संभाग में मातृ-शिशु मृत्यु दर पर नहीं लगा अंकुश: महिला चिकित्सकों की भी कमी

एसएनसीयू, जननी वाहन, डिलेवरी प्वाइंट जैसी सुविधाएं साबित हो रही नाकाफी

By: manish Dubesy

Updated: 18 Dec 2018, 03:08 PM IST

६ माह में पैदा हुए १३२६ नवजात नहीं देख पाए दुनिया, १०८ माताएं भी नहीं देख पाईं बच्चे को
सागर. मातृ-शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए शासन के प्रयास बौने साबित हो रहे हैं। एसएनसीयू, जननी वाहन, डिलेवरी प्वाइंट जैसी सुविधाओं के बाद भी शिशुओं और जननियों की मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है। संभाग में अप्रैल से सितम्बर महीने तक १३२६ शिशुओं ने जन्म तो लिया, लेकिन अपनी आंखें खोलने से पहले दुनिया से चले गए। वहीं, १०८ महिलाएं एेसी हैं, जिन्हें मां बनने का सौभाग्य तो मिला, लेकिन बच्चे पर अपना लाड़ लुटा नहीं पाईं और दम तोड़ दिया। हालांकि यह आंकड़े नाकाफी हैं। हकीकत यह है कि इनकी संख्या और अधिक है।
लेकिन यह आंकड़े शासन तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। निजी अस्पतालों में ३० फीसदी प्रसव होते हैं, जहां से ५ फीसदी जानकारी स्वास्थ्य विभाग तक पहुंच रही हैं। हैरानी इस बात की है कि जिम्मेदार एेसे नर्सिंग होम पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।
रिपोर्टिंग पर सवाल
संभावित मौतों को भी स्वास्थ्य विभाग मानकर चलता है। उसका प्रतिशत भी ट्रेंड के अनुसार अपनी रिपोर्ट पर फिक्स किया हुआ है। इस रिपोर्ट के अनुसार संभावित मृत्यूदर में बहुत ज्यादा अंतर है। जननियों की मौत की बात करें तो छतरपुर में ९५ मौतें संभावित थी, लेकिन दर्ज सिर्फ ११ हुई हैं। जानकारों का कहना है कि इतना अंतर नहीं होता है। सही ढंग से रिपोर्टिंग न होने से यह गेप आता है। यही स्थिति शिशु मृत्यूदर में भी देखी जा रही है।
रोजाना 2 शिशुओं की मौत
हेल्थ बुलेटिन से मिले आंकड़ों के अनुसार छतरपुर जिले में छह महीने में ३६१ शिशुओं की प्रसव के बाद मौत हुई है। यानी हर रोज २ नवजात दम तोड़ रहे हैं। दूसरे नंबर पर पन्ना है, जहां ३४९ नवजात शिशुओं की मौत हुई है। यानी हर रोज २ से ज्यादा शिशु दम तोड़ रहे हैं। सागर तीसरे स्थान पर है। यहां महीने ४२ नवजात शिशु दम तोड़ रहे हैं।
108 जननी ने तोड़ा दम
रिपोर्ट के अनुसार सागर संभाग में छह महीने में १०८ जननियों की मौत हुई है। पहले नंबर पर सागर जिला है, जहां प्रसव के बाद ४४ जननियों ने दम तोड़ा है। दूसरे नंबर पर टीकमगढ़ और पन्ना है, जहां २०-२० जननियों की मौ हुई हैं। तीसरे नंबर पर दमोह, जहां ११ और चौथे नंबर पर दमोह है, जहां १३ जनिनियों ने दम तोड़ा है।

manish Dubesy Desk
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