यहां सरकार ही लाचार, बैठक में हर बार घिसे-पिटे मुद्दों पर बहस, फिर भी नतीजा सिफर

बीते दो सालों से कुछ पार्षद हर बैठक में वही पुराने मामले उठा रहे हैं, लेकिन निगम की सुप्रीम बॉडी भी उन्हें सुलझाने में असफल साबित हो रही है।

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Published: 24 Jul 2018, 05:04 PM IST

सागर. लोकसभा-विधानसभा की तरह नगर सरकार की नगर निगम परिषद की बैठक होने का दम भरने वाले पार्षद सालों से सड़े-गले मामलों को घसीटते आ रहे हैं। बीते दो सालों से कुछ पार्षद हर बैठक में वही पुराने मामले उठा रहे हैं, लेकिन निगम की सुप्रीम बॉडी भी उन्हें सुलझाने में असफल साबित हो रही है। वहीं कुछ योजनाएं व प्रोजेक्ट एेसे हैं, जिनमें कार्य पूर्ण होने के बाद भी पार्षद उनके बारे में जानकारी मांग रहे हैं। सोमवार को आयोजित हुई परिषद की बैठक में महापौर अभय दरे से लेकर पार्षद तक अव्यवस्थाओं को लेकर लाचार नजर आए और अलग-अलग समय पर सभी ने यह बात भरी बैठक में स्वीकार की।
इन मामलों में निर्णय
गुजराती बाजार में 23 करोड़ की लागत से पं.दीनदयाल शॉपिंग कॉम्पलेक्स का निर्माण हो रहा है। इसकी डीपीआर भी तैयार हो गई है।
स्वच्छता सर्वेक्षण में उत्कृष्ट कार्य करने वाले स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों को 14 अगस्त को सम्मानित किया जाएगा।
आवासीय योजनाओं के बारे में बताया गया कि 11894 हितग्राहियों को लाभ दिया जा रहा है और इनके लिए 663 करोड़ की कुल डीपीआर बनाई गई है। 1142 हितग्राहियों की सूची के साथ केंद्र द्वारा 3337 हितग्राहियों की स्वीकृति मिल गई है।
निगम क्षेत्र में मनोरंजन तथा आमोद, प्रमोद पर कर आरोपित किए जाने के संबंध में 5 सदस्यीय समिति का गठन करने का निर्णय।
निगम में कार्यरत अधिकारियों व कर्मचारियों को 7वें वेतनमान एवं एरियर्स का लाभ दिए जाने के संबंध में स्वीकृति प्रदान की गई।
प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों के संबंध में निर्णय लिया गया कि महापौर समेत 5 सदस्यीय समिति का गठन किया जाएगा, जो कार्य की आवश्यकता को देखते हुए कर्मचारियों को नियुक्त करने की अनुशंसा करेगी।
...और ये मामले बताते हैं नगर निगम की हकीकत

