निजी अस्पतालों में नहीं आग बुझाने के पर्याप्त संसाधन, अन्य संसाधनों के भरोसे रहते हैं संचालक

आग लगी तो मरीजों की जान भी आ सकती है खतरे में

By: sachendra tiwari

Published: 17 Nov 2020, 09:50 AM IST

बीना. शहर में बड़े-बड़े निजी अस्पताल तो बने हुए हैं और लोगों से मोटी फीस भी ली जाती है, लेकिन आग लगने जैसी स्थिति में उसपर काबू पाने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं है। आग लगने जैसी स्थिति बनने पर अन्य संसाधनों के आने का इंतजार बना रहता है और तब तक देर हो जाती है।
रविवार को वीरसावरकर वार्ड स्थित निजी अस्पताल के मेडिकल में आग लगने के बाद भी कुछ ऐसी ही स्थिति बनी और आग बुझाने के लिए भी एक पेट्रोल पंप, एक निजी अस्पताल से अग्निशमन यंत्र मंगाने पड़े। यदि अस्पताल में आग बुझाने के पर्याप्त संसाधन होते तो आग विकराल रूप धारण ही नहीं कर पाती। यदि इस स्थिति में अस्पताल के अंदर आग पहुंच जाती और वहां मरीज भर्ती होते तो उनकी जान भी जा सकती थी। जबकि अस्पताल बनाते समय जब लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं तो आग बुझाने के लिए भी ऑटोमेटिक यंत्र होना चाहिए, जिससे आग लगते ही उसपर काबू पाया जा सके। गौरतलब है कि रविवार को मेडिकल में लगी आग को बुझाने के लिए वार्ड के लोग बाहर से बाल्टियों में पानी भरकर लाए थे, तब कहीं जाकर आग पर काबू पाया गया था।
यह होनी चाहिए व्यवस्था
अस्पताल में आग को काबू करने के लिए अग्निशमन यंत्र होना जरूरी हैं और उनकी हर माह जांच होनी चाहिए, यंत्र चलाने के लिए कर्मचारियों का प्रशिक्षित होना, अस्पताल परिसर में पर्याप्त मात्रा में रेत का इंतजाम होना चाहिए और आग लगने जैसी स्थिति होने पर अलार्म होना चाहिए, लेकिन यहां अधिकांश अस्पतालों में यह व्यवस्था नहीं है। यदि अग्निशमन यंत्र हैं तो उन्हें चलाने वाला कोई नहीं है।
कराएंगे जांच
निजी अस्पतालों में आग की घटना पर काबू पाने के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं इस संबंध में जांच कराई जाएगी। जिससे आग जैसी स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयारी रहे।
संजय जैन, तहसीलदार, बीना
अग्निशमन यंत्र थे अस्पताल में
अस्पताल में पांच अग्निशमन यंत्र थे और उनका उपयोग करने पर भी आग पर काबू नहीं पाया जा सका था, इसलिए बाहर से अग्निशमन यंत्र मंगाए गए थे। शटर बंद होने और आग ज्यादा होने के कारण फायर ब्रिगेड से ही आग बुझाई जा सकती थी।
डॉ. एके जैन, अस्पताल संचालक

sachendra tiwari Reporting
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