ऐसे थे हमारे सर गौर: 1918 में स्पेनिश बुखार के पीडि़तों में 2 लाख काढ़े की बोतल बंटवा कर बचाई थी जान

कोरोना की तरह पूरी दुनिया में फैली थी स्वाइन फ्लू की महामारी

By: sachendra tiwari

Updated: 26 Nov 2020, 01:51 PM IST

सागर. पूरा विश्व कोरोना के जिस बुरे दौर से गुजर रहा है। उस दौर से डॉ हरिसिंह गौर भी गुजर चुके हैं। जर्मनी व भारत के बीच हुए पहले विश्व युद्ध के बाद वर्ष 1918 में स्पेनिश बुखार ने पूरी दुनिया को जकड़ रखा था। इस बुखार को मुंबईया बुखार भी उस समय बोला जाता था।
बताया जाता है कि विश्व युद्ध के दौरान काफी संख्या में सैनिक भारत आए थे और उनके जरिए एन-1,एच-1ए वायरस भारत मे आ गया था। यही वायरस वर्ष 2009 में स्वाइन फ्लू के रूप में वापस लौटा है। सर गौर ने इस दौरान नागपुर म्युनिसिपल के अध्यक्ष रहते हुए काढ़े की दो लाख की बोतल लोगों में बंटवाई थी। इसमे खासबात जो थी वह अजवाइन की थी। काढ़े में सर गौर ने अजवाइन मिक्स कराया था। डा सरर गौर के इस प्रयास की अंग्रेजों की रिपोर्ट में बेहद सराहना मिली थी।

सर गौर की आत्मकथा में है जिक्र- भारत रत्न कमेटी के सदस्य अधिवक्ता डॉ संदीप रावत बताते है किन अंग्रेजों की रिपोर्ट में इसे निवारण उपाय कहा गया, जिसके जादुई रिजल्ट मिले थे। सर गौर ने उस दौर में महामारी का भी सामना किया था और हजारों लोगों की जान बचाई थी।
इसका जिक्र डॉ हरिसिंह गौर की आत्मकथा सेवंथ लाइफ के पृष्ठ संख्या 82 और 83 पर अंकित है। फाइल में पेज नंबर 14 में इसका जिक्र है।
18 के मुकाबले 21 वोट मिले थे सर गौर को
डॉ रावत बताते हैं कि सर गौर 1912 से 1918 के बीच प्रीवी काउंसिल ब्रिटेन में वकालत करते थे। बाद में नागपुर प्रिंसिपल के अध्यक्ष का चुनाव लड़ा। उस दौरान अंग्रेजों के चाटुकारों को अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया जाता था, जिसका सर गौर ने विरोध किया था और चुनाव में उतर गए थे। उस दौरान 40 मेंबर हुआ करते थे, जिसमें से 32 चुने जाते थे। आठ अंग्रेज चुनते थे। इसमें डॉ गौर को 21 वोट मिले थे और वह अध्यक्ष चुने गए थे।
सर गौर के मित्र महात्मा गांधी आ गए थे महामारी की जद में
सरकार की आत्मकथा में बताया गया है कि इस महामारी की चपेट में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी भी आ गए थे। सर गौर और महात्मा गांधी के अच्छे मित्रों में से थे। डॉ रावत ने बताया कि उस दौर में दुनिया भर में इस वायरस की चपेट में 5 करोड़ लोगों की मौत हुई थी। भारत देश में लगभग डेढ़ करोड़ लोग अपनी जान गवा बैठे थे।

sachendra tiwari Reporting
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