अनोखा रहस्य : इस मंदिर में फूल प्रसाद नहीं, चढ़ाए जाते है पत्थर, सदियों पुरानी है ये परंपरा

अनोखा रहस्य : इस मंदिर में फूल प्रसाद नहीं, चढ़ाए जाते है पत्थर, सदियों पुरानी है ये परंपरा

By: rakesh Palandi

Published: 16 May 2018, 05:35 PM IST

दमोह. माता के मंदिरों में पान, सुपाड़ी और ध्वजा नारियल की भेट चढ़ाने के लिए भक्तों की भीड़ तो आपने मंदिरों में बहुत देखी होगी। मंदिरों में पुष्प और प्रसाद लेकर जाने वालों को भी देखा होगा, लेकिन अगर यहां विराजमान देवी को पुष्प और प्रसाद का चढ़ावा पसंद नहीं है। यहीं कारण है कि यहां भक्त पत्थरों का चढ़ावा करते है। सदियों पुरानी इस परंपरा का निर्वहन आज भी लोग श्रद्धा के साथ करते है। यही कारण है कि सड़क किनारे बने इन मंदिर के पास चढ़ाए गए पत्थरों का पहाड़ नजर आने लगा है।

 

 

मध्यप्रदेश के दमोह शहर के महज 6 किलोमीटर की दूरी पर एक ऐसी देवी वीराने में विराजमान हैं, जो केवल एक पत्थर का टुकड़ा चढ़ाने से लोगों की मनोकामना पूर्ण कर रही हैं। चढ़ाए गए पत्थरों के बड़े ढेर लग गए हैं और आस्था का क्रम आज भी जारी है।

 

वीरानी पहाड़ी पर एक प्रतिमा


दमोह जिले के अथाई चौराहा के नजदीक वीरानी पहाड़ी पर एक देवी प्रतिमा व उसके आसपास पत्थर के बड़े ढेर नजर आते हैं। इस राह से गुजरने वाले ग्रामीण यहां रुककर माता को प्रणाम करते हैं और एक पत्थर अर्पित कर आगे बढ़ जाते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही हैं और भक्तों की आस्था रूपी अर्पित किए गए पत्थरों के ढेर लगते जा रहे हैं।

 

Patthar wali Mata Mandir ka rahasya

 

पथरयाऊ देवी को चढ़ाए जाते है पत्थर


बुधवार की दोपहर जब पत्रिका इस स्थल पर पहुंची तो यहां पर सीताराम पटैल निवासी बरपटी ने बताया कि यह स्थल भूलन देवी व पथरयाऊ देवी के नाम से जाना है। हमारे बुजुर्गों के अनुसार तीन चार पीढ़ी पहले यहां पर पहाड़ी होने से बहुत से रास्ते थे और आवागमन के साधन व पक्की सड़कें नहीं थीं। इस स्थल से करीब डेढ़ दर्जन गांवों का रास्ता निकलता है, लेकिन यहां आते ही लोग रास्ता भूल जाते थे।

 

Patthar wali Mata Mandir ka rahasya

 

ये है अनोखा रहस्य


बताते हैं कि एक व्यक्ति भूल कर रात में इसी स्थल पर आकर रुक गया और थक हार कर सो गया तो उसे रात में सपना आया कि यह एक देवी स्थल है, जो भी यहां पर प्रार्थना कर पत्थर चढ़ाकर आगे बढ़ेगा तो वह रास्ता नहीं भूलेगा। यह परंपरा आज भी जारी है।

 

Patthar wali Mata Mandir ka rahasya

 

रास्ता ने भूलें इसीलिए आज भी है मान्यता


अथाई गांव के कमलेश पांडेय का कहना है कि यह सच है कि यहां से निकलते वक्त जो भी नहीं रुकता है वह रास्ता भूल जाता है और यह आज के दौर में भी हुआ। जिससे सड़कें बन जाने के बावजूद यहां से निकलने वाले राहगीर यहां रुककर माथा टेकते हैं और माता को भेंट स्वरूप पत्थर चढ़ाते हैं। ग्रामीण मुरारी यादव व सेठी अहिरवाल ने बताया कि इस स्थल पर एक प्रतिमा भी रखी हुई है जिस पर कभी जल नहीं चढ़ाया जाता है हां कुछ लोग यहां मन्नत के लिए नारियल जरूर रखते हैं और मनोकामना पूर्ण होने पर मां को नारियल चढ़ाने लगे हैं। साथ ही अब ध्वजा भी चढऩे लगी हैं, लेकिन पत्थर यहां प्रमुख है जो अब भी चढ़ाया जा रहा है।

 

Patthar wali Mata Mandir ka rahasya

 

चढ़ाए गए पत्थरों ने पहाड़ का लिया स्वरूप


सदियों से चढ़ाए गए पत्थरों के अलग-अलग रास्तों पर चार ढेर लग गए हैं और इन पत्थरों को कोई उपयोग में इसलिए नहीं लेता क्योंकि यह माता का चढ़ावा है जो उनके पास ही एक पहाड़ का स्वरूप धारण करता जा रहा है।

Show More
rakesh Palandi
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned