गुरुकृपा से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं-मुनिश्री

यागमंडल विधान हुआ संपन्न, आज होगी मूर्तियों की स्थापना

By: sachendra tiwari

Published: 24 Feb 2021, 09:26 PM IST

बीना. खिमलासा में त्रिमूर्ति जिनालय में विराजमान मुनिश्री विमलसागर महाराज के ससंघ सान्निध्य में और प्रतिष्ठाचार्य नितिन भैयाजी के मार्गदर्शन में 1008 भगवान शांतिनाथ, भगवान कुंथुनाथ, भगवान अरहनाथ की पद्मासन जिनबिम्ब प्रतिमाओं को भव्य संगमरमर, स्वर्ण और कांस्य रंजित वेदिका पर आज मंत्रोच्चार के साथ स्थापित किया जाएगा।
बुधवार को ध्वजारोहण और यागमंडल विधान संपन्न हुआ। विधान में मुख्य पात्रों सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने अघ्र्य समर्पित किए। अशोक शाकाहार ने बताया कि सुबह 7 बजे मुनि संघ के सान्निध्य में आज भगवानों की मूर्तियों की स्थापना का अनुष्ठान प्रारंभ होगा जो सुबह 8.30 बजे तक चलेगा। मुनिश्री विमलसागर महाराज ने वेदी प्रतिष्ठा के अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि गुरुकृपा से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं, जो कार्य वर्षों से नहीं हो सकते वह कार्य भी अल्प समय में ही पूर्ण हो जाते हैं। छोटे से ग्राम खिमलासा में भी आप सभी ने यह चमत्कार कर दिया। त्रिमूर्ति जिनालय इसकी जीती जागती मिशाल है। 1008 भगवान शांतिनाथ, भगवान कुंथुनाथ, भगवान अरहनाथ की भव्य एवं विशालकाय पद्मासन मूर्तियों को आज आप सभी अद्वितीय नवीन वेदिका पर विराजामन करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कार्य कोई भी हो छोटा या बड़ा, अच्छे कार्यों में थोड़े बहुत विघ्न-बाधा तो आते ही रहते हैं। भगवान भी भक्तों के समर्पण, त्याग, तपस्चर्या की परीक्षा अवश्य करते हैं, जो इस परीक्षा में पास हो जाता है उसका कल्याण हो जाता है। चौरासी लाख योनियों में जन्म लेने के उपरांत यह मनुष्य योनि मिली है, इसको यूं ही व्यर्थ नहीं गंवाएं। इसके एक-एक पल का सदुपयोग कर लें। मुनिश्री भावसागर महाराज ने कहा कि भगवान की भक्ति आराधना करने से बड़े-बड़े संकट और असाध्य रोगों पर भी विजय प्राप्त की जा सकती है। सोलहवें तीर्थंकर 1008 भगवान शांतिनाथ की नियमित पूजा, अर्चना, अभिषेक, शांतिधारा करने का फल अवश्य मिलता है।

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