ध 80 प्रतिशत के हिसाब से
59353 डॉक्टर रजिस्टर्ड मध्य प्रदेश में
(आंकड़े 31 मार्च 20199 तक)

अब तक 250 लोगों को दे चुके ब्लड
बीएमसी में ब्लड डोनेट करने के लिए जूनियर डॉक्टरों ने 3 ग्रुप बनाए हैं। इनमें बीएमसी क्लब, यूनाइटिड बीएमसी, और यूनाइटिड बैचेस ऑफ बीएमसी ग्रुप हैं। इन तीनों ग्रुपों के मेंबर्स ने अब तक 250 लोगों को ब्लड दिया है। बताया जाता है कि बीएमसी में रात के वक्त यदि किसी मरीज के लिए ब्लड की व्यवस्था नहीं करते हैं तो इसके लिए तीनों ग्रुपों में मैसेज चलाए जाते है। यदि इन गु्रप का कोई भी मैंबर यदि हॉस्टल में रहता है तो वह वहां से आकर ब्लड देता है। कई बार ड्यूटी के दौरान भी जूनियर डॉक्टर मरीजों को ब्लड दे चुकी हैं।

ब्लड देने का काम सराहनीय
जूनियर डॉक्टरों द्वारा जरूरतमंद लोगों को ब्लड देने का काम सराहनीय है। खुशी की बात यह है कि इन्हें एेसा करने के लिए बाध्य नहीं किया गया है। बल्कि वह स्वप्रेरणा से एेसा कर मरीजों की जान बचा रहे हैं।
डॉ. जीएस पटेल, डीन, बीएमसी

आकाश तिवारी
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