उत्तरा और हस्त नक्षत्र के संयोग में 13 अगस्त को होगी नागपंचमी

इस साल नाग पंचमी पर बेहद खास और दुर्लभ योग बन रहे हैं। ये योग कई साल बाद बन रहे हैं ऐसा ज्योतिष विद्वानों का मत है और राहु—केतु के दोषों के अलावा काल सर्प दोष से मुक्ति के लिए काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

By: Atul sharma

Published: 28 Jul 2021, 08:33 PM IST

सागर.इस साल नाग पंचमी पर बेहद खास और दुर्लभ योग बन रहे हैं। ये योग कई साल बाद बन रहे हैं ऐसा ज्योतिष विद्वानों का मत है और राहु—केतु के दोषों के अलावा काल सर्प दोष से मुक्ति के लिए काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार नागपंचमी के दिन लग रहे इस योग में अगर पूजा की जाए तो राहु और केतु दोषों के अलावा काल सर्प दोष से भी मुक्ति मिल सकती है। इस बार नागपंचमी पर योग उत्तरा और हस्त नक्षत्र का दुर्लभ योग बन रहा है। इसके अलावा काल सर्प दोष की मुक्ति के लिए इस दिन परिगणित और शिव नामक योग भी लग रहे है। इस दिन खास तरीके से पूजा करके लोग सर्प काल दोष से मुक्ति पा सकते हैं।
मान्यता के अनुसार नाग पंचमी के दिन पूजा करने से राहु केतु से बनने वाले दोष और अशुभता से राहत मिलती है। नाग पंचमी पर राहु और केतु की पूजा का विशेष योग बनने से इसकी महत्वता और अधिक बढ जाती है। पं. अनिल शास्त्री के अनुसार सावन माह 25 जुलाई से शुरू होकर 22 अगस्त तक रहेगा। सावन महीने में भगवान शिव की पूजा की जाती है, क्योंकि शिव के अलावा अन्य सभी देवी-देवता पाताल लोक में जाकर निंद्रासन में चले जाते हैं। नाग पंचमी श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन नाग देवता के साथ भगवान शिव की पूजा होती है और उनका रूद्राभिषेक किया जाता है। इससे राहु और केतु का बुरा प्रभाव खत्म होता है।
नाग पंचमी के दिन शुभ मुहूर्त
पंचमी तिथि 12 अगस्त की दोपहर 3 बजकर 24 मिनट पर शुरू होगी और 13 अगस्त की दोपहर 1 बजकर 42 मिनट पर समाप्त होगी। इस दौरान 13 अगस्त 2021 की सुबह 5 बजकर 49 मिनट से 8 बजकर 28 मिनट तक पूजा का मुहूर्त रहेगा। इसकी अवधि 2 घण्टे 39 मिनट है।
नागपूजा का महत्व-
नाग हमारी संस्कृति का अहम हिस्सा है। जहां एक तरफ नाग भगवान शंकर के आभूषण के रूप में उनके गले में लिपटे रहते हैं तो वहीं शिवजी का निर्गुण- निराकार रूप शिवलिंग भी सर्पों के साथ ही सजता है। भगवान विष्णु शेषनाग की शय्या पर ही शयन करते हैं। शेषनाग विष्णुजी की सेवा से कभी विमुख नहीं होते। मान्यता है कि जब-जब भगवान विष्णु पृथ्वी पर अवतार लेते हैं, तब-तब शेषनाग जी उनके साथ अवतरित होते है। रामावतार में लक्ष्मणजी तथा कृष्णावतार में बलराम जी के रूप में शेषनाग ने भी अवतार लिया था। श्रावण (सावन) माह के शुक्ल पक्ष में पांचवें दिन को या पंचमी को नागपंचमी के रूप में मनाया जाता है।मान्यता है कि श्रावण मास के शुक्लपक्ष की पंचमी नागों को आनंद देने वाली तिथि है, इसलिए इसे नागपंचमी के नाम से प्रसिद्धि प्राप्त है।

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