साढ़े तीन घंटे तक मान-मनोब्बल करते रहे अफसर, लंबी माथापच्ची के बाद तोड़े अवैध निर्माण

तीन दशक पहले सरपंच ने दे दिया था अस्थाई पट्टा, दो साल पहले शासकीय अस्पताल के लिए आवंटित हुए जमीन पर बीचों-बीच कच्चे मकान बनाकर रह रहे थे एक ही परिवार के चार भाई

 

 

सागर. उपनगर में शासकीय अस्पताल के लिए आवंटित जमीन पर किए गए अवैध निर्माण को आखिकार लंबी माथापच्ची के बाद सोमवार को तोड़ दिया गया। दोपहर 12 बजे जैसे ही राजस्व विभाग, नगर पालिका की टीम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची तो परिवार की महिलाएं और बच्चे भी विरोध करने खड़े हो गए। विवादित स्थिति को देखते हुए अफसरों ने लोगों को मनाने में साढ़े तीन घंटे का समय गुजार दिया। अतिक्रमणकारी केवल इसी बात पर अड़े थे कि उन्हें तत्काल रहने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए और प्रशासन उन्हें मकरोनिया क्षेत्र में पट्टे आवंटित करे। इसी सब वाद-विवाद में अतिक्रमणकारियों और अधिकारियों के बीच तनातनी की स्थिति भी बनी, हालांकि किसी प्रकार की सख्ती नहीं बरती गई। इस अतिक्रमण हटने के बाद अब अस्पताल के निर्माण में तेजी आ सकेगी।

पट्टा देने के आश्वासन के बाद माने लोग
सरकारी जमीन पर काबिज लोग पहले तो विवाद करने खड़े हो गए, लेकिन जब अधिकारियों ने उन्हें समझाइश देते हुए मदद करने की बात कही तो लोग कुछ शांत हुए। मौके पर मौजूद नायब तहसीलदार कुलदीप सिंह ने वरिष्ठ अधिकारियों से बात करने के बाद बड़तूमा में सरकारी जमीन पर पट्टा आवंटित करने और नगर पालिका सीएमओ बीएस चौहान ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत राशि स्वीकृत कराने का आश्वासन दिया, तब कहीं जाकर परिवार के लोग कब्जा छोडऩे तैयार हुए। इसके साथ ही परिवारों को रहने के लिए वैकल्पिक रूप से विद्यापुरम के समीम स्थित पटवारी भवन आवंटित कर दिया है।

अस्थाई पट्टे पर काबिज थे लोग
राजस्व विभाग के अनुसार बड़तूमा सरपंच द्वारा दिए गए अस्थाई पट्टे को आधार बनाकर करीब 30 साल से सरकारी जमीन पर कब्जा किए हुए थे। पूर्व में तो किसी ने ध्यान नहीं दिया, लेकिन दो साल पहले जब शासकीय अस्पताल के लिए जमीन आवंटित की गई तो यह अवैध कब्जे जमीन के बीचों-बीच होने के कारण निर्माण कार्य में बाधक बन रहे थे। इन्हें हटाने के लिए स्वास्थ्य विभाग दो साल से परेशान था, लेकिन अतिक्रमणकारी किसी भी शर्त पर जगह छोडऩे तैयार नहीं थे।

मदन गोपाल तिवारी
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