नन्ही जान पर भारी वेंटीलेटर की कमी, जन्म के बाद 5 फीसदी मौत

नन्ही जान पर भारी वेंटीलेटर की कमी, जन्म के बाद 5 फीसदी मौत

Sanket Shrivastava | Publish: Jun, 14 2018 03:46:50 PM (IST) Sagar, Madhya Pradesh, India

जिला अस्पताल की एसएनसीयू यूनिट में वेंटीलेटर की कमी नवजात शिशुओं पर भारी पड़ रही है।

सागर. जिला अस्पताल की एसएनसीयू यूनिट में वेंटीलेटर की कमी नवजात शिशुओं पर भारी पड़ रही है। हांलाकि अस्पताल प्रबंधन डबल सीटर एक मशीन को वेंटीलेटर की तरह इस्तेमाल कर रहा है, लेकिन यह उतनी कारगर नहीं है। जिम्मेदारों का कहना है कि वेंटीलेटर के लिए शासन स्तर पर पत्र व्यवहार चल रहा है, लेकिन इस दिशा में कार्रवाई आगे नहीं बढ़ रही है। दरअसल, जन्म के बाद शिशुओं के फेफड़ों में संक्रमण या दिल की धड़कन तेज चलने जैसी शिकायतें होती हैं और ऐसे में उन्हें वेंटीलेटर की सख्त जरूरत होती है। हमारे यहां जिला अस्पताल में हर दिन गंभीर रूप से बीमार शिशु जन्म ले रहे हैं, लेकिन यहां वेंटीलेटर की कमी से परिजन बच्चों को निजी अस्पतालों में ले जाने को मजबूर हैं। जानकारी के मुताबिक प्रसव उपरांत जन्मे गंभीर शिशुओं में से ५ फीसदी की वेंटीलेटर की कमी से ही मौत हो रही है।
एक मात्र पीडियाट्रिशियन
डी-मर्जर भले ही हो चुका है, लेकिन गायनी और पीडिया विभाग अभी जिला अस्पताल में संचालित है। एसएनसीयू में मात्र एक पीडियाट्रिशियन है, वह भी संविदा पर पदस्थ है। इसके अलावा दो डॉक्टर और तैनात किए गए हैं, लेकिन वह सिर्फ एमबीबीएस वाले हैं। देखा जाए तो यह एक सेपरेट विंग हैं, जहां २४ घंटे विशेषज्ञों की तैनाती जरूरी है। एेसे में कम से कम चार विशेषज्ञों का होना जरूरी है।
यूनीसेफ का है प्रोजेक्ट
एसएनसीयू की शुरूआत यूनीसेफ और डब्ल्यूएचओ ने प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में की थी। यहां पूरा स्टाफ इन्हीं का है। वेतन भी इनके द्वारा डॉक्टरों व अन्य स्टाफ को दी जाती है। हालांकि कुछ साल पहले जब एसएनसीयू चलने लगा तो प्रदेश सरकार को इसका जिम्मा सौंपा गया है। जहां डॉक्टरों की कमी से लेकर वेंटीलेटर तक की व्यवस्था अस्पताल प्रबंधन को करनी है।
5 लाख खर्च में बच सकती है जान
एसएनसीयू में वेंटीलेटर के लिए प्रबंधन को सिर्फ ५ से ६ लाख रुपए खर्च करना है। मामूली राशि के खर्च से प्रबंधन वेंटीलेटर की कमी को पूरा कर गंभीर शिशुओं की जान को बचा सकता है। लेकिन कई सालों से देखा जा रह है कि प्रबंधन इसके लिए सिर्फ कागजी घोड़े ही दौड़ा रहा है।
इन शिशुओं की जान को खतरा
-कम वजन वाले शिशु
-गर्भ में ऑक्सीजन की कमी के कारण जन्में शिशु
-प्रसव के बाद न रोने वाले शिशु
-सांस की तकलीफ वाले शिशु
यह हैं एसएनसीयू में उपलब्ध
फोटोथैरेपी
रेडियन बार्मर
पल्स ऑक्सीमीटर,
इंक्यूवेटर
- एसएनसीयू में जरूरत के हिसाब से सभी उपकरण हैं। हालांकि वेंटीलेटर नहीं है, जिसकी डिमांड की जा चुकी है। डॉक्टर्स कम हैं। शासन स्तर से इनकी भी मांग की गई है।
डॉ. इंद्राज सिंह, सीएमएचओ
- हमारे पास वेंटीलेटर है। प्रबंधन चाहे तो हम इसे उपलब्ध करा सकते हैं। इसके लिए स्टाफ को ट्रेंड करना होगा। वेंटीलेटर काफी जरूरी है।
डॉ. जीएस पटेल, डीन बीएमसी

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