स्लम बस्तियों में गंदगी से जूझ रहे लोग, स्वच्छता अभियान का एेसे उड़ रहा मजाक

स्लम बस्तियों में गंदगी से जूझ रहे लोग, स्वच्छता अभियान का एेसे उड़ रहा मजाक

Hamid Khan | Publish: Sep, 04 2018 09:47:30 AM (IST) Sagar, Madhya Pradesh, India

नगर निगम प्रशासन की उदासीनता

सागर. नगर निगम सीमा क्षेत्र में स्लम या स्लम के समान बस्तियों की स्थिति जस की तस है। पत्रिका ने शहर की करीब एक दर्जन से ज्यादा स्लम बस्तियों की स्थिति देखी, जहां हालात बद से बदतर मिले। स्वच्छता अभियान के तहत शहर के हर घर में शौचालय बनाए जाने का दावा किया था, लेकिन स्लम बस्तियों में लोग खुले में ही शौंच के लिए जा रहे हैं। इन वार्डों में न तो नियमित सफाई हो रही है और न ही यहां स्वच्छता अभियान दिख रहा है। यहां के लागों को आवासीस योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है।

ये है स्थिति
क्षेत्र में सफाई कार्य पूरी तरह से ठप, नाले-नालियों की सफाई नहीं।
पेयजल पाइपलाइनों में लीकेज के कारण लोग दूषित पानी पीने को मजबूर।
गंदगी के कारण स्थानीय लोग संक्रामक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
ये योजनाएं व प्रोजेक्ट नहीं बदल पाए स्थिति
01. राजीव आवास योजना: स्लम मुक्त शहर के लिए ही बनाई थी। ८ क्षेत्रों में आवासों का निर्माण होना था लेकिन निगम के जिम्मेदारों ने उन्हें बाघराज में बनवा दिया।
02.आईएचएसडीपी योजना: झोपड़ी में रहने वालों को आवास दिए जाने थे, लेकिन इसमें दो-तीन वार्डों के लोगों को ही साजिश के तहत आवास दे दिए गए।
03. बीएलसी योजना: कच्चे मकानों व झोपड़ी में रहने वालों को पक्के घर का सपना दिखाया। फर्जीवाड़ा से हजारों लोग अब भी योजना का लाभ लेने से वंचित हैं।
04. स्वच्छता अभियान: दिखावे के लिए अस्थाई शौचालय क्षेत्रों में बनाए थे। बाद में तोड़ दिया। जिस पर सबसे ज्यादा प्रदर्शन अप्सरा टॉकीज के पास हुआ था।
हम लोग वार्ड में जनसंपर्क करते हैं। स्लम या स्लम के सामान अन्य बस्तियों में लोग गंदगी व अव्यवस्थाओं से जूझ रहे हैं
डॉ. स्वदीप श्रीवास्तव, जिला संयोजक, आम आदमी पार्टी
बारिश में स्लम बस्तियों में स्थिति खराब हो जाती है। लेकिन निगम प्रशासन की ओर से पूरे प्रयास किए जा रहे हैं।

डॉ. प्रणय कमल खरे, उपायुक्त, नगर निगम

 

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