नल खुलते ही नालियों में बहने लगता है पानी

पब्लिक स्टैंडों की स्थिति ज्यादा दयनीय, नलों में टोंटियां लगाने निगम प्रशासन ने आज तक नहीं किए कोई प्रयास, घर का पानी भरने के बाद पानी से धोते हैं सड़क, सप्लाई का एक चौथाई पानी हो जाता है बर्वाद

सागर. नगर निगम सीमा क्षेत्र में राजघाट बांध से जैसे ही पेयजल सप्लाई होती है तो शहर की सड़कें और नालियां पानी से लबालब हो जातीं हैं। एक-दो क्षेत्र नहीं बल्कि एेसी स्थिति सालों से पूरे शहर में देखने को मिल रही है। डायरेक्ट सप्लाई वाले वार्डों के साथ ओवर हेड टैंकों के जरिए जिन क्षेत्रों में जलापूर्ति होती है, वहां भी पानी बड़ी मात्रा में बह जाता है। सालों से यह अव्यवस्था होने के बाद भी निगम के जिम्मेदारों ने इसके लिए कोई स्थाई प्रयास नहीं किए हैं।

नालियों में बह जाता है 15 एमएलडी पानी
राजघाट बांध से शहर के लिए प्रतिदिन 60 एमएलडी पानी की सप्लाई की जाती है। अनुमान के मुताबिक करीब एक चौथाई यानि लगभग 15 एमएलडी पानी नलों में टोंटियां न लगे होने और लीकेज होने के कारण बह जाता है। यानि नलों में टोंटियां लगा दीं जाएं और लीकेजों की मरम्मत कर दी जाए तो हर चार दिन में एक दिन की जलापूर्ति का पानी बहने से बचाया जा सकता है।

एेसे समझें पानी का गणित
राजघाट बांध से एक नल कनेक्शन पर लगभग एक हजार लीटर पानी पहुंचे, इस बात को ध्यान में रखकर जलापूर्ति की जाती है। आधा इंच के नल कनेक्शन से करीब 40 मिनट से 1 घंटे की जलापूर्ति में एक हजार लीटर पानी निकलता है। शहर में अवैध नल कनेक्शनों की संख्या लगभग 70 हजार से ज्यादा है जबकि बड़ी संख्या में पब्लिक स्टैंड भी लगे हुए हैं। इस हिसाब से लीकेज और नलों में टोंटियां न होने के कारण प्रतिदिन लाखों लीटर पानी बह जाता है।

....फिर सड़कों पर बहाने लगते हैं पानी
जैसे ही लोगों के घरों में टंकियां व बर्तन पानी से लबालब होते हैं तो नल को बंद करने की जगह पाइप लगाकर लोग अपने घंटे के सामने सड़कें धोने लगते हैं। कहीं पर वाहनों को साफ किया जाता है तो कोई घर के बाहर स्थित नाली में पाइप डाल देता है ताकि नालियां साफ हो जाएं।

अभिलाष तिवारी
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