goverment school फिर जर्जर स्कूलों में होगी मासूमों की पढ़ाई, बारिश में छतों से टपकेगा पानी

Reshu Jain

Publish: Jun, 13 2019 08:02:01 AM (IST)

Sagar, Sagar, Madhya Pradesh, India

सागर. नया शिक्षण सत्र 16 जून से शुरू होने वाला है। शिक्षण सत्र के साथ ही मानसून की शुरूआत होगी। बारिश के मौसम में पिछले साल की तरह इस साल भी बच्चों को जर्जर स्कूल भवनों में बैठकर पढ़ाई करना पड़ेगी क्योंकि पिछले साल की गलतियों से न अधिकारियों ने कोई सबक लिया न जनप्रतिनिधियों ने। शिक्षा पर शासन करोड़ों रुपए खर्च करता है पर आज भी स्कूलों में सुविधाए नहीं पहुंच पाई हैं। जिले के कई स्कूलों में निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन धीमी गति से काम होने की वजह से इन स्कूलों में विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए परेशानी आएगी।

विभाग ने नहीं कराई मरम्मत
बीते साल की तरह इस साल भी जिले के लगभग 77 स्कूलों में जर्जर छत से पढऩे वाले बच्चों व उनके कॉपी किताबों पर बारिश का पानी गिरेगा। बीते साल से इन छतों की मरम्मत के लिए आए आवेदनों पर ध्यान नहीं दिया गया है। जिसके कारण इस साल भी पढऩे वालों बच्चों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। जिले कुल 104 माध्यमिक और प्राथमिक स्कूल जर्जर थीं, जिनमें से 27 स्कूलों को ही गिराया गया है।


३ वर्षों से नहीं हो रहा काम पूरा, अब फिर मुसीबत

एक्सीलेंस स्कूल में पिछले लगभग ३ वर्षों से निर्माण कार्य किया जा रहा है। यहां लगभग २० से ज्यादा कक्षाएं नई बनकर भी तैयार हैं,लेकिन अब भी विद्यार्थियों को पुरानी बिल्ंिडग में बैठना पड़ रहा है। वजह है कि अब तक कार्य पूरा नहीं हो पाया है। स्कूल के मैदान में निर्माण सामग्री रखी हुई है। यहां पिछले दो सालों से कोई आउटडोर खेल का लाभ विद्यार्थियों को नहीं मिल पाया है। एक्सीलेंस स्कूल 1827 में अस्तित्व में आया था। यहां हेरिटेज लुक को ध्यान में रखकर निर्माण कार्य किया जा रहा है, लेकिन काम की गति धीमी होने की वजह से विद्यार्थियों के लिए परेशानी बढ़ जाती है।

छप्पर से टपकेगा पानी, कैसे होगी पढ़ाई
शासकीय स्कूल हिलगन में विद्यार्थियों को फिर जर्जर भवन में पढ़ाई करनी होगी। इस स्कूल में छप्पर हैं और बारिश के दिनों में पानी टपकता है। यहां विद्यार्थियों को बैठने के लिए पर्याप्त जगह भी नहीं है। जगह न होने की वजह से स्कूल प्रबंधन को प्रांगण में कक्षाएं लगानी पड़ती है। हाइ स्कूल 2007 से मिडिल स्कूल में संचालित हो रहा है। स्कूल में कुल 9 कमरे हैं। इसलिए यह स्कूल दो शिफ्ट में लगता है। सुबह की शिफ्ट में माध्यमिक स्कूल चलता है। हाइस्कूल की बिल्डिंग यहां से १ किमी दूर निर्माणाधीन है, लेकिन यहां भी कार्य ने गति नहीं पकड़ी है।


नहीं है पानी निकासी की व्यवस्था

शहर के प्रमुख इलाके में बनी शासकीय स्कूल पद्माकर में बिल्ंिडग तो अच्छी है। लेकिन निगम के इस स्कूल में पानी निकासी की कोई व्यवस्था ही नहीं है। बारिश के मौसम में प्रांगण में पानी भर जाता है। और विद्यार्थी स्कूल तक ही नहीं पहुंच पाते हैं।


जर्जर स्कूलों के संबध में पिछले दिनों ही कलेक्टर के साथ बैठक हुई है। बारिश के पहले भवनों में सुधार होना है। जो भवन अधिक जर्जर हैं उन्हें गिराने की अनुमति मिल गई है। एक्सीलेंस स्कूल के निर्माण के संबध में कलेक्टर ने तारिख निर्धारित कर दी है।

महेन्द्र प्रताप तिवारी, डीइओ

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