सेंट्रल जेल के कैदियों को एचआइवी एड्स, जेल प्रशासन अलर्ट

बीएमसी के एआरटी सेंटर भेजा था
सेंट्रल जेल में १५ हुई एचआईवी मरीजों की संख्या

By: manish Dubesy

Published: 18 Dec 2018, 02:02 PM IST

सागर. केंद्रीय जेल के दो बंदियों में एचआइवी की पुष्टि हुई है। दोनों को जेल प्रशासन ने बीएमसी के एआरटी सेंटर भेजा था। यहां दोनों की एचआइवी जांच की गई। रिपोर्ट में दोनों को एचआइवी पॉजीटिव निकाला है। जानकारी के अनुसार इन दोनों बंदियों को मिलाकर अब सेंट्रल जेल में १५ से अधिक एचआइवी मरीज हो चुके हैं। सूत्रों की माने तो दोनों बंदी नए थे, जिन्हें जमानत भी मिल चुकी है। एआरटी सेंटर से मिली जानकारी के अनुसार दोनों को पहले से ही एचआइवी था। जिनकी आइसीटीसी जांच करने पर रिपोर्ट पॉजीटिव आई है।
जेल में किट से हुई थी आशंका
सेंट्रल जेल में एफआईसीटीसी (फैसलेटिड इंटीग्रेडिट काउंसलिंग टेस्टिंग सेंटर) की सुविधा है। यहां पर बंदियों की किट से एचआइवी की जांच होती है। दोनों बंदियों, जिनकी उम्र २१ से ३३ वर्ष के बीच बताई जा रही है। उनकी जेल में ही किट से जांच की गई थी। रिपोर्ट पॉजीटिव आई थी। बता दे कि किट से की गई जांच में यदि रिपोर्ट पॉजीटिव निकलती है तो उस बंदी को पुन: जांच के लिए बीएमसी भेजा जाता है। जहां जांच पॉजीटिव आने पर एचआइवी की पुष्टी मानी जाती है।
पहले से एचआइवी पीडि़त हैं सभी १५
केंद्रीय जेल में १३ बंदी एचआइवी से पीडि़त हैं। आशंका है कि इन बंदियों को यह संक्रमण जेल में ही मिला हो। हालांकि जेल प्रबंधन इस बार से इनकार कर रहा है। जेल प्रबंधन के अनुसार बंद बंदियों के पहले ही इसकी जांच करा ली जाती है। अभी तक जितने भी एचआइवी पीडि़त बंदी हैं।
वे बाहर से ही इस संक्रमण को लेकर आए थे।
कुछ दिन पहले जेल से दो बंदियों को पुलिस जांच के लिए एआरटी सेंटर लाई थी। जांच पॉजीटिव निकली थी। इनका रजिस्ट्रेशन
कर लिया गया है।
अनुपम बोहरे, वरिष्ठ परामर्शदाता

ठसाठस जेल में अस्पताल की जगह ओपीडी से चल रहा काम

क्षमता से दोगुना से ज्यादा बंदी-कैदियों का भार उठाने वाली जेल में लगातार जरूरत के बावजूद अस्पताल के इंतजाम नहीं किए गए हैं। फिलहाल केंद्रीय जेल की एक बैरक के गलियारे में केवल ओपीडी की व्यवस्था है। मरीजों की जरा सी भी तबीयत बिगड़ती है तो उन्हें उपचार के लिए बीएमसी में भर्ती कराना पड़ता है।
इसमें बंदियों को बार-बार जेल से बाहर लाना-ले जाना पड़ता है तो दूसरी ओर संख्या कम होने से प्रहरियों की व्यस्तता भी इससे बढ़ जाती है। पिछले एक साल में केंद्रीय जेल में मरीजों की संख्या और बीमारी से मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ा है इसके बाद भी केंद्रीय जेल में उपचार के इंतजाम काफी नहीं हैं। ह्दयाघात, शुगर, ब्लड प्रेशर जैसे रोगों के इलाज के लिए भी मरीजों को बीएमसी पर निर्भर रहना पड़ता है।
क्षमता से ओवरलोड
केंद्रीय जेल अंग्रेजों के समय के भवन में संचालित है। हांलाकि अंदर बैरकों की संख्या में वृद्धि हुई है लेकिन जेल के स्थानीय अधिकारियों की रुचि नहीं होने से यहां बंदी-कैदियों के उपचार की सुविधा में इजाफा नहीं हुआ है। केंद्रीय जेल में मरीजों की क्षमता करीब साढ़े आठ सौ बंदियों की है लेकिन यहां लॉकअप में १८०० से ज्यादा का आंकड़ा बना रहता है। कई बार तो बंदियों की संख्या इससे भी ऊपर चली जाती है।
बुखार-खांसी के इलाज के भी नहीं इंतजाम
जेल में दस बेड का अस्पताल तक नहीं है। यहां केवल एक डॉक्टर तैनात हैं जो बैरक के एक बरामदे में ओपीडी चलाकर मरीजों की जांच कर उन्हें रेफर कर अपनी जिम्मेदारी पूरी करते हैं। यहां न तो पर्याप्त जीवन रक्षक दवाएं है और न ही सामान्य बीमारियों के उपचार की ही पूरी व्यवस्था है। इसी वजह से बार-बार मरीजों को इलाज के लिए बीएमसी भेजा जाता है।

manish Dubesy Desk
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