अवैध वेंडरों पर लगेगी लगाम, क्यूआर कोड के साथ जारी होंगे परिचय पत्र

कोरोना संक्रमण को हर स्थिति में रोकने के लिए रेलवे ने सुरक्षा की दृष्टि से लिया निर्णय

By: anuj hazari

Published: 17 Jun 2020, 09:00 AM IST

बीना. आनलॉक में अब धीरे-धीरे देश भर में बाजार से लेकर धार्मिक स्थल व अन्य कार्यालय खुल रहे हैं। देश भर में ट्रेन भी शुरू हो गई हैं और इसके बाद रेलवे स्टेशनों में खाने-पीने की स्टॉल भी खोल दी गई हैं। स्टॉल संचालक व वेंडर द्वारा अब यात्रियों को सील पैक खाद्य सामग्री की सप्लाई भी शुरू कर दी गई है। इसी व्यवस्था को देखते हुए अब भोपाल रेल मंडल में क्यूआर कोड (क्विक रिस्पांस कोड ) योजना शुरू करने जा रहा है, जिससे लाइसेंसधारी वेंडर ही रेलवे स्टेशन और ट्रेनों में सामग्री बेचने का काम करेंगे। अब उनके परिचय पत्र क्यूआर कोड के साथ बनाए जाएंगे। दरअसल स्टेशन पर कोई कोरोना संक्रमित व्यक्ति अवैध वेंडर के रूप में सामग्री न बेचने लगे इसलिए यह व्यवस्था की जा रही है। इसकी जानकारी कोई भी व्यक्ति कोड को स्कैन करके पता कर सकेगा।
क्या होगा फायदा
क्यूआर कोड वाले परिचय पत्र हर वेंडर को गले में टांगना अनिवार्य होगा। इसमें उस व्यक्ति की पूरी जानकारी रहेगी। अगर किसी भी यात्री या रेल अधिकारी को वेंडर पर शक होगा तो उस परिचय पत्र को मोबाइल से स्केन करने पर उसकी पूरी जानकारी संबंधित व्यक्ति को मिल जाएगी। ऐसे परिचय पत्र की कॉपी करना भी मुमकिन नहीं होगा। वेंडर का नाम, पता, ठेकेदार का नाम, कार्ड की वैधता, कार्यस्थल, मोबाइल नंबर सभी जानकारी यात्री को स्कैन करते ही उसके मोबाइल में मिल सकेगी।
क्या होता है क्यूआर कोड
क्यूआर कोड का मतलब होता है क्विक रिस्पांस कोड यानी त्वरित जानकारी उपलब्ध कराने वाली संकेतावली। यह एक प्रकार का ट्रेडमार्क है यह पुराने बार कोड का नया वर्जन है। इसे संबंधित क्यूआर कोड रीडर या स्मार्ट फोन के जरिए पढ़ा जाता है। क्यूआर कोड के जरिए ईमेल, बेवसाइट, फोन नंबर और अन्य जानकारी सीधे लिंक की जाती है। जिसे स्कैन करते ही सीधे जानकारी पढ़ी जा सकती है।
योजना पर चल रहा है काम
इस योजना पर काम शुरू किया जाना है। लॉकडाउन के कारण इस पर काम नहीं हो सका था अब जल्द ही योजना को शुरू किया जाएगा।
आइए सिद्दीकी, पीआरओ, भोपाल

anuj hazari
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