scriptfly ash -The identity of Singrauli became the storm of ash and smoke | fly ash became trouble राख की आंधी और धुएं की धुंध बनी सिंगरौली की पहचान | Patrika News

fly ash became trouble राख की आंधी और धुएं की धुंध बनी सिंगरौली की पहचान

- खुले वाहन से ढो रहे राख, सड़क से लेकर बस्तियों तक फैल रहा प्रदूषण
- खदान को भरने के लिए राख उड़ाते दौड़ रहे वाहन

सिंगरौली। राख के निस्तारण में लापरवाही तो पहले ही भारी पड़ रही थी अब जो उठाव हो रहा है, उससे भी शहर में राख की आंधी उड़ रही है। इससे प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। इस पर न तो पॉवर प्लांट कंपनियां ध्यान दे रही हैं और न ही प्रशासन इसे रोकने के लिए कदम उठा रहा है। राख की आंधी और धुएं की धुंध सिंगरौली रीजन की असली पहचान बनते जा रहे हैं।

सागर

Published: March 05, 2022 11:51:37 pm


नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देश के बाद केंद्रीय वन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के प्रस्ताव पर बंद पड़ी कोयला खदानों को राख से भरने का निर्णय लिया गया था। सिंगरौली जिले की ऐसी खदानों तक राख भेजने के लिए खुले वाहन का इस्तेमाल किया जा रहा है। डंपर व दूसरे लोडिंग वाहनों को नहीं ढंकने के कारण बैढऩ शहर के मुख्य मार्गों में राख की आंधी चलती है। वाहन राख बिखेरते हुए बंद पड़ी खदान तक जा रहे हैं। इससे सड़कों पर कचरे के साथ प्रदूषण भी बढ़ रहा है। वातावरण में राख और कोयला के कण इस तरह मिले हुए हैं कि कुछ घंटे की खुली सैर बदरंग कर देती है। यही धूल यहां की खेती को भी निगल रही है। इससे किसान खासे परेशान हैं।
singrauli fly ash crisis
खुले डंपरों से सिंगरौली की सड़कों में ढोई जा रही फ्लाइ ऐश
पानी हो रहा जहरीला
फ्लाइ ऐश का निस्तारण नहीं होने और डायेक से इसके रिसाव के कारण सिंगरौली के जलस्रोत जहरीले हो रहे हैं। एनजीटी की एक्सपर्ट कमेटी ने भी पाया था कि रिहंद रिजर्ववायर में पॉवर प्लांट का वेस्ट वाटर मिल रहा है। जिसके साथ राख और दूसरे रसायन मिल रहे हैं। रिहंद के साथ ही भूजल भी इन रसायनों से प्रदूषित हो रहा है। एनजीटी के निर्देश पर प्रभावित इलाकों में आरओ प्लांट लगवाए गए थे पर्याप्त नहीं हैं। इससे प्रदूषित पानी से ही लोग गुजारा कर रहे हैं।
पर्यावरण को नुकसान
फ्लाइ ऐश और कार्बन उत्सर्जन से सिंगरौली रीजन का पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है। पॉवर प्लांट और कोयला खदानों के साथ इस रीजन में चल रहे प्रदूषण फैलाने वाले 100 से अधिक उद्योग फिजा को खराब कर रहे हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने बढ़ते प्रदूषण और उसे कम करने के प्रयासों में कमी पर चिंता जताई है। उद्योगों पर जुर्माना भी लगाया है पर स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है। एनजीटी ने माना है कि प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों का असर मानव स्वास्थ्य, खेती, हवा और पानी पर पड़ रहा है।

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