मामला: एनयूएलएम शाखा को महापौर ने भारत-पाकिस्तान के बीच का केंद्र बताया तो नेता प्रतिपक्ष ने इसे अलग तेलंगाना राज्य की संज्ञा दी। महापौर ने खुलासा किया कि उनके पास इस शाखा की आज तक एक भी फाइल नहीं आई है और लाखों रुपए का संबंधितों को भुगतान भी किया जा चुका है।
ये क्या: एक साल पहले महापौर खुद इस शाखा का फर्जीवाड़ा पकड़ चुके थे। तब से लेकर आज तक कई बैठकें हुईं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। साढ़े तीन साल बाद इस शाखा का मामला तब एजेंडा में शामिल किया गया, जब एनयूएलएम शाखा के दोनों सिटी मिशन मैनेजर प्रदीप परिहार व सचिन मसीह एक्सटेंशन लेकर आ गए हैं। परिषद, एमआइसी, निगमायुक्त के सीआर जारी किए बिना ही दोनों भोपाल से 6-6 महीने का कार्यकाल बढ़वा लाए हैं।
मामला: बीएलसी में २४९ रुपए प्रतिग्राही की जगह प्रति किश्त के हिसाब से एजेंसी को भुगतान किया गया। यह मामला 6 महीने पहले नेता प्रतिपक्ष परिषद में उठा चुके थे, फिर भी जिम्मेदारों ने ध्यान नहीं दिया। वर्तमान में एजेंसी काम बंद करके भाग गई है। इसमें अधिकारियों की लापरवाही पकड़ी गई।
ये क्या: सबको मालूम था कि फर्जीवाड़ा हो रहा है, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। फर्जीवाड़े में शामिल अधिकारियों को पार्षदों ने ही बचा लिया। इस मामले में आईएएस अफसर निगमायुक्त अनुराग वर्मा ने भी अपनी मजबूरी बता दी।
मामला: नगर निगम में सिंगल टेंडर का खेल पिछले तीन सालों से चल रहा है। सोमवार को परिषद में यह मामला उठा और इसमें सत्ता पक्ष व अधिकारी निशाने पर भी आए, लेकिन फिर उस सिंगल टेंडर वाले आदेश की प्रतिलिपि न होने के कारण मामले पर बाद में चर्चा करने पर सहमती बनी।
ये क्या: नेता प्रतिपक्ष ने यह मामला गंभीरता से उठाया। सहायक यंत्री पूरनलाल अहिरवार की लापरवाही भी सामने आई। उनके पास आदेश भी नहीं मिला, फिर दर्जनों टेंडर सिंगल बिड पर कैसे खोलकर कतिपय लोगों को दे दिए गए।
मामला: निगम स्टेडियम को लेकर हर बैठक में हो-हंगामा होता है। फिर भी तीन सालों में एक इंच की जगह में काम शुरू नहीं हो पाया है।
ये क्या: टिंकल सैनी नाम के भाजपा नेता को टेंडर दिया गया लेकिन उसने काम नहीं किया। उसे ब्लैकलिस्टेड करने की कार्रवाई के बाद मामला बरसात के बाद तक के लिए टाल दिया गया। इससे ज्यादा शर्मनाक बात और क्या होगी कि कई पार्षद अपनी पार्षद निधि तक दे चुके, फिर भी अफसर निर्माण कार्य नहीं करा पा रहे हैं।
मामला: शासन से प्लेसमेंट पर कर्मचारी न रखने के निर्देश हैं। बीते महीनों में परिषद खुद ही यह निर्णय ले चुकी है लेकिन निगम में वर्तमान में 47 कर्मचारी प्लेसमेंट पर चल रहे हैं और अब हर वार्ड में प्लेसमेंट पर कर्मचारी रखने का निर्णय लिया जा चुका है।
ये क्या: निगम में स्वीकृत पदों से करीब 200 कर्मचारी ज्यादा हैं। शासन संविदा भर्ती करने के तैयार है लेकिन निगम के जिम्मेदार अपने लोगों को उपकृत करने के लिए प्लेसमेंट को नियम विरुद्ध मंजूरी देने पर तुले हैं। संविदा पर नियुक्त हुई तो शहर के योग्य बेरोजगारों को रोजगार मिल सकता है।
मामला: अतिक्रमण, नाला सफाई, रोजमर्रा के कामों को लेकर पार्षदों ने वही पुराने मामले उठाए, जिम्मेदारों ने पुराने निर्णय लेकर वही आश्वासन थमा दिए।
ये क्या: निगम में जो कार्य बिना किसी सिफारिश के होने चाहिए, वह परिषद जैसी महत्वपूर्ण बैठक में पार्षद उठा रहे हैं। जब परिषद में बैठे पार्षदों के काम ही निगम में नहीं हो रहे हैं तो आम लोगों से निगम में कैसी कमीशनखोरी व चक्कर लगवाए जाते होंगे, इसका अंदाजा आप खुद ही लगा सकते हैं।
डायलॉग ऑफ द मीटिंग
- आउट सोर्स से जब नकली लोगों को रख सकते हैं तो राजघाट में एक केमिस्ट रखने के लिए भोपाल-भोपाल क्यों? मैं यदि आगे कहूंगा तो फिर अच्छा नहीं होगा। वर्मा जी डंडा चलाओ, बिना डंडा के काम नहीं चलेगा। जिस योजना में देखो, वहीं अव्यवस्था। - राजबहादुर सिंह, निगमाध्यक्ष
- ये शर्म की बात है कि आपका (महापौर) अपने ही विभागों पर कमांड नहीं है। -अजय परमार, नेता प्रतिपक्ष
- मैं नगर निगम के अधिकारियों-कर्मचारियों के 7वें वेतनमान व एरियर्स दिए जाने का विरोधी नहीं हूं, लेकिन जो 27 लाख रुपए प्रतिमाह का अतिरिक्त भार आएगा, उसको लेकर आय बढ़ाने निगम प्रशासन ने क्या उपाय किए हैं। - नरेश यादव, वरिष्ठ पार्षद
- क्या असंगठित मजदूर पंजीयन का लाभ पार्षदों को भी मिल सकता है। - शारदा कोरी, पार्षद

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