सागर. सुरखी थाने के तहत तैनात पुलिसकर्मियों व उनके परिजनों को रहने के लिए वर्ष २००३-०४ में लाखों रुपए खर्च करके आवास बनाए गए थे। लेकिन स्थानीय पुलिस प्रशासन की उदासीनता के कारण इन आवास का उपयोग ही नहीं हो सका। लिहाजा ये जर्जर हो चुके हैं। स्थिति है कि कतिपय लोग टाइल्स, खिड़की, दरवाजे तक उखाड़कर ले गए हैं।
जानकारी के अनुसार पुलिस प्रशासन द्वारा आवास बनाते समय सही जगह को चिन्हित नहीं किया गया। यह आवास नगर से लगभग २ किलोमीटर दूर हैं। आसपास कोई बस्ती अथवा रहवासी क्षेत्र भी नहीं हैं। इसी कारण कोई पुलिसकर्मी यहां रहने को तैयार नहीं हो रहा है। ज्यादातर पुलिसकर्मी किराए के मकान में ही रह रहे हैं। सवाल यह है कि पुलिस प्रशासन द्वारा ऐसे स्थान पर आवास क्यों बनाए गए? जहां १६ साल बाद भी वीरानी छाई है।

एक करोड़ से बन रहा थाने का भवन
सागर. सानौधा थाने का भवन लगभग एक करोड़ रुपए से बनेगा। हाल ही में इसका काम भी शुरू किया गया है। थाना क्षेत्र में लगभग 44 गांव आते हैं। बताया जा रहा है कि एक साल में नया भवन बनकर तैयार हो जाएगा। वर्तमान में जिस भवन में थाना संचालित हो रहा है वह जर्जर हो चुका है। इस भवन में अंग्रेजों के शासनकाल में डाक बंगला खुला था। वर्ष 1935 में इसे थाने का रूप दिया गया था।
- १५६ साल पुराना शिलालेख मिला
भवन बनाए जाने के दौरान की गई खुदाई में एक शिलालेख मिला है, जिसमें वर्ष 1864 व गोपाल स्वामी का धर्मशाला लिखा है।

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