सागर. गोपालगंज थाने के नजदीक शुक्रवार दोपहर पिता के अपमान से भड़के युवक ने मोहल्ले के ही एक व्यक्ति पर जानलेवा हमला कर दिया। छुरा लगने के बाद जख्मी व्यक्ति दौड़ते हुए सड़क तक पहुंचा। उसे खून से लथपथ हालत में सड़क पर गिरा देख लोगों ने डायल१०० पर कॉल कर पुलिस को खबर दी जिसके बाद पहुंची एफआरवी ने अस्पताल पहुंचाकर उसे भर्ती कराया। सीसीटीवी कैमरे और लोगों से पूछताछ के बाद आरोपी का हुलिया सामने आने के बाद पुलिस ने उसे दबोच लिया है। गोपालगंज क्षेत्र में थाने से चंद मीटर दूर हुई छुरेबाजी की वारदात से इलाके में सनसनी फैला दी है। इससे पहले विगत दो माह में दो युवकों की चाकू से गोदकर हत्या की जा चुकी है।
जानकारी के अनुसार नाखरे गली निवासी विक्रम रावत (४३) शुक्रवार सुबह करीब सवा १० बजे घर से निकलकर सड़क की ओर आ रहा था तभी युवक ने उसे रोक लिया। दोनों के बीच लोगों ने बहस-झूमाझटकी होते देखी जिसके बाद विक्रम ने चीखते हुए दौड़ लगा दी। जैसे ही वह सड़क तक पहुंचा निढाल होकर गिर पड़ा। लोग उसके पास पहुंचे तो विक्रम जख्मी था और उसके पांव से खून की धार बह रही थी। तुरंत खबर डायल-१०० को दी गई जिसके बाद गोपालगंज थाने से पहुंचे एफआरवी ने खून से लथपथ पड़े विक्रम रावत को ले जाकर अस्पताल में भर्ती कराया। सीएसपी आरडी भारद्वाज के अनुसार सरेराह छुरेबाजी की वारदात के बाद पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों के फुटेज और लोगों से पूछताछ के आधार पर हमलावर की पहचान कर पार्टियों को रवाना किया।
हमलावर बसंत विश्वकर्मा जैसीनगर के पास किसी गांव का रहने वाला है। वो अपने पिता भगवानदास सहित नाखरे गली में किराए से रहता था। विक्रम को छुरा मारने के बाद बसंत गांव भाग गया था, जिसे पुलिस ने दबोच लिया। पूछताछ में बसंत ने बताया कि शुक्रवार सुबह पिता भगवानदास बोरी से रेत ढुलाई कर रहे थे। गली में रहने वाले विक्रम ने अपमानित कर मारपीट की थी। पिता ने घर आकर जब बताया तो वह सहन नहीं कर पाया और बदला लेने विक्रम पर हमला कर दिया।
करीब १८-१९ वर्षीय बसंत विश्वकर्मा के अनुसार वह विक्रम को सबक सिखाना चाहता था और इसीलिए उसने पांव पर छुरा मारा था। लेकिन धक्का-मुक्की के चलते वार गहरा धंस गया। उधर हमले में जख्मी विक्रम के पांव की मुख्य नस कट जाने से शरीर का अधिकांश रक्त सड़क पर ही बह गया था। जब उसे एफआरवी ने अस्पताल पहुंचाया उसकी नब्ज भी काफी धीमी पड़ गई थी और डॉक्टर भी परेशान थे। उसे तुरंत ऑपरेशन थिएटर में शिफ्ट कराया और लगातार ब्लड यूनिट चढ़ाते हुए कटी हुई नसों को जोड़ा। विक्रम के दिल ने ऑपरेशन के बीच में एक-दो बार काम करना भी बंद कर दिया लेकिन डॉक्टरों ने जैस-तैसे उसे फिर शुरू कर जान बचाई। विक्रम की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है।
एफआरवी पायलट ने दिया अपना खून
वारदात के बाद विक्रम रावत के शरीर से लगातार खून बहने से उसका ब्लड प्रेशर लगभग गायब हो गया था। डॉक्टरों ने जांच की तो उनके माथे पर भी बल पड़ गए थे। विक्रम को तुरंत ब्लड चढ़ाने की जरूरत बताने पर उसे अस्पताल लेकर पहुंचे एफआरवी पायलट बसंत मोनू तिवारी ने स्वयं आगे आकर अपना खून देने की पेशकश की। मोनू तिवारी द्वारा खून दिए जाने के बाद
अन्य परिजनों ने भी रक्त दान किया और उससे विक्रम की जान बच सकी।

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