पत्रिका अभियान: मिट्टी से किया गजानन का सृजन

तालाबों में प्रदूषण बचाए रखने के लिए सागर पत्रिका द्वारा घर-घर अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं बनाने की पहल की जा रही है, जिसम

By: Rajesh Kumar Pandey

Published: 18 Aug 2017, 04:10 PM IST

सागर. गणेश उत्सव की शुरुआत होने वाली है। हर घर में विघ्नहर्ता विराजमान होंगे। प्रकृति का यह संदेश है कि मिट्टी के गणेश हर घर में विराजें। पत्रिका के 'घर-घर सृजन-घर-घर विसर्जनÓ अभियान के पहले ही दिन गुरुवार को लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। तिली रोड स्थित अमन मैरिज गार्डन में वर्कशॉप का आयोजन किया गया। संस्कार रंग गरबा महोत्सव की टीम ने मिट्टी से प्रतिमाओं को बनाना सीखा। मूर्तिकार राजीव जाट ने आधे घंटे में मिट्टी से मनमोहक प्रतिमा प्रतिभागियों को बनाना सिखाई। मूर्तिकार देवकीनंदन प्रजापति ने प्रतिमा बनाने के लिए मिट्टी को तैयार करके बताया। वर्कशॉप में संकल्प लिया गया कि अब घर पर ही मिट्टी की प्रतिमा बनाएंगे और एक कुंड बनाकर विसर्जित करेंगे।
वर्कशॉप में आए दीपक राय ने बताया कि ईको फे्रंडली प्रतिमा बनाने में आधे घंटे का समय लगा। अपने हाथों से प्रतिमा बनाई, जिसमें मात्र २० रुपए का खर्च आता है। मिट्टी, गोंद, लकड़ी और कपड़े की जरूरत होती है, जो आसानी से मिल जाती हैं। वाटर कलर का इस्तेमाल कर सकते हैं। मिट्टी से कंकड़ आदि निकालकर अच्छी तरह तैयार करें। उसमें थोड़ा सूखा गोबर मिला लें। २. पेट बनाने के लिए गेंद के आकार का मिट्टी का गोला बनाकर स्टैंड पर रखें। पैर के लिए मिट्टी के गोल को बेलनाकार बनाकर पंजा बनाएं। इसे पेट (बॉडी) के साथ लगाएं। सिर बनाने के लिए मिट्टी का एक भाग लेकर गोला बनाएं और सूड़ ़लगाएं। हाथों के लिए बेलनाकार से पंजा बनाएं। बॉडी के साथ लगाएं। इसी तरह कान बनाएं। इसके बाद पगड़ी बनाएं। माला आदि से श्रृंगार करें। चूहे को आकार देकर बाजू में रखें।
पहले दिन राहुल पचकौड़ी, नैन्सी राजपूत, सोनिया रैकवार, अमन, आशुतोष चौरसिया, मुस्कान पटेल, शिवा चौधरी, शिवा चौधरी, सौरभ सेन,अंजली पटेल, स्नेहा मिश्रा, डॉ. विक्रम चौधरी, ईशान सिंह, पवन, राम, चीनी, रोशन ने गणेश प्रतिमाओं का निर्माण किया। पत्रिका सागर द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान में लोग आगे आकर हिस्सा ले रहे हैं। गौरतलब है कि सागर में प्लास्टर ऑफ पेरिस की प्रतिमाओं के निर्माण का चलन बढ़ गया था, जिससे पर्यावरण प्रदूषित हो रहा था। अब पत्रिका द्वारा पर्यावरण बचाने के लिए शानदार पहल की है, जिसमें लोग स्वयं आगे आकर अपनी हिस्सेदारी निभा रहे हैं।

Rajesh Kumar Pandey Desk
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