दादा-दादी के साथ ज्यादा समय बिता रहे बच्चे, सीख रहे संस्कारों में जीना

दादा-दादी के साथ ज्यादा समय बिता रहे बच्चे, सीख रहे संस्कारों में जीना

Nitin Sadafal | Publish: Sep, 09 2018 10:57:29 AM (IST) Sagar, Madhya Pradesh, India

आज ग्रैंड फॉदर डे पर विशेष

सागर. आज भागदौड़ भरी जिंदगी में एकल परिवार का चलन तेजी से बढ़ा है। लेकिन इस धारा के समानांतर ऐसे लोग भी हैं जो संयुक्त परिवार में विश्वास करते हैं। शहर में कई ऐसे परिवार मौजूद हैं जो बेहद खुश हैं। इन परिवारों के सभी मामलों में बुजुर्गों की राय काफी मायने रखती है। घर के बच्चों का भी लगाव अभिभावकों से ज्यादा दादा-दादी से होता है। बच्चे अपना ज्यादा से ज्यादा वक्त इनके संग बिताना पसंद करते हैं और बुजुर्गों का भी समय बच्चों संग कब गुजर जाता है पता ही नहीं चलता। ग्रैंड पैरेंट्स डे पर कुछ ऐसे ही बुजुर्गों की बात जो अपने नाती और पोतियों के खुशियों का अहम हिस्सा हैं।
घर में बच्चे दादा-दादी के साथ तरह-तरह के खेल खेलना पसंद करते हैं। दादा-दादी से बच्चों को कहानियां सुनने मिलती हैं, जो जीवन में बड़ा पाठ सिखाते हैं। अभिभावकों से ज्यादा बच्चों की फरमाइशें और जिद उन्हीं से ही पूरी होती हैं। इससे परिवार में प्रेम बढ़ता और एक जुटता रहती है।

जीवन जीने के किस्से सुनाते हैं कहानियों में
मकरोनिया निवासी सीता नामदेव अपने पोते के को काभी वक्त देती हैं। वह बताती हैं बच्चों के साथ अब बच्चे से जैसा की व्यवहार करना होता है। उन्हें हम वक्त देते हैं तो चिड़चिड़ापन नहीं रहता है। समय-समय पर ऐसी कहानियां सुनाते हैं जिससे वो अपने माता-पिता का भी मान बनाएं रह सकें। सीता बताती हैं कि उनका पोता घर आता है तो लिपटकर अपने स्कूल के किस्से मुझे सुनाता है। दादी आज हमनें स्कूल में ये किया, दादी मैनें अपने फे्रंड के साथ कट्टी कर ली। उन्होंने बताया बेटा कांट्रेक्टर है और बहु घर के कामकाजों में व्यस्त रहती हैं, ऐसे में परिवार में बच्चों को समय देना ज्यादा जरूरी हो जाता है। दिनभर बच्चों की चहल-पहल के बीच वक्त कैसे गुजर जाता है पता ही नहीं चलता।

बच्चों से सीख रही नई टेक्नोलॉजी
जनता स्कूल में शिक्षक रही ऊषा ताम्रकार का कहना है कि नौकरी के चलते अपने बच्चों को ज्यादा समय नहीं दे पाए लेकिन अब रिटायरमेंट के बाद कोशिश है कि नाती-पोतियों को ज्यादा से ज्यादा समय दें। उन्होंने बताया सोमेश अभी नर्सरी में हैं, लेकिन अपनी दादी के साथ बातें बहुत करता है। वो अपनी हर परेशानी दादा-दादी को बताता हैं। दादा भी एडवोकेट हैं। उन्होंने बताया सोमेश का बड़ा भाई भी है। वो टेक्नोलॉजी से ज्यादा फे्रंडली रहता है। मैं उसे कहानियां सुनाती हूं और वो मुझे नई-नई तकनीकी बारे में बताता है। हम-दोनों एक-दूसरे को अधिक वक्त देते हैं।

मिलते हैं संस्कार
मनोवैज्ञानिक राजीव जैन ने बताया कि आज की लाइफ में बच्चों की जिंदगी में दादा-दादी का एक अलग महत्व हैं, इससे बच्चे संसाकारित बनते हैं। उन्होंने बताया कि स्कूलों में परिवार के महत्व को समझाया जाता है। ग्रैंड पैरेन्ट्स डे के मौके पर कई स्कूलों में कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाता है। आज व्यस्तता भरे इस दौर में पैरेंट्स अपने बच्चों को वक्त नहीं दे पाते, लेकिन उनके ग्रैंड पैरेंट्स से बच्चों में संस्कार आते हैं। साथ ही वह यह सीखता है कि अपने अभिभावक के साथ कैसा व्यवहार करें।

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