सागर. रवींद्र भवन सभागार में 63 प्रशिक्षु कत्थक नृत्य कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति देकर 15 दिवसीय विशेष कार्यशाला का समापन किया। कलाकारों के प्रस्तुति पर पूरा सभागार तालियों की गडग़ड़ाहट से गूंज रहा था। 15 दिवसीय कत्थक कार्यशाला में कथक नृत्यांगना गुरु शांभवी शुक्ला मिश्रा ने प्रशिक्षुओं को कत्थक के बारिकियों की जानकारी दी। कार्यशाला का समापन शुक्रवार को रंगारंग कार्यक्रम के साथ हुआ।
15 दिवसीय कार्यशाला का आयोजन भारत सरकार संस्कृति विभाग की संगीत नाटक अकादमी के उपक्रम कथक केंद्र नई दिल्ली एवं श्रुति मुद्रा सांस्कृतिक समिति सागर के संयुक्त तत्वावधान किया गया। कथक केंद्र के निदेशक बीबी चुग की अभिनव पहल पर स्थानीय सांस्कृतिक संस्था श्रुतिमुद्रा के सहयोग से यह आयोजन संभव हुआ। कथक केंद्र सहालकार समिति के अध्यक्ष वरिष्ठ कथक नृत्यांगना कमलिनी अस्थना के मुख्यअतिथि के तौर पर पधारने पर दर्शक अभिभूत रहे। डॉ. शाम्भवी शुक्ला के निर्देशन पर 63 प्रशिक्षुओं ने कथक के मूलभूत सिद्धांत को जाना और मंच पर अपनी प्रस्तुति भी दी। डॉ. शाम्भवी की बचपन से ही कथक में रूची रही है। उन्होंने बनारस घराने के गुरु पं. प्रेमनारायण से तालीम लेने के बाद दिल्ली कथक केंद्र के गुरु तथा जयपुर घराने के नर्तक पं. राजेन्द्र गंगानी से सन् 1999 से तालीम लेना शुरू किया था। अभी डॉ. शाम्भवी में दिल्ली में कथक सिखाती हैं।

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