बिजली चोरी करने के रोज सामने आ रहे नए तरीके, बिना एक्सपर्ट विभाग पस्त

शहर में ३० प्रतिशत से ज्यादा लाइन लॉस

सागर. बिजली चोरी पर अंकुश लगाने कंपनी के अधिकारी भले ही पुरजोर कोशिश में जुटे हों, लेकिन बिजली चोरी की नई-नई तरकीबों को अपना कर चोर कंपनी की मंशा पर पानी फेर रहे हैं। शहर में चोरी के खिलाफ लगातार चल रही कंपनी की कार्रवाई में कुछ एेसे मीटर मिले हैं, जिनमें प्राथमिक तौर पर चोरी नहीं पकड़ी जा सकी, लेकिन जब इन्हीं मीटर को कंपनी के तकनीकि विशेषज्ञों ने देखा तो उनमें चोरी की पुष्टि हो गई। शहर में बिजली चोरी की बात करें तो वर्तमान में ३० प्रतिशत से ज्यादा लाइन लॉस हैं। जिससे कंपनी को प्रतिमाह करोड़ों रुपए का चूना लग रहा है।
बिजली कंपनी से मिली जानकारी के अनुसार पहले सामान्य मीटर हुआ करते थे जिनमें छेड़छाड़ करना आसान था। इसी समस्या से निजात पाने के लिए कंपनी पहले चारों ओर से कवर मीटर लॉन्च किए और अब डिजिटल रीडिंग वाले पैक मीटर चलन में हैं। इनमें लगी सील से यदि छेड़छाड़ होती है तो चोरी होना तय माना जाता है, लेकिन बिजली चोरी करने वाले इस मीटर से भी चोरी करने में सफल हो गए।
कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि मीटर में सुराख कर एक वायर को काट दिया जाता है। एक और स्टेप के बाद अर्थिंग ली जाती है। एेसा करने से मीटर तो चालू रहता है लेकिन स्पीड धीमी हो जाती है।

इसलिए कम आती है रीडिंग
बिजली कंपनी के अधिकारियों की माने तो एेसा करने से जहां पर ३०० यूनिट के करीब खपत होती है मीटर में उसकी रीडिंग ५० से ६० यूनिट ही दर्ज होती है। यह स्थिति शहर की ज्यादातर स्लम बस्तियों में पाई जा रही है, हालांकि शहर के कुछ बड़े घरों में भी एेसे ही चोरी करने की भी पुष्टि हुई है। बताया जा रहा है कि स्लम बस्तियों में रहने वाले एेसा करके घर में हीटर का उपयोग करते हैं।

फीडर इंचार्ज पर होगी कार्रवाई
शहर के ज्यादा चोरी वाले क्षेत्रों को डीटीआर स्तर पर चिन्हित कर दिया गया है। चूंकि मैंपिंग से चोरी की पुष्टि हो चुकी है। इस पर काबू करने और लगातार कार्रवाई करने की जिम्मेदारी फीडर इंचार्ज को दी है। यदि लापरवाही बरती तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-जीडी त्रिपाठी, अधीक्षण अभियंता

मदन गोपाल तिवारी
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