पूर्णिमा पर दोपहर तक ही कर सकेंगे गुरु की पूजा, खग्रास चंद्रग्रहण के कारण बनी स्थिति

manish Dubesy

Publish: Jul, 13 2018 04:40:21 PM (IST)

Sagar, Madhya Pradesh, India
पूर्णिमा पर दोपहर तक ही कर सकेंगे गुरु की पूजा, खग्रास चंद्रग्रहण के कारण बनी स्थिति

दोपहर 2 बजकर 54 मिनट से लगेगा चंद्र ग्रहण, बंद हो जाएंगे मंदिरों के कपाट

सागर. आगामी २७ जुलाई को पडऩे वाली गुरु पूर्णिमा पर शिष्य अपने गुरुओं की दोपहर तक ही पूजा कर सकेंगे। यह सब खग्रास चंद्रग्रहण पडऩे के कारण होगा। ग्रहण का सूतक काल दोपहर 2 बजकर 54 मिनट से शुरू हो जाएगा। इस दौरान मंदिरों के पट बंद हो जाएंगे। गुरु भी ध्यान, जप, तप, साधना आदि में लीन हो जाएंगे।
गुरु पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण की स्थिति कई सालों बाद बन रही है। ग्रहण उत्तरा आषाढ़ और श्रवण नक्षत्र और मकर राशि में होगा। यह साल का दूसरा खग्रास चंद्रग्रहण होगा, जो पूरे देश में दिखाई देगा। इसके पहले 31 जनवरी को चंद्रग्रहण पड़ा था।

3 घंटा 55 मिनट का होगा ग्रहण
चंद्रग्रहण शुरू होने के तीन प्रहर यानि 9 घंटे पहले ग्रहण का सूतक काल शुरू हो जाता जो ग्रहण समाप्ति के बाद तक रहेगा। ग्रहण की अवधि 3 घंटा 55 मिनट होगी। ज्योतिषियों का कहना है कि इस सदी में यह सबसे लंबी अवधि वाला चंद्रग्रहण होगा, जो अनुसंधान का विषय भी बनेगा।
27 जुलाई ही श्रेष्ठ
पं. शिवनारायण गोस्वामी ने बताया कि गुरु पूर्णिमा का पर्व 27 जुलाई को ही मनाना श्रेयकर रहेगा। क्योंकि ग्रहण का सूतक दोपहर 2 बजकर 54 मिनट से शुरू होगा, इसलिए सूर्योदय से लेकर दोपहर बाद तक यह पर्व मना सकते हैं। वैसे भी एक दिन पहले चतुर्दशी तिथि रहेगी, इसलिए 27 जुलाई को ही यह पर्व मनाना चाहिए।
18 साल बाद संयोग
गुरु पूर्णिमा के दिन चंद्रग्रहण की स्थिति 18 साल बाद बनी है। ज्योतिषाचार्य पं.रामचरण शास्त्री ने बताया कि इसके पहले गुरु पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण की स्थिति 16 जुलाई 2000 में बनी थी। इसके बाद इस साल इस तरह की स्थिति बन रही है। ग्रहण के दौरान प्रतिमा स्पर्श, पूजा पाठ के साथ भोजन और शयन करना वर्जित माना गया है।
मंदिरों में दोपहर तक आयोजन
शहर के मंदिरों में गुरु पूर्णिमा के आयोजन दोपहर तक होंगे। इसके बाद पट बंद हो जाएंगे। सुबह से दोपहर तक गुरु पूजा की जाएगी। इसमें भक्तगण और सभी शिष्य गुरु पूजा कर सकते हैं। इसके बाद सूतक काल में मंदिरों के पट बंद हो जाएंगे और तप, साधना, मंत्र जाप, माला जाप आदि किया जा सकेगा।

१६ को कर्क राशि में होगा सूर्य का प्रवेश, नवमी पर नहीं बजेगी शहनाई
सूर्य के कर्क राशि में जाने से इस साल २१ जुलाई को भौंड़रिया नवमी पर शहनाई नहीं बजेगी। पंडित शिवप्रसाद तिवारी ने बताया कि हर साल नवमी पर शादियों के लिए अबूझ मुहूर्त होता था, लेकिन इस साल 16 जुलाई को सूर्य राशि परिवर्तन कर कर्क राशि में प्रवेश कर जाएंगे और कर्क के सूर्य में विवाह वर्जित है। हालांकि कुछ पंचांगों में 15 और 16 जुलाई को विवाह मुहूर्त हैं। अब दिसंबर में ही शहनाई बजेगी।
अलग-अलग पंचांग में तिथियां- पंडित रामचरण शास्त्री ने बताया कि रिश्ता यदि विवाह के मुहूर्त पर लग्न पत्रिका के मिलान के बाद हो तो रिश्ते में कभी विघ्न नहीं आते हैं। इस बार अलग-अलग पंचांग विवाह की तिथियों को लेकर लोगों को भ्रम में डाल रहे हैं, जबकि 11 जुलाई के बाद विवाह का कोई मुहूर्त ही नहीं बन रहा है। भौंड़रिया नवमी पर भी इस बार मुहूर्त नहीं हैं। जुलाई के बाद सीधे दिसंबर में विवाह होंगे। कुछ कैलेंडर दिसंबर में अलग-अलग तारीख में विवाह मुहूर्त बता रहे है। नवंबर और दिसंबर में सिर्फ १५ दिसंबर को एक ही भांवर है।
नवमी को मानते हैं अबूझ - शास्त्रों के अनुसार भौंड़रिया नवमी पर विवाह के लिए अक्षय तृतीया के समान ही अबूझ मुहूर्त होता है। लेकिन इस बार स्थिति विपरीत है। इसके बाद चातुर्मास के चार माह विवाह और अन्य शुभ कार्य नहीं किए जाते है। देवउठनी ग्यारस पर देवताओं के जागने पर चातुर्मास समाप्त होगा।

 

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