हर वर्ष सोयाबीन, उड़द में किसान उठा रहे घाटा, फिर भी नहीं कर रहे दूसरी फसलों की बोवनी

धान, मक्का, ज्वार की फसल हो सकती है फायदेमंद

By: sachendra tiwari

Published: 16 Oct 2020, 10:21 AM IST

बीना. खरीफ सीजन में किसान सिर्फ सोयाबीन और उड़द की बोवनी ज्यादा करते हैं और हर वर्ष उत्पादन कम होने के कारण उन्हें घाटा हो रहा है। किसानों की लागत भी इस सीजन की फसलों में नहीं निकल रही है। इसके बाद भी किसान दूसरी फसलों की बोवनी नहीं कर रहे हैं। जिन किसानों ने सोयाबीन, उड़द के अलावा अन्य फसलों की बोवनी की है उन्हें लाभ हुआ है। इस वर्ष सोयाबीन ४० हजार हेक्टेयर में बोया गया था। इतना बढ़ा रकबा पहली बार था।
खरीफ में कीट, अतिवृष्टि या अल्पवृष्टि के कारण पिछले पांच छह वर्षों से किसानों को सोयाबीन, उड़द की फसल में लागत निकालना मुश्किल हो रहा है। इस वर्ष भी सोयाबीन का उत्पादन करीब 4 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और उड़द का करीब 50 किलो प्रति हेक्टेयर उत्पादन रहा है। यह औसत आंकड़े हैं, कई जगह इससे भी कम उत्पादन हुआ है। यदि फसल अच्छी होती तो सोयाबीन का उत्पादन 20 से 25 क्विंटल और उड़द का १० क्विंटल तक प्रति हेक्टेयर उत्पादन होता है। पिछले कई वर्षों से घाटा होने के बाद भी किसान सोयाबीन, उड़द की बोवनी करते आ रहे हैं। जबकि इसकी जगह धान, मक्का, ज्वार की बोवनी फायदेमंद हो सकती है। धान का प्रति हेक्टेयर 40 क्विंटल, मक्का का 20 से 25 क्विंटल तक उत्पादन हो रहा है और दाम भी अच्छे मिल रहे हैं। किसानों को कृषि अधिकारी सहित अन्य माध्यमों से जागरूक भी किया जाता है, लेकिन वह इन फसलों की बोवनी नहीं कर रहे हैं।
खाद, कीटनाशक दवाओं में लगा रहे ज्यादा लागत
किसान फसलों का उत्पादन बढ़ाने और कीटों से बचाने के लिए निर्धारित मात्रा से ज्यादा कीटनाशक, खाद का प्रयोग कर रहे हैं, जिससे लागत ज्यादा लगने के साथ-साथ मिट्टी भी खराब हो रही है। सोयाबीन, उड़द के अलावा दूसरी फसलों की बोवनी करने पर कीटनाशक और खाद भी कम लगेगा। साथ ही जैविक खाद का भी प्रयोग कर सकते हैं।
किसानों को होना होगा जागरूक
किसानों को जागरूक होने की जरूरत है और सोयाबीन, उड़द के अलावा अन्य फसलों की बोवनी करना चाहिए, जिससे उत्पादन भी अच्छा होगा और दाम भी अच्छे मिलेंगे। जिन किसानों से इस वर्ष धान, मक्का बोई है उनको लाभ हुआ है।
राजेश शर्मा, आरएइओ
छह वर्षों में सोयाबीन का रकबा, उत्पादन
वर्ष रकबा उत्पादन
२०१५-१६ ३०६८० हे. ४ क्विंटल
२०१६-१७ २९५८५ हे. १२.२० क्विंटल
२०१७-१८ १७३३४ हे. ६.६६ क्विंटल
२०१८-१९ १६५०० हे. ५.०६ क्विंटल
२०१९-२० ३१५६० हे. १४.२२ क्विंटल
२०२०-२१ ४००७० हे. ४ क्विंटल प्रति हे.

sachendra tiwari Reporting
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