फर्स्ट सेमेस्टर की परीक्षा दी, खाते में 27 हजार रुपए आते ही हो गए गायब

एससीएसटी छात्रवृत्ति में फर्जीवाड़े की आशंका -प्रशासन स्तर पर कॉलेजों से नहीं मांगी जा रही दर्ज छात्र और परीक्षा न देने वाले छात्रों की जानकारी

By: manish Dubesy

Published: 03 Jan 2019, 04:02 PM IST

आकाश तिवारी.
सागर. एससी-एसटी विद्यार्थियों के रूप में सागर में गिरोह सक्रिय है। इस गिरोह के सदस्य न केवल शासन से मिलने वाली छात्रवृत्ति हड़प रहे हैं। बल्कि कॉलेजों को भी चूना लगाने में लगे हैं।
एेसे कुछ मामले बीएड कॉलेजों में देखने को मिल रहे हैं। बता दें कि एससी-एसटी वर्ग के छात्रों को बीएड में दाखिला लेने पर २७ हजार रुपए की छात्रवृत्ति दी जाती है। इसी राशि को हड़पने के लिए गिरोह बीएड कॉलेजों में नजरें गड़ाए हुए हैं। शहर में बीएड महाविद्यायलों में एेसे ढेरों मामले मिल जाएंगे, जहां गिरोह के सदस्यों ने कॉलेज प्रबंधनों को लाखों का चूना लगाया है। हालांकि इस फर्जीवाड़े से कुछ कॉलेजों ने सबक लिया है और एससीएसटी वर्ग के विद्यार्थियों से एडवांस में चेक लेना शुरू कर दिया है ताकि तथाकथित छात्र राशि हड़प न सकें।
प्रोफेशनल कोर्स में चल रहा फर्जीवाड़ा
यह गिरोह सिर्फ बीएड कॉलेजों तक सीमित नहीं है। बल्कि सभी प्रोफेशनल कोर्स में यह फर्जीवाड़ा चल रहा है। शासन के नियमानुसार इन कोर्स में एससी-एसटी वर्ग के छात्रों को शुल्क कम जमा करना होता है। इसी का फायदा उठाकर गिरोह प्रबध्ंान के अलावा शासन को चूना लगाने में जुटे हैं।
छात्रवृत्ति मामले में राशि शासन जारी करता है। लिहाजा इसकी सारी जिम्मेदारी शासन की होती है। आदिमजाति कल्याण विभाग चाहे तो सभी प्रोफेसनल कोर्स में दर्ज छात्रों की संख्या कॉलेजवार निकलवा कर जांच करा सकता है। यदि एेसा हो जाए तो निश्चित रूप से सागर जिले में एक बड़ा फर्जीवाड़ा निकलकर सामने आ सकता है।
केस-१
शहर के एक बीएडी कॉलेज में वर्ष २०१६-१७ में एक छात्र ने बीएड में दाखिला लिया। ५ हजार रुपए की राशि देकर देकर दाखिले की प्रक्रिया पूरी की। छह महीने तक चली छात्रवृत्ति की प्रक्रिया के बाद सेमेस्टर की परीक्षा भी दी, लेकिन जैसे ही छात्रवृत्ति आई वैसे ही वह छात्र गायब हो गया।
केस-२
इस गिरोह में सिर्फ लड़के नहीं है। मकरोनिया स्थिति बीएड कॉलेज में २०१७-१८ में बीएड में एक छात्रा ने प्रवेश लिया, लेकिन यह छात्रा भी छात्रवृत्ति की राशि २७ हजार रुपए में खाते में आने के बाद से कोर्स पूरा करने नहीं आई।
एेसे समझें इस फजीवाड़े को
जानकारी के अनुसार गिरोह के लोग छात्र बनकर बीएड के कॉलेजों में यह दाखिला लेते हैं। शासन के नियम के अनुसार एससी-एसटी वर्ग के छात्रों से कॉलेज प्रबंधन सिर्फ फीस के नाम पर ५ हजार रुपए ही जमा करा सकता है। गिरोह ५ हजार रुपए परीक्षा फीस जमाकर दाखिला ले लेता है। इतना ही नहीं पहले सेमेस्टर की परीक्षा में बैठ जाते हैं, लेकिन जैसे ही छात्रवृत्ति की राशि उसके खाते में आती है। वैसे ही वह गायब हो जाते हैं। आवेदन फार्म में दर्ज पते फर्जी होते हैं। फोन नंबर भी बाद में बंद मिलते हैं।

दो यूनिवर्सिटी से जुड़े हैं सौ से अधिक बीएड कॉलेज
सागर संभाग में डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विवि से संबद्ध निजी कॉलेजों में और महाराजा छत्रसाल विवि संबद्ध सरकारी कॉलेजों में बीएडी कराए जा रहे हैं। दोनों जगहों पर विवि स्तर से किसी भी प्रकार की मॉनीटरिंग नहीं की जाती है। विवि प्रशासन इसलिए भी इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाता है क्योंकि यह राशि शासन द्वारा दी जाती है। इस पचड़े में विवि प्रशासन फंसना भी नहीं चाहता।

manish Dubesy Desk
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