एकल गायन, सुगम, एकल गायन पाश्चात्य से युवा उत्सव का शुभारंभ

एकल गायन, सुगम, एकल गायन पाश्चात्य से युवा उत्सव का शुभारंभ

Sanket Shrivastava | Publish: Sep, 11 2018 10:52:35 AM (IST) | Updated: Sep, 11 2018 10:52:36 AM (IST) Sagar, Madhya Pradesh, India

विद्यार्थियो ने विभिन्न विधाओं में बढ़चढ़ कर भाग लिया

सागर. शासकीय महाविद्यालय मकरोनिया में युवा उत्सव 2018 का शुभारंभ किया। सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं की प्रस्तुतियों के साथ हुआ। उद्धाटन सत्र के आरंभ में अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर मालार्पण तथा उनके समक्ष द्वीप प्रज्ज्वलन कर किया। छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई। प्राध्यापक डॉ. एसी जैन ने युवा उत्सव के उद्देश्य को बतलाते हुए कहा कि विद्यार्थियों के सर्वागीण विकास के लक्ष्य को लेकर ही यह आयोजन शुरू किया गया। आयोजन में शामिल विभिन्न विधाएं व्यक्तित्व विकास से गहरे सम्बद्ध है। समस्त विद्यार्थियो को युवा उत्सव की विभिन्न विधाओं में बढ़चढ़ कर भाग लेना चाहिए।
मुख्य अतिथि गुलझारी लाल जैन ने सभी विद्यार्थियों से सांस्कृतिक गतिविधियों में शामिल होने का आश्वान किया। महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. नीरा सहाय ने सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के महत्व पर अपने विचार रखते हुए कहा कि प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले छात्रों की तरह ही दर्शक छात्र भी इन्हें सफल बनाते हैं। बाद में इसी तरह में उनमें भी रूचि उत्पन्न होती है।
युवा उत्सव प्रभारी डॉ. दिव्या गुरू ने संचालन किया। विविध तियोगिताओं की विधाओं व उनके नियमों से संबंधित जानकारियां दी। डॉ. मिथलेश शरण चौबे ने आभार व्यक्त किया। एकल गायन, सुगम, एकल गायन पाश्चात्य, रंगोली, भाषण, क्ले मॉडलिंग, क्विज प्रतियोगिताएं आयोजित की गई।

'मकबरे का रखवाला- से बताया उच्च व निम्न वर्ग का भेद
डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विवि में सांस्कृतिक परिषद द्वारा जर्मन दार्शनिक फ्रांज काफ्का द्वारा लिखे नाटक 'मकबरे का रखवालाÓ का मंचन किया गया। हिंदी अनुवाद उदयन बाजपेयी और संगीता गुंदेचा ने किया है।
नाटक निम्न वर्ग और उच्च वर्ग के बीच के भेंद पर आधारित था। निर्देशक डॉ. राकेश सोनी और सह निर्देशक अभिषेक दुबे थे। मुख्य किरदार आकाश विश्वकर्मा का रहा। राहुल सेन, आनंद अग्रवाल, अशवंत सिंह लोधी, शुभम पटेल, मोहित दुबे, संजू आठ्या ने भी किरदार निभाया। नाटक की कहानी मकबरे के एक रखवाले से शुरू होती है, जो राजा प्रिंस लियो को पूर्वजों की पीड़ा बताने के लिए राजमहल तक पहुंचता है, लेकिन महल के मंत्री द्वारा उसे राजा से मिलने नहीं दिया जाता। जब रखवाले की राजा से मुलाकात होती है तब वह बताता है कि उनके पूर्वज किस तरह मकबरे से निकलकर पीड़ा व्यक्त करते हैं। तब राजा को समझ आता है कि सत्ता के सही संचालन के लिए उच्च वर्ग के लोग के साथ निम्न वर्ग को भी मौका देना जरूरी है। तभी राज्य की सही स्थिति पता चल सकेगी।

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