बीएलसी की नई डीपीआर में कहीं फिर से तो नहीं हो रहा खेल

आभा कंसल्टेंसी से ही बनवाई जा रही नई डीपीआर, बीएलसी घटक : निगमायुक्त ने जांच रिपोर्ट मिलने के बाद जारी किया था आदेश

By: manish Dubesy

Updated: 10 Mar 2019, 02:12 PM IST

सागर. नगर निगम में प्रधानमंत्री आवास योजना के बीएलसी घटक में फर्जीवाड़ा अब भी जारी है। चार स्तरीय जांच के बाद उम्मीद की जा रही थी कि अब यह मामला पटरी पर आ जाएगा लेकिन हाल में ही एक नया घटनाक्रम सामने आया है। आभा सिस्टम एंड कंसल्टेंसी द्वारा अब भी बीएलसी घटक के लिए डीपीआर बनाई जा रही है जबकि जांच रिपोर्ट्स के बाद निगमायुक्त अनुराग वर्मा द्वारा जारी किए गए आदेश में कहा गया था कि आभा कंसल्टेंसी ने कार्य में लापरवाही की है जिसके कारण इस योजना का भविष्य में कोई भी काम नहीं कराया जाएगा।
निगमायुक्त ने जब आदेश जारी किया तब आभा कंसल्टेंसी द्वारा नई डीपीआर पर काम किया जा रहा था। नियमानुसार निगम प्रशासन को इस डीपीआर पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा देनी थी, लेकिन अफसरों ने उसे पूर्व स्वीकृत कार्य बताते हुए एजेंसी से मिलीभगत कर कार्य को जारी रखवा दिया।
नियमानुसार डीपीआर पर कलेक्टर के हस्ताक्षर होने के बाद ही फाइनल मानी जाती है, इस हिसाब से निगमायुक्त द्वारा जारी आदेश की तारीख के बाद यदि कलेक्टर द्वारा आभा कंसल्टेंसी की डीपीआर मंजूर की जाती है तो वह जिला और निगम प्रशासन की चार स्तरीय जांच रिपोर्ट का उल्लंघन साबित होगी।
नहीं दर्ज कराई एफआईआर
निगम अधिकारियों और एजेंसी के बीच सांठगांठ होने की बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एजेंसी ने निगमायुक्त के आदेश के बाद भी एक भी अपात्र हितग्राही पर आज तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं कराई है। एजेंसी को जांच रिपोर्ट में फर्जी पाए गए हितग्राहियों पर एफआईआर दर्ज कराने के साथ उनसे वसूली करने के निर्देश दिए गए थे।
पार्षदों को जल्द जारी होंगे नोटिस
बीएलसी फर्जीवाड़े में शामिल पार्षदों और शहर के अपात्र हितग्राहियों को जल्द ही नोटिस जारी किए जाएंगे। निगमायुक्त अनुराग वर्मा ने बताया कि निगम परिषद की बैठक में निर्णय लिया गया था कि सभी संबंधितों को सुनवाई के लिए एक आखिरी मौका दिया जाए। इसलिए अब निगम प्रशासन जल्द ही सभी को नोटिस जारी करेगा।
निगमायुक्त अनुराग वर्मा से सीधी बात
सवाल- क्या बीएलसी फर्जीवाड़े
में कोई एफआईआर दर्ज
हुई, वसूली हुई?
जवाब- अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। थोड़ी-बहुत वसूली की जरूर जानकारी है।
सवाल- आदेश के बाद भी एजेंसी से नई डीपीआर बनवाई गई है?
जवाब- एजेंसी पहले से ही उस डीपीआर पर काम कर रही थी, कोई नई डीपीआर नहीं
बनवाई गई है।
सवाल- इस मामले में आगे
क्या कार्रवाई होनी है?
जवाब- संबंधित पार्षदों और
फर्जी हितग्राहियों को नोटिस
जारी कर रहे हैं।

manish Dubesy Desk
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