इओडब्लू की टीम जिलों में जाकर करेंगी बुंदेलखंड पैकेज के फर्जीवाड़े की जांच

करोड़ों के गोलमाल की जांच, अधिकारियों की भूमिका खंगालने इओडब्लू ने तैयार किया ब्लूप्रिंट

By: संजय शर्मा

Published: 18 Feb 2020, 08:00 AM IST

सागर. बुंदेलखंड पैकेज के तहत केंद्र से जारी 3800 करोड़ रुपए की विभिन्न कामों के नाम पर हुई बंदरबाट की परतों को उधेडऩे का काम आर्थिक अपराध विंग (इओडब्लू) ने शुरू कर दिया है। करोड़ों के गोलमाल की जांच के लिए पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, दमोह और सागर जिलों में आर्थिक अपराध विंग द्वारा टीम गठित करने की तैयार कर ली गई है। विभागों से पैकेज के तहत जिलों में कराए गए कामों की सूची भी विभागों से मांगी गई है। स्टापडेम, पुल- पुलिया व अन्य निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन का खाका भी तैयार किया गया है। करोड़ों डकारने वाले अधिकारी-कर्मचारी व निर्माण एजेंसियों में इस तैयारी ने घबराहट बढ़ा दी है।

बुंदेलखंड पैकेज के तहत पिछले वर्षों में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, ग्रामीण विकास विभाग, वन विभाग और सिंचाई विभाग द्वारा कराए गए फर्जीवाड़े व करोड़ों रुपए की हिस्सा बांट में विभाग के अधिकारी, निर्माण एजेंसी व कुछ नेताओं के विरुद्ध अपराध दर्ज होना तय माना जा रहा है। मप्र के हिस्से वाले बुंदेलखंड के 5 जिलों में विकास योजनाओं के लिए तत्कालीन केंद्र सरकार द्वारा 3800 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया था। लेकिन राशि आते ही विभाग और निर्माण एजेंसियों की मिलीभगत से ऐसी बंटरबाट मची की करोड़ों रुपए फाइलों में समाकर रह गए।

जहां पर पुल-पुलिया, बैराज, स्टॉपडेम बनाना बताया गया वहां ईट- गिट्टी रेत तक नहीं पहुंची। मॉनिटरिंग का अभाव और विभाग के ओहदेदार अधिकारी, नेता व निर्माण एजेंसी की मिलीभगत से विकास के नाम पर आई राशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। मौके पर काम कराए बिना लाखों- करोड़ों रुपए डकार लिए जाने की शिकायतें की गई लेकिन न अधिकारियों ने सुनी न प्रदेश सरकार ने इस पर ध्यान दिया। इस बीच मामला हाइकोर्ट भी पहुंचा था लेकिन जांच भी फाइलों पर उलझकर रह गई।

-जिलों में जांच करेगी इओडब्लू टीम-

इओडब्लू एसपी धनंजय शाह के अनुसार छतरपुर जिले में बुंदेलखंड पैकेज के तहत कराए गए निर्माण कार्यों में गड़बड़ी की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। करोड़ों रुपए के दुरुपयोग और आर्थिक अनियमितता की आशंका को देखते हुए विभागवार निर्माण कार्यों का ब्यौरा जुटाकर उसका भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। छतरपुर के अलावा पैकेज के तहत पन्ना, टीकमगढ़, छतरपुर, दमोह और सागर जिलों में भी काम कराए गए हैं। इन सभी जिलों में जांच के लिए जल्द ही टीम गठित कर पड़ताल शुरू की जाएगी। उन्होंने बताया कि टीम दस्तावेजों के साथ-साथ निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन करेंगी जिससे कि हर गड़बड़ी सामने आ जाए। हांलाकि इसमें कुछ माह का समय भी लग सकता है।

आरइएस-वन विभाग के कामों पर ज्यादा फोकस -

छतरपुर जिले में बुंदेलखंड पैकेज के तहत आई करोड़ों रुपए की राशि में पलीता वन विभाग व आरईएस (ग्रामीण यांत्रिकी सेवा) के अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर लगाने की बात सामने आई है। इसको आधार मानते हुए मप्र के हिस्से के बुंदेलखंड के दमोह, टीकमगढ़, पन्ना, सागर जिलों में भी इन दोनों विभाग द्वारा कराए गए काम इओडब्लू की जांच टीम के केंद्र में होंगे। ग्रामीण विकास विभाग, जल संसाधन विभाग के तालाबों में भी लाखों-करोड़ों रुपए का फर्जीवाड़ा जांच में सामने आने का अनुमान है।

अधिकारियों की भूमिका की भी होगी जांच -

बुंदेलखंड के विकास के नाम पर केंद्र द्वारा जारी करोड़ों रुपए को फर्जी निर्माण कार्यों के नाम पर हड़पने वाले विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका भी इओडब्लू की जांच के घेरे में है। ईओडब्ल्यू ने 2015-16 में बुंदेलखंड पैकेज के रुपए की बंटरबाट को लेकर मुख्य तकनीकी परीक्षक की रिपोर्ट को भी जांच में शामिल किया है। इस रिपोर्ट में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी और वन विभाग के कामों में बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया था। रिपोर्ट और तथ्यों के आधार पर विभिन्न विभागों के 100 से ज्यादा अधिकारी, इंजीनियर पैकेज में करोड़ों के हेरफेर के आरोपों के दायरे में हैं।

संजय शर्मा
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