लॉक डाउन के दौरान मात्र २७० मरीज पंहुचे इलाज कराने, ओपीडी में नजर आई दोनों स्वास्थ्य संस्थाओं बीच तालमेल की कमी

-जिला अस्पताल और बीएमसी के विशेषज्ञ डॉक्टर रहे नदारत।

 

सागर. बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज को शासन में रीजनल कोरोना पेशेंट ट्रीटमेंट सेंटर बना दिया है। यहां पर अब सिर्फ कोरोना पॉजिटिव मरीज ही भर्ती होंगे और इनका इलाज होगा। बीएमसी में तैनात डॉक्टरों को जिला अस्पताल मैं मर्ज कर दिया गया है। गुरुवार को पहले दिन डॉक्टरों की मनमानी सामने आई है। ओपीडी में दोनों स्वास्थ्य संस्थाओं के मेडिकल ऑफिसर ही मरीजों का इलाज करते देखे गए। विशेषज्ञ ओपीडी में नहीं बैठे थे। दोनों संस्थाओ के डॉक्टरों के बीच आपसी समन्वय ना होने का यह कोई पहला मामला नहीं है। २ साल पहले मर्जर के वक्त भी यही स्थिति देखने मिली थी।
इससे मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ी थी। बहरहाल कोरोना वैश्विक महामारी के रूप में सामने आया है और ऐसी स्थिति में डॉक्टरों को आपसी तालमेल बनाकर मरीजों की सेवा करनी चाहिए। जिला प्रशासन को चाहिए कि दोनों संस्थाओं के संचालन का जिम्मा सिर्फ एक अधिकारी को दें। ताकि इस गंभीर स्थिति में मरीजों को इलाज के लिए सफर ना करना पड़े।

-मरीजों की संख्या की ९० फीसदी हुई कम

कोरोना की दहशत इस तरह बन चुकी है कि लोग घरों से बाहर निकलने से डर रहे हैं। इसका अंदाजा जिला अस्पताल में आज हुए मरीजों की पंजीयन से लगाया जा सकता है।जिला अस्पताल में दिन भर में महज २७० मरीज इलाज कराने के लिए पहुंचे। इनमें ४० फ़ीसदी महिलाएं थी और यह महिलाएं डिलीवरी से संबंधित थी। हालांकि अंचलों से मरीजों के सागर आना बंद हो गया है। बसे ना चलने के कारण मरीज गांव में झोलाछापों से इलाज कराने मजबूर हैं।

-सर्दी जुकाम के मरीजों के लिए नहीं अलग ओपीडी

जिला अस्पताल में सर्दी जुखाम और तेज बुखार के मरीजों के लिए अलग से ओपीडी नहीं बनाई गई है। पर्ची काउंटर के बाजू में शुरू की गई ओपीडी में मौजूद डॉक्टर सभी प्रकार की मर्ज वाले मरीजों का इलाज कर रहे हैं। सर्दी जुकाम से पीड़ित मरीजों के छींकने और खांसने से अन्य कतार में खड़े मरीजों में संक्रमण फैलने की आशंका बनी हुई है। हालांकि मेडिकल कॉलेज में अलग से ओपीडी शुरू की गई थी, लेकिन अब वहां पर उपचार सुविधाएं बंद होने से जिला अस्पताल में इलाज किया जा रहा है। प्रबंधन को चाहिए कि सर्दी जुखाम के मरीजों के लिए अलग से ओपीडी शुरू की जाए।

 

जिला अस्पताल में सभी डॉक्टरों को मरीजों का इलाज करना है। यदि डॉक्टर नही बैठ रहे हैं, तो गंभीर बात है। मैं सिविल सर्जन और अधीक्षक से बात करता हूँ।

डॉ जीएस पटेल, डीन बीएमसी

आकाश तिवारी Desk
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