यहां बनाई जा रही ईको फ्रेंडली गणेश प्रतिमा, पर्यावरण का रखा जा रहा ध्यान

यहां बनाई जा रही ईको फ्रेंडली गणेश प्रतिमा, पर्यावरण का रखा जा रहा ध्यान

sachendra tiwari | Publish: Sep, 09 2018 10:00:00 AM (IST) Sagar, Madhya Pradesh, India

हर वर्ष बनाते हैं ईको फ्रेंडली प्रतिमाएं

बीना. हर वर्ष गणेशोत्सव में पीओपी की प्रतिमाएं बनाई जाती हैं, जिससे विसर्जन के समय पर्यावरण को हानि पहुंचती है, लेकिन शहर के एक मूर्तिकार द्वारा ईको फ्रेंडली प्रतिमा ही बनाईजाती है। इस वर्षवह कागज के डिस्पोजल की प्रतिमा बना रहे हैं, जिससे विसर्जन के समय पर्यावरण को हानि न पहुंचे। साहू समाज मंदिर पर हर वर्ष ईको फ्रेंडली प्रतिमा विराजित की जाती है। यह प्रतिमा अशोक साहू द्वारा तैयार की जाती है। इस वर्ष वह कागज के डिस्पोजल की प्रतिमा बना रहे हैं। उन्होंने बताया इस वर्षवह ग्यारह हजार डिस्पोजल से 13 फिट की प्रतिमा बना रहे हैं। इस प्रतिमा से पर्यावरण को किसी प्रकार की हानि नहीं होगी। डिस्पोजल के अलावा अन्य किसी सामग्री का उपयोग नहीं किया गया है। पिछले वर्षों में उन्होंने वेसन की बूंदी के लडडू, नारियल, दाल सहित अन्य प्रतिमाएं बना चुके हैं। श्री साहू द्वारा 1986 से प्रतिमाएं बनाने का काम किया जा रहा है और वह सिर्फ एक ही प्रतिमा तैयार करते हैं जो शहर में आकर्षण का केन्द्र रहती है। उन्होंने बताया कि लोगों को गणेशोत्सव और दुर्गा उत्सव पर ईको फ्रेंडली प्रतिमाएं ही बनाना चाहिए, जिससे विसर्जन के समय जल प्रदूषण न हो और जलीय जीवों को भी इससे हानि न पहुंचे।
शहर में पीओपी की भी बन रहीं मूर्तियां
गणेश उत्सव पास आते ही शहर में पीओपी की प्रतिमाएं बनाना शुरू कर दी हैं। इस ओर जिम्मेदार भी ध्यान नहीं दे रहे हैं। जबकि यह प्रतिमाएं पर्यावरण के लिए बहुत हानि पहुंचाने वाली हैं। छोटी और बड़ी सभी प्रकार की प्रतिमाएं बड़ी संख्या में बनाई जा रही हैं।

शहर में कई जगहों पर विराजेंगे गणपति

शहर में कई जगहों पर गणेश जी विराजमान होंगे। इसके लिए शहर भर में तैयारियां जोरों पर है। कच्चा रोड पर भी हर वर्ष नए रुप में गणेशजी विराजमान किए जाते हैं। वहीं इटावा में थाने के पीछे भगवान के बाल रुप में प्रतिमा विराजित की जाती हैं।

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