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ह्यूमन ट्रैफिकिंग: बुंदेलखण्ड में शादी- नौकरी की आड़ में फल रहा धंधा

- शादी के बहाने बेची जा रही किशोरियां, नौकरी के नाम पर मानव तस्करी
- महिला- पुरुष के बीच लिंगानुपात की खाई भी बनी बड़ी वजह

सागर

Updated: August 04, 2022 12:15:25 am

सागर. बुंदेलखण्ड अब भी मानव तस्करी के जाल में फंसा हुआ है। बुंदेलखण्ड अंचल के छह जिलों में विवाह के नाम पर लड़कियां की खरीद- फरोख्त खूब हो रही है। पुलिस रिकॉर्ड में इसे गुमशुदगी और अपहरण के रूप में दर्ज कर आंकड़ों में हेरफेर कर दी जाती है। पिछले एक दशक में सागर जिले से 3589 किशोर- किशोरियां लापता हुए हैं इनमें से 170 का आज तक पता नहीं लगा है। पिछले पांच साल में अंचल में ह्युमन ट्रैफिकिंग के 25 से ज्यादा केस दर्ज किए गए हैं, हालांकि शिकायतों की संख्या इस आंकड़े से तीन गुना से भी अधिक हैं।
ह्युमन ट्रैफिकिंग: बुंदेलखण्ड में शादी- नौकरी की आड़ में फल रहा धंधा
लापता दो किशोरियों को पुलिस ने किया बरामद
कई बार बेचकर कराई शादी
अक्टूबर 2021 में उड़ीसा के संभलपुर की रहने वाली लड़की की हत्या खुरई के खजरा हरचंद गांव में कर दी गई थी। लड़की को करीब डेढ़ माह पहले गांव का राजबिहारी शादी करके लाया था। इसके बदले में राजबिहारी ने एक दलाल को रुपए भी दिए थे। राजबिहारी के साथ कुछ दिन रहने के बाद लड़की को उसके देवर मनोज ने अपने साथ रख लिया और 14 अक्टूबर को उसकी हत्या कर दी गई। इस वारदात के करीब दो माह पहले इसी युवती ने बण्डा थाने में दलपतपुर क्षेत्र के एक गांव में बेचकर शादी कराने की शिकायत किशोर इकाई में की थी जिसके बाद पुलिस ने उसे बरामद कर केस दर्ज किया था। इस लड़की को इससे पहले उत्तरप्रदेश के महरौनी और मालथौन क्षेत्र में भी बेचा गया था।
बड़े घर के नाम पर बेचा
जबलपुर निवासी 20 वर्षीय किशोरी ने 30 सितम्बर 2021 में छतरपुर के मातगुवां थाने में अपनी खरीद-फरोख्त की शिकायत दर्ज कराई थी। उसने बताया कि अच्छे घर में शादी कराने के नाम पर उसे मातगुवां भेजा गया था जहां संतोष पाल नाम के अशक्त व्यक्ति के साथ गांव पहुंचा दिया गया। जब मां की तबीयत बिगडऩे पर उसने जबलपुर जाना चाहा तब उसे बताया गया कि उसे 80 हजार रुपए में खरीदा गया है। इसके बाद वह किसी तरह छूटकर भागी और थाने पहुंची है। पुलिस ने इस मामले में एक एनजीओ की संचालक सहित मानव तस्करी में लिप्त गिरोह पर केस दर्ज किया था।
आत्महत्या के बाद सामने आई वारदात
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के कंसबेल गांव से लापता किशोरी की तलाश के दौरान सात माह पूर्व छत्तीसगढ़ पुलिस छतरपुर के गढ़ीमलहरा पहुंची थी। जशपुर में रहने वाले दंपती उसे नौकरी का झांसा देकर लापता हो गए थे। छग पुलिस ने उन्हें पकड़कर पूछताछ की गई तो आदिवासी किशोरी को बेचने का पता चला। लड़की को पहले 20 हजार रुपए में बेचा गया था। इससे पहले भी उसे पांच बार बेचा गया । आखिर में उसे 70 हजार रुपए लेकर ललितपुर जिले में शादी के नाम पर अशक्त युवक को बेचा गया था जहां दो महीने बाद ही उसने आत्महत्या कर ली थी।
गरीब परिवार टारगेट
सागर संभाग के जिलों में विवाह के लिए लड़कियों की कमी की वजह से दलाल आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को झांसा देते हैं और उन्हें कुछ रुपए देकर लड़कियों को दूसरी जगह बेच देते हैं। लड़कियों की यह खरीद- फरोख्त विवाह कराने के नाम पर की जाती है। कुछ मामले उजागर होने पर पुलिस बाल विवाह रोकने की कार्रवाई कर बैठ जाती है। उड़ीसा, छत्तीसगढ़ से खरीदकर लाई गई आदिवासी लड़कियों को भी बड़ी संख्या में यहां बेचा गया है।
लिंगानुपात बड़ी वजह
बुंदेलखंड में आर्थिक असमानता और शिक्षा की कमी के अलावा लिंगानुपात का अंतर विवाह के नाम पर लड़कियों की तस्करी को बढ़ावा दे रहा है। सागर सहित छतरपुर, टीकमगढ़, दमोह जिलों में लड़की न मिलने के कारण बड़ी संख्या में सही उम्र में विवाह न होने पर आदिवासी अंचलों से लड़कियों की खरीद की जाती है। इनमें से कुछ लड़कियों को तो बार- बार अलग- अलग जगह बेचकर विवाह कराया जाता है। अंचल में लिंगानुपात की स्थिति प्रति हजार पुरुषों पर 906 महिलाएं हैं। कन्या भ्रूण का गर्भपात कराने की वजह से गहराए इस अंतर को रोकने लगातार अभियान चले, लेकिन अब यह अंतर मानव तस्करी की वजह बन गया है।
फैक्ट फाइल
-पांच साल में मानव तस्करी के 25 से ज्यादा केस आए सामने
-हर साल 300 से ज्यादा किशोर- किशोरी होते हैं लापता
-पुलिस 75 से 80 फीसदी गुमशुदा ही कर पाती है बरामद
-गायब 25 फीसदी बच्चों का पता ही नहीं चलता
-एक दशक में अकेले सागर जिले से 170 से ज्यादा बच्चे अब तक हैं गायब
-मानव तस्करी के पीछे बाल विवाह सबसे बड़ी वजह
पुलिस लगातार कर रही कार्रवाई
अनुराग, आइजी, पुलिस जोन सागर कहते हैं कि संभाग में मानव तस्करी के मामलों में कमी आई है। विवाह के नाम पर रुपए लेकर लड़कियां बेचने के मामलों में पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। पिछले दिनों छतरपुर जिले से ऐसा मामला संज्ञान में आया था। यदि किसी मामले में जांच में मानव तस्करी पाई जाती है तो उनमें कार्रवाई की जाती है। अधिकांश मामलों में किशोरियों के अपनी इच्छा से भागने की बात सामने आती है।

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