नरसिंहपुर की बच्ची को सागर जिले की समिति ने दे दिया गोद, हाइकोर्ट तक पहुंचा मामला

हाइकोर्ट ने कलेक्टर को दिए मामले में दखल के निर्देश, दो माह में करना होगा निर्णय।

सागर. जिले के देवरी क्षेत्र निवासी एक महिला पर गलत तरीके से एक नाबालिग को अपने साथ रखने के आरोप लगे हैं। इसको लेकर पहले तो स्थानीय स्तर पर शिकायतें की जा रहीं थीं, लेकिन अब बरमान जिला नरसिंहपुर निवासी विजय रामदास साधू ने हाइकोर्ट में याचिका दायर की है। जिसके बाद कोर्ट ने मामले की पूरी हकीकत का पता लगाने सागर जिला कलेक्टर को निर्देशित किया है। साधू सहित अन्य जानकारों का अरोप है कि सागर जिले की बाल कल्याण समिति ने नरसिंहपुर जिले की एक नाबालिग लड़की को नियम विरुद्ध तरीके से सागर जिले की महिला को गोद दिया गया है, जबकि यह अधिकारी नरसिंहपुर जिले की बाल कल्याण समिति को है।

यह है मामला
विजय रामदास साधू ने बताया कि वह बरमान में एक कुटिया बनाकर भगवना की पूजा पाठ करता है। उसकी कुटिया में एक महिला अपने पति व दो बच्चों के साथ रहती थी, कुछ साल पहले महिला की मौत हो गई और पति ने आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण अपने दोनों बच्चों को कुटिया में ही छोड़ दिया। इसी दौरान वहां पर देवरी निवासी एक महिला आई और बच्ची को कुछ दिन का बोलकर अपने साथ ले गई। इसके बाद आश्रम में उसका छोटा भाई अकेला बचा। कुछ समय के बाद जून 2018 को विजय रामदास साधू ने लड़के को नरसिंहपुर जिले के शिशु बालगृह के सुपुर्द किया और वहां पर सूचना दी कि इसकी एक बहन भी है जो देवरी की एक महिला के पास है, उसे आप लोग बुलवा लें। साधू का आरोप है कि देवरी निवासी महिला ने नियम विरुद्ध तरीके से बच्ची की दत्तक ग्रहण प्रक्रिया पूर्ण कराई है और अब वो बच्ची को वापस देना नहीं चाहती। साधू ने बताया कि पहले स्थानीय स्तर पर शिकायत की और जब मुझे ही उल्टा फसाने का प्रयास किया गया तो उसने हाइकोर्ट में याचिका दायर की।

कलेक्टर को दिए निर्देश
हाइकोर्ट जबलपुर ने बच्ची के मामले में सागर कलेक्टर को निर्देशित किया है। याचिका में लगाए गए आरोपों की जांच कर मामले की यथा स्थिति की जांच की जाए। यदि बच्चे को गलत तरीके से गोद दिया गया है तो उसकी भी जांच हो। इसके लिए दो माह का समय दिया गया है।

एक्सपर्ट व्यू
किशोर न्याय के पूर्व सदस्य ओंकार सिंह ने बताया कि जिस तरीके से नाबालिग को महिला को दिया गया है वह नियम विरुद्ध है। यह बच्चों की तस्करी की कैटेगिरी में आता है। नियमानुसार स्थानीय अधिकारियों व बाल कल्याण समिति को बच्ची को महिला से लेकर नरसिंहपुर जिले की बाल कल्याण समिति को सौंपना चाहिए था, यदि एेसा नहीं हुआ तो समिति के सदस्य भी दोषी हैं।

मदन गोपाल तिवारी
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