मास्टर प्लान पर नहीं हुआ आज तक कोई काम, सिर्फ दिखावा साबित हो रही कार्ययोजना

बेतरतीव ढंग से विकसित हो रहा शहर- डेयरी, बस स्टैंड, आरा मशीनें समेत किसी भी पहलू पर नहीं हुआ काम- बीस साल के लिए बनाया गया है मास्टर प्लान-2031

सागर. शहर के लिए बनाया गया मास्टर प्लान-2031 खोखला साबित हो रहा है। मास्टर प्लान-2031 में किए गए प्रावधानों के मुताबिक एक भी काम जमीनी स्तर पर शुरू नहीं हो पाया है। शहर को व्यवस्थित रूप देने के लिए एक-एक विषय पर गंभीरता से अध्ययन कर प्लानिंग बनाई गई है लेकिन यह प्लानिंग 9वर्ष बाद भी जमीन पर नहीं उतर पाई है। सबसे हैरानी की बात यह है कि मास्टर प्लान फाइनल होने में ही जिम्मेदार अफसरों ने करीब 7 साल का समय लगा दिया।

एेसे समझें अव्यवस्था

माल गोदाम

वर्तमान स्थिति- रेलवे स्टेशन प्लेटफॉर्म नंबर-२ की ओर मा गोदाम है जहां पर भारी वाहनों की आवाजाही के कारण पूरा शहर अव्यवस्थित है। माल गोदाम के विस्थापन की लंबे समय से मांग उठ रही है लेकिन आज तक कोई प्रयास नहीं हुए।

प्लानिंग: तीसरी रेलवे लाइन व प्लेटफॉर्म बनाने के के लिए माल गोदाम को मास्टर प्लान के मुताबिक लिधोरा में स्थानांतरित करने की प्लानिंग बताई गई है।

यातायात व्यवस्था

वर्तमान स्थिति- कटरा मस्जिद चौराहा, गौर टॉवर, गौर मूर्ति, नमक मंडी तिराहा, मोतीनगर चौराहा, कृषि उपज मंडी चौराहा समेत 9 चौराहों पर मास्टर प्लान में सुधार की बात कही गई है। इन क्षेत्रों में हमेशा दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

प्लानिंग- मोतीनगर चौराहा को ही सिर्फ स्मार्ट सिटी योजना के तहत चुना गया है। शेष चौराहों-तिराहों के लिए कोई प्लानिंग नहीं की गई है।

सड़क
वर्तमान स्थिति- शहर की लगभग हर सड़क पर अतिक्रमण है। सड़क किनारे से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई निगम प्रशासन द्वारा कभी-कभी ही की जाती है।

प्लानिंग- मास्टर प्लान-2031 में शहर के 38 मार्गों के चौड़ीकरण करने की बात कही गई है। यातायात के दवाब को देखते हुए 1 से 6 मीटर तक अलग-अलग सड़कों को चौड़ा करने की जरुरत बताई गई है।

उद्योग

वर्तमान- बीच शहर में रिपेयरिंग वर्कशॉप, आरा मशीनें, दाल व तेल मिल जैसे उद्योग धंधे भगवानगंज, तिलकगंज, वल्लभनगर क्षेत्रों में संचालित हो रहे हैं जिसके कारण पूरा शहर अव्यवस्थित रहता है और रात में भारी वाहन शहर की घनी आबादी वाली बस्तियों में प्रवेश करते हैं।
प्लानिंग- रिपेयरिंग वर्कशॉप्स को राहतगढ़ बस स्टैंड के स्थान पर तो आरा मशीनें और दाल व तेज मिल जैसे उद्योग निवेश इकाई क्रमांक-1 में विस्थापित किए जाने की मास्टर प्लान में प्लानिंग है लेकिन इसमें भी कोई प्रयास नहीं किए गए हैं।

बस स्टैंड
वर्तमान- शासकीय और प्राइवेट बस स्टैंड शहर के बीचोंबीच संचालित हो रहे हैं। खास बात यह है कि शासकीय बस स्टैंड का उन्नयन भी इसी स्थान पर किया जा रहा है।
प्लानिंग- दोनों ही बस स्टैंड को निवेश इकाई क्रमांक-६ में विस्थापित करने की प्लानिंग है जो खोखली साबित हो रही है।

डेयरी
वर्तमान- सबसे ज्यादा डेयरी संचालन व पशुपालन गोपालगंज, परकोटा, कृष्णगंज, रविशंकर वार्ड, सिंधी कॉलोनी और तहसीली क्षेत्र में हो रहा है। मवेशियों के कारण शहर की यातायात व्यवस्था सबसे ज्यादा चौपट होती है।

प्लानिंग- डेयरी विस्थापन को लेकर बीते दो दशकों के प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन अब भी यह मामला सुलझ नहीं पाया है। निवेश इकाई क्रमांक-1 में इसको विस्थापित किया जाना है जिसके लिए रतौना में जमीन भी आवंटित हो चुकी है।

फैक्ट फाइल
- 7 निवेश इकाईयों में बांटा गया है सागर
- 20 सालों के लिए बनाया गया है मास्टर प्लान
- 6.50 लाख जनसंख्या वर्ष-2031 तक होने का अनुमान

अभिलाष तिवारी
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