आज से शुरू हो रहा है माघ मास, स्नान-दान करने के लिए यह माह है उत्तम

माघ का महीना शुक्रवार से शुरू हो रहा है और 27 फरवरी को समाप्त हो जाएगा। स्नान, दान कर पुण्य अर्जित करने के लिए माघ का महीना बहुत ही उत्तम माना गया है।

By: Atul sharma

Published: 28 Jan 2021, 09:11 PM IST

सागर.माघ का महीना शुक्रवार से शुरू हो रहा है और 27 फरवरी को समाप्त हो जाएगा। स्नान, दान कर पुण्य अर्जित करने के लिए माघ का महीना बहुत ही उत्तम माना गया है। मोक्ष प्रदान करने वाला माघ स्नान, पौष पूर्णिमा से आरम्भ होकर माघ पूर्णिमा को समाप्त होता है। माघ मास की ऐसी ही महिमा है कि इसमें जहां कही भी जल हो वह गंगाजल के सामान ही होता है। फिर भी प्रयाग,कुरुक्षेत्र,हरिद्धार, काशी,नासिक, उज्जैन और अन्य पवित्र तीर्थों और नदियों में स्नान का बड़ा महत्व है।

माघ स्नान करने वाले मनुष्यों पर भगवान विष्णु प्रसन्न रहते है तथा उन्हें सुख-सौभाग्य,धन-संतान और मोक्ष प्रदान करते है।लोग तीर्थों में जाकर कल्पवास भी करते हैं। सागर और आसपास के लोग प्रयागराज में कल्पवास के लिये पहुंचते है और पूरे एक माह ईश्वर चिंतन आराधन में व्यतीत करते हैं। माघ मास भगवान शिव को भी समर्पित माना जाता है जो लोग तीर्थ स्थान पर नही पहुंच पाते वो इस माह में स्थानीय मंदिरों में शिव अभिषेक पूजन अर्चन करते हैं। शहर के भूतेश्वर,नागेश्वर,नीलकंठेश्वर, पशुपतिनाथ,गौरीशंकर आदि मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजन अर्चन करने जुटेंगे।

क्या होता है कल्पवास
पंडित शिवप्रसाद तिवारी के अनुसार प्रयाग में हर वर्ष लगने वाले इस मेले को कल्पवास भी कहा जाता है। वेद, मंत्र व यज्ञ आदि कर्म ही कल्प कहे जाते है। पुराणों में माघ मास के समय संगम के तट पर निवास को ही कल्पवास कहा जाता है। संयम,अहिंसा व श्रद्धा ही कल्पवास का मूल आधार होता है। यदि सकामभाव से माघ स्नान किया जाय तो उससे मनोवांछित फल की सिद्धि होती है और निष्काम भाव से स्नान आदि करने पर वह मोक्ष देने वाला होता है ऐसा शास्त्रों में कहा गया है।

मिलेगी नारायण की कृपा
पंडित मुकेश द्विवेदी ने बताया कि शास्त्रों में माघ माह के स्नान, दान, उपवास और माधव पूजा का महत्व बताते हुए कहा गया है कि इन दिनों में प्रयागराज में अनेक तीर्थों का समागम होता है इसलिए जो प्रयाग या गंगा आदि अन्य पवित्र नदियों में भी भक्तिभाव से स्नान करते है। वह तमाम पापों से मुक्त होकर स्वर्गलोक के अधिकारी हो जाते है। इस माह के महत्व पर तुलसीदास जी ने श्री रामचरित्र मानस के बालखण्ड में लिखा है-माघ मकर गति रवि जब होई ,तीरथपतिहिं आव सब कोई !!अर्थात माघ मास में जब सूर्य मकर राशि में आते हैं तब सब लोग तीर्थों के राजा प्रयाग के पावन संगम तट पर आते हैं। देवता, दैत्य ,किन्नर और मनुष्यों के समूह सब आदरपूर्वक त्रिवेणी में स्नान करते हैं।

माघ माह में मनेगी बसंत पंचमी

माघ माह के दौरान कृष्ण पक्ष में संकष्टचौथ (गणेश चतुर्थी व्रत ) षटतिला एकादशी,मौनी अमावस्या आती है। शुक्ल पक्ष में विनायक चतुर्थी,बसंत पंचमी,शीतला षष्ठी,रथ-अचला सप्तमी,जया एकादशी व्रत और माघी पूर्णिमा जैसे पर्व आते है।

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