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एप के जरिए घर बैठे नागपुर-मुंबई के डॉक्टर्स से परामर्श ले रहे लोग

सागर. स्वास्थ्य के क्षेत्र में हुई नई पहल टेलीमेडिसिन को लेकर शहर में भी कुछ जागरूकता आई है। अब लोग मामूली फीस में घर बैठे नागपुर-मुंबई के विशेषज्ञ डॉक्टर्स से परामर्श ले रहे हैं। इससे मरीजों के महानगरों में आने-जाने का खर्चा बच रहा है और विषय विशेषज्ञ डॉक्टर्स से सही इलाज भी मिल रहा […]

सागरJun 20, 2024 / 11:21 am

Murari Soni

सागर. स्वास्थ्य के क्षेत्र में हुई नई पहल टेलीमेडिसिन को लेकर शहर में भी कुछ जागरूकता आई है। अब लोग मामूली फीस में घर बैठे नागपुर-मुंबई के विशेषज्ञ डॉक्टर्स से परामर्श ले रहे हैं। इससे मरीजों के महानगरों में आने-जाने का खर्चा बच रहा है और विषय विशेषज्ञ डॉक्टर्स से सही इलाज भी मिल रहा है। ऐप पर ऑपरेशन-जांचों की डेट भी फिक्स हो जाती है। वहीं लोकल स्तर से भी एक स्टार्टअप तैयार हुआ है जो प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों के अलावा लोकल सागर में रहली, देवरी, शाहगढ़, खुरई जैसे ब्लॉकों से ग्रामीणों को ऑनलाइन डॉक्टरी परामर्श व इलाज दे रहा है, ताकि ग्रामीणों को शहर तक भागने की जरूरत न पड़े।कोरोना के बाद दो साल में टेलीमेडिसिन के क्षेत्र में मानों क्रांति आ गई है। 50 से अधिक एप, वेबसाइट निर्धारित चार्ज में डॉक्टर्स से अपॉयमेंट, परामर्श, इलाज ऑनलाइन उपलब्ध करा रहीं हैं। यह ऐप सालाना मेंबरशिप, वीआईपी मेंबरशिप, 10 से 50 प्रतिशत तक की रियायत जैसे लुभावने ऑफर दे रहे हैं।शहर में भी टेलीमेडिसिन का क्रेज बढ़ा है, इसमें आम लोगों के अलावा डॉक्टर्स की फैमिली भी शामिल हैं। शहर से रोज 300 से 400 लोग मानसिक, स्किन, हार्ट, बढ़ी हुई शुगर, लीवर-किडनी की बीमारी के लिए बाहर के विशेषज्ञ डॉक्टर्स से ऑनलाइन अपॉइंटमेंट ले रहे हैं। सागर में सुपरेस्पेशलिटी व्यवस्था न होने के कारण मरीज घर बैठे ऐप पर 500 से लेकर 2000 रुपए की फीस देकर बड़े-बड़े डॉक्टर्स से सलाह, इलाज ले रहे हैं। विशेषज्ञ डॉक्टर्स इलाज के साथ-साथ मरीजों को दवाएं भी ऑनलाइन भेज देते हैं।

10 हजार ग्रामीण ले चुके ऑनलाइन इलाज-

शहर के इंजीनियर अंकुर चौरसिया ने कोरोना के समय डिजिक्योर नाम से एक स्टार्टअप शुरू किया था। जिसमें उन्होंने रहली, देवरी, खुरई, शाहगढ़ में क्लीनिक शुरू की थीं। इन क्लीनिक पर ग्रामीण आते हैं और ऑनलाइन विशेषज्ञ डॉक्टर्स से परामर्श व इलाज लेते हैं। इसमें ग्रामीणों को फायदा ये होता है कि उन्हें उसी क्लीनिक पर दवाएं भी मिल जातीं हैं। डिजिक्योर में सागर, भोपाल और दिल्ली के न्यूरा, हड्डी, दांत, जनरल मेडिसिन, हार्ट आदि बीमारियों के विशेषज्ञ डॉक्टर्स जुड़े हैं। अब तक 10 हजार मरीज इससे इलाज ले चुके हैं।

केस 01

गुलाब कॉलोनी निवासी पवन कुमार ने बताया उनकी मझली बेटी को 4 साल पहले ब्रेन टीबी हो गया था। लाखों खर्च करने के बाद इंदौर में आराम लगा। लेकिन हर माह जांच के लिए जाना पड़ता था, इससे काफी खर्चा होता है। वहां डॉक्टर्स सिर्फ चेकअप कर रिपोर्ट ही देखते थे और दवाएं दे देते थे। 6 माह पहले अब ऑनलाइन ऐप के जरिए उन्हीं डॉक्टर को नई जांच रिपोर्ट दिखा देते हैं। वहां से डॉक्टर दवाएं भी भेज देते हैं।

केस 02

तिली निवासी अमित चढ़ार ने बताया कि उसका भाई खेत में कार्य करते हुए अचानक गिर गया था। हाथ-पैर चलना बंद हो गए थ। सागर आकर दिखाया तो यहां न्यूरो की दिक्कत बताई। भोपाल जाकर न्यूरोलॉजिस्ट को दिखाया तो उन्होंने लंबा इलाज बताया। शुरूआत में हर सप्ताह भोपाल जाना पड़ता था लेकिन अब भोपाल के डॉक्टर के अलावा नागपुर के डॉक्टर्स को भी ऑनलाइन रिपोर्ट भेज रहे हैं और उनसे परामर्श ले रहे हैं।
-कुछ मरीजों के लिए परामर्श तक टेलीमेडिसिन फायदेमंद हो सकता है, लेकिन पारंपरिक चिकित्सा का स्थान नहीं ले सकता। विशेषज्ञ डॉक्टर भी मरीज सांस कैसी ले रहा, मुंह से दुर्गंध तो नहीं आ रही जैसे संकेत ऑनलाइन महसूस नहीं कर सकता। इन छोटी-छोटी एक-एक चीज से दस बीमारियों का संकेत मिल जाता है।
डॉ. सर्वेश जैन, एमटीए अध्यक्ष सागर।

-क्षेत्र में शुरूआती दिनों में लोगों को समझाना मुश्किल था लेकिन धीरे-धीरे लोग भी जागरूक हो रहे हैं। आज भी हमारी चार क्लीनिक ग्रामीण अंचलों में चल रहीं हैं। जहां मरीज आता है और उसे सागर, भोपाल के विशेषज्ञ डॉक्टर्स से परामर्श व इलाज उपलब्ध कराया जाता है।हमने यह कार्य सेवा भाव से शुरू किया है।
अंकुर चौरसिया, डिजिक्योर स्टार्टअप सागर।

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