गर्मी में दम तोड़ रहे हैंडपंप, नलजल योजनाएं भी पड़ी बंद, पानी के लिए भटक रहे ग्रामीण

हर वर्ष किल्लत होने के बाद भी नहीं जाग रहे जिम्मेदार

By: sachendra tiwari

Updated: 18 Apr 2021, 10:08 PM IST

बीना. गर्मी का मौसम आते ही ग्रामीण क्षेत्रों में जलसंकट गहराने लगता है और ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान होते हैं। इसके बाद भी इन गांवों में समस्या का स्थाई हल नहीं निकाला जा रहा है। कहीं नलजल योजनाएं बंद पड़ी हैं तो कहीं हैंडपंपों का जलस्तर कम होने से बंद हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में कई नलजल योजनाएं कागजों तक सीमित हैं और हकीकत में ग्रामीण पानी के लिए परेशान हो रहे हैं। साथ ही जलस्तर गिरने के कारण हैंडपंप दम तोड़ रहे हैं और ऐसी स्थिति में जल जीवन मिशन के तहत हर घर तक पानी पहुंचाने का दावा किया जा रहा है। ग्राम बरौदिया में ग्रामीण पत्थरों के बीच भरे पानी का उपयोग कर रहे हैं, क्योंकि अन्य कोई स्रोत पानी का गांव में नहीं है। यदि इस गड्ढे का पानी खत्म हो जाए तो ग्रामीण बूंद-बूंद पानी को तरस जाएंगे। इसी प्रकार रामपुर गांव में हैंडपंप सूख चुके हैं और दो वर्षों से नलजल योजना के ट्यूबवेल की मोटर जली है, जिसे बदला नहीं जा रहा है। साथ ही गांव में बिछाई गई पाइप लाइन भी रोड बनाते समय निकाल ली गई है जो फिर से नहीं डाली गई है। गांव के लोगों की प्यास निजी ट्यूबवेलों से बुझाई जा रही है। इसी प्रकार भानगढ़ में कुछ हिस्से में अभी तक लाइन नहीं डल पाई है, जिससे ग्रामीणों को खेतों से पानी लाना पड़ता है। गिरोल में पानी की समस्या हर वर्ष ठंडों से ही शुरू हो जाती है, लेकिन अभी तक वहां कोई व्यवस्था नहीं हुई है। इसी प्रकार चमारी, ढिमरौली, हींगटी-सिंरोजीपुर, ढिमरौली, लहटवास सहित दर्जनों गांवों में पानी की समस्या बनी हुई है।
सेमरखेड़ी में कागजों में चल रही नलजल योजना
सेमरखेड़ी में नलजल योजना सिर्फ कागजों में चल रही है। पिछले आठ माह से बंद पडी हैं। जनपद पंचायत सीइओ से मांग करने बाद एक दिन योजना चलाई गई और फिर आठ दिन से बंद पड़ी है। इस संबंध में सीइओ, पंचायत सचिव को सूचना दी गई है, लेकिन अभी तक कोई कार्य नहीं किया गया। ग्रामीण सीताराम ठाकुर ने बताया कि आज सुबह ११ बजे खाली बर्तन लेकर जनपद पंचायत कार्यालय में प्रदर्शन करेंगे।
नई नलजल योजनाएं हुई हैं स्वीकृत
पिछले दिनों नई नलजल योजनाएं स्वीकृत भी हुई हैं, लेकिन इनमें कुछ का काम ही शुरू हो पाया है। कई जगह तो अभी काम शुरू नहीं हुआ है, जिससे गई साल बाद ग्रामीणों को पानी मिलने के उम्मीद है और यह योजनाएं भी तभी चलेगी जब ट्यूबवेल में पानी पर्याप्त निकले।
पीएचइ विभाग को भेजी रिपोर्ट
कुछ दिन पूर्व करीब एक दर्जन गांव में पानी की समस्या होने की सूची सीइओ द्वारा पीएचइ के लिए भेजी गई है और वहां पानी की व्यवस्था करने के लिए कहा गया है, लेकिन अभी तक इन ग्रामों में विभाग ने कोई कार्य नहीं किया है। साथ ही यहां पीएचइ विभाग का कार्यालय न होने के कारण लोग अधिकारियों से नहीं मिल पाते हैं, जो कर्मचारी पदस्थ हैं उनसे भी संपर्क नहीं हो पाता है।

sachendra tiwari Reporting
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