नहीं हुआ सरकारी स्कूलों में सुधार तो पहुंच जाएंगे बंद होने की कगार पर, यह आंकड़े बता रहे स्कूलों की हकीकत

साल दर साल घट रही बच्चों की संख्या

By: sachendra tiwari

Published: 05 Sep 2019, 09:15 AM IST

बीना. सरकारी स्कूलों उपस्थिति बढ़ाने के लिए हर वर्ष शिक्षा विभाग द्वारा योजनाएं चलाकर प्रयास किए जाते हैं, लेकिन यह प्रयास कारगर साबित नहीं हो रहे हैं। साल दर साल प्राथमिक, माध्यमिक स्कूलों की दर्ज संख्या घट रही है। यदि इसी तरह संख्या घटती रही तो स्कूलों के बंद होने की नौबत भी आ सकती है। इसके बाद भी इस ओर गंभीरता नहीं बरती जा रही है।
प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल की दर्ज संख्या वर्ष 2013-14 में 24171 थी जो 2019—20 में 14726 रह गई है। सात वर्षों में 9445 विद्यार्थी कम हुए हैं। साल दर साल जिस तरह से बच्चों की संख्या घट रही है उससे कुछ सालों में प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों के बंद होने की नौबत आ जाएगी। घटती दर्ज संख्या में पीछे जगह-जगह खुल रहे निजी स्कूल बताए जा रहे हैं और अभिभावक भी निजी स्कूलों में ही बच्चों का एडमिशन करा रहे हैं। यह स्थिति कुछ सरकारी शिक्षकों के कारण निर्मित हो रही है, जिससे लोगों का विश्वास उठता जा रहा है और बच्चों के भविष्य को संवारने निजी स्कूलों का रुख करने लगे हैं।
एक स्कूल की दर्ज संख्या शून्य, कहीं 20 से कम
प्राथमिक स्कूल मनमती पिछले वर्ष तक तीन बच्चे अध्ययनरत थे, लेकिन इस वर्ष यहां दर्ज संख्या शून्य हो गई है। साथ ही शिक्षा सत्र 2018—19 में प्राथमिक स्कूल पिपरिया और सातनी में 5—5 बच्चे थे। बागारुपा और केथनी में 6—6, खितोसा में 7 और कचनोदा में 9 बच्चे अध्ययनरत थे। इस वर्ष भी इस स्कूलों में दर्ज संख्या कम ही है।
हर गांव में पहुंच रही निजी स्कूलों की बसें
शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में निजी स्कूलों की संख्या हर वर्ष बढ़ रही है और जिन गांवों में स्कूल नहीं खुल पा रहे हैं वहां बसें भेजकर बच्चों को स्कूल लाया जा रहा है, जिससे लोग सरकारी स्कूल में प्रवेश ही नहीं दिला रहे हैं। जबकि सरकारी स्कूलों में नि:शुल्क शिक्षा और गणवेश, पुस्तक भी नि:शुल्क दी जा रही हैं, इसके बाद भी प्रवेश नहीं बढ़ रहे हैं।
इस तरह घट रही है संख्या
प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल में वर्ष 2014—15 में 1812, वर्ष 15—16 में 1878, वर्ष 16—17में 1470, वर्ष 17—18 में 1182, वर्ष 18—19 में 1593 और 19—20 में 1440 बच्चों की संख्या कम हुई है।
फैक्ट फाइल
वर्ष दर्ज संख्या
2013-14 24171
2014—15 22289
2015—16 20411
2016—17 18941
2017—18 17759
2018—19 16166
2019—20 14726
किए जाते हैं प्रयास
प्राथमिक, माध्यमिक स्कूलों में दर्ज संख्या बढ़ाने के लिए प्रयास हर वर्ष किए जाते हैं। दर्ज संख्या कम होने के पीछे आरटीई भी एक कारण है, क्योंकि सभी निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें गरीब बच्चों को आरिक्षत हैं।
डीसी चौधरी, बीआरसीसी, बीना

sachendra tiwari Reporting
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