पहले लाइन बिछाने में गुजारे पांच साल, अब सप्लाई में हीलाहवाली

कोरेगांव के लोगों को जलसंकट से मुक्ति दिलाने में निगम व नपा की अनदेखी

By: manish Dubesy

Published: 18 Dec 2018, 03:02 PM IST

२ माह पहले १० हजार में कराए कनेक्शन, लोगों को पानी १ बूंद तक नसीब नहीं हुआ
५३०२ रुपए निगम ने लिया कनेक्शन चार्ज तो प्लंबर, लेबर, सामग्री में व्यय किए करीब चार से पांच हजार
सागर. नगर पालिका मकरोनिया के वार्ड नंबर-११ हमेशा से जलसंकट से जूझ रहा है, लेकिन नगर निगम और नगर पालिका मकरोनिया के जिम्मेदारों की अनदेखी के कारण व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही है। पहले तो निगम ने कोरेगांव तक पेयजल लाइन बिछाने में पांच साल गुजार दिए अब जैसे-तैसे लाइन पहुंची है तो बीते चार माह से यहां सप्लाई चालू नहीं हो सकी है। जबकि करीब गांव के आधा सैकड़ा परिवारों ने पानी की किल्लत से मुक्ति पाने के लिए १०-१० हजार रुपए खर्च कर दिए हैं। निगम के अधिकारियों ने ५३०२ रुपए शुल्क के साथ कनेक्शन तो करा दिए, लेकिन अब सप्लाई में हीलाहवाली की जा रही है।
लाइन बिछाने में बीत गए पांच साल
कोरेगांव में पेयजल की व्यवस्था कराने के लिए करीब पांच साल पहले नरयावली विधायक लारिया ने १२ लाख रुपए स्वीकृत कर राजघाट की लाइन के विस्तार की घोषणा की थी। इसके बाद नपा ने वर्ष २०१६ में स्टीमेट तैयार कराया और नगर निगम को १६ लाख १४ हजार की राशि जारी की। जिसके बाद निगम ने अूधरी लाइन बिछाकर छोड़ दी और ९ लाख ६० हजार की अतिरिक्त राशि की मांग की गई। यह राशि भी करीब एक साल पहले नगर पालिका ने भुगतान कर दिया। करीब चार माह पहले जैसे-तैसे लाइन तो कोरेगांव तक पहुंच गई और नगर निगम ने लोगों के घरों में नल कनेक्शन भी दे दिए, लेकिन पानी की एक बूंद भी आज तक लोगों के घरों तक नहीं पहुंच सकी है।
५ में से १ हैंडपंप चालू
करीब चार से पांच हजार की आबादी वाले कोरेगांव में पानी के लिए दो कुएं और पांच शासकीय हेंडपपं हैं। कुआं नियमित सफाई न होने के कारण बर्बाद हो रहे हैं और इनका पानी उपयोग करने लायक नहीं है। रहवासियों के लिए गांव में जो पांच शासकीय हैंडपंप हैं वे एक मात्र सहारा हैं, लेकिन वे भी कभी तकनीकि खराबी के कारण बंद हो जाते हैं तो दिसंबर-जनवरी से इनमें पानी की कमी हो जाती है। एक-दो एेसे हैंडपंप जो गर्मी में भी सहारा बनते हैं, वे गंदगी से घिरे हुए हैं।

हमेशा से यहां पानी की किल्लत है, हैंडपंप तो हैं, लेकिन दिसंबर में ही पानी देना बंद कर देते हैं, जैसे-तैसे नल कनेक्शन के लिए रुपए जोड़कर कनेक्शन कराया, लेकिन पानी नसीब नहीं हुआ।
सुनीताबाई
गांव के कुए में पानी तो रहता है, लेकिन वह पीने के लिए उपयोग नहीं कर सकते। यदि इसी को नियमित साफ करें तो लोगों की कुछ परेशानी दूर हो सकती है।
सीताबाई
पहले पांच हजार रुपए का बोला था, लेकिन अब तक हम लोग १०-१० हजार रुपए खर्च कर चुके हैं। इसके बाद भी एक बूंद पानी घर तक नहीं पहुंच सका है। नपा अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
अजीत सिंह ठाकुर
कहने के लिए पांच हैंडपंप हैं, लेकिन केवल दो ही थोड़ा बहुत सहारा बनते हैं। कुछ दिनों बाद तो दो से तीन किलो मीटर दूर पानी के लिए भटकना पड़ेगा।
जितेंद्र अहिरवार

manish Dubesy Desk
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