महाशिवरात्रि पर शिव जी ने पीया भक्त अकील का जहर, सकुशल पहुंचाया घर

शिवरात्रि पर की भोले नाथ ने मुराद पूरी

By: manish Dubesy

Published: 29 Mar 2019, 03:15 PM IST

Sagar, Sagar, Madhya Pradesh, India

इस मुस्लिम परिवार को उम्मीद थी कि यदि भगवान शिव की बारात का साक्षी अकील है तो वह मृत्यु के मुंह से भी लौट कर आएगा।

राजेन्द्र साहू. गढ़ाकोटा. भगवान शिव भक्तों की रक्षा के लिए विष भी पी लेते हैं अमृत मंथन के समय शिवजी यह कर दिखाया है। आम जीवन में आज भी हर भक्त का अपना इसी तरह का एक अलग अनुभव है जो भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था को व्यक्त करता है। अब भक्त चाहे हिंदू हो मुस्लिम हो या बच्चा बूढ़ा या जवान सदाशिव सबकी मदद करते हैं। और जब महाशिव रात्रि हो तो भगवान भोले अपनी अपरंपार पार कृपा संपूर्ण सृष्टि पर बरसा कर भक्तों के जीवन का विष पान कर उन्हें अमर कर देते हैं। यह बात एक मुस्लिम परिवार पर सोलह आना खरी बैठती है।
सागर से करीब ४० किमी दूर महाशिवरात्रि पर पूरा शहर सजा हुआ था। चारों ओर भोले की बारात की तैयारी चल रही थी। शाम होते होते चारों ओर जय जय शिव शंकर के नारों के साथ बारात निकली। इस बारात में दूल्हा शिव और माता पार्वती को देखने की इच्छा एक मुस्लिम बालक अकील की भी हुई। वह बिना पिता शेख समीम खान और अम्मी बहीदा खान को बता कर गया कि वह शिव की बारात देखने जा रहा है। माता पिता का आशीर्वाद पाकर १६ साल का बालक अकील विश्वनाथ भोलेबाबा और जगमाता पार्वती की बारात का गण बन गया।
पर वक्त को कुछ मंजूर था। बालक अपने दोस्तों के साथ कुछ दूर गया और गली में रुका तो रात के अंधेरे का फायदा उठाकर दो लोगों ने अकील से पूछा कि यहां बस स्टैंड कहां है अस्पताल कहां है। जब अकील बताने लगा तो उन्होंने कहा लगता है तुम भूखे हो ये समोसा खा लो। अकील समोसा खाते ही होश खो बैठा।
यहां माता पिता रात तक इंतजार करते रहे। फिर पुलिस को सूचना दी रिपोर्ट लिखाई। एक दिन, दो दिन चार दिन और फिर दिन पर दिन बीतते गए। परिवार परेशान होता गया पर उम्मीद थी कि भगवान शिव की बारात का साक्षी अकील यदि है तो वह मृत्यु के मुंह से भी लौट कर आएगा।
समय गुरजता गया करीब २२ दिन बात पुणे से एक फोन आता है। फिर पूरी बात अकील के पिता पुलिस टीआई अखिलेश मिश्रा को देते हैं। पुलिस तत्परता से सूचना के मुताबिक पुणे के बारामती तहसील स्टाफ के दीपक और मनीष को भेजती है। और अकील २४ दिन बात सकुशल घर आ जाता है। पिता शेख समीम खान और अम्मी बहीदा खान बहुत ही खुश है।

छात्र अकील ने बताया कि हम पुणे में कैसे पहुंचे हमें जानकारी नही है लेकिन जब हमे होश मे आया तो हम ट्रेन में थे और पुणे स्टेशन पर जब रेल रुकी तब वह दोनों व्यक्ति सो रहे थे मौका पाकर हम रेल गाड़ी में से भाग गए और रेलवे स्टेशन के यहां पहुंच गए इसके उपरांत वहां पर दो दिन थाना में रहे उसके उपरांत उन्होंने हमें बाल आश्रम में भेज दिया। हम वहां पर 10 दिन तक रहे वहां पर एक कर्मचारी से हमने जब फोन करने की बात कही तो घर पर फोन लगाया दिया और घर बात हो गई ।

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