हिंसा को मिटाने के लिए अहिंसा का प्रचार आवश्यक है-मुनिश्री

विधान में 256 अघ्र्य किए समर्पित

By: sachendra tiwari

Published: 16 Jan 2021, 10:07 PM IST

बीना. त्रिमूर्ति जिनालय खिमलासा में चल रहे सिद्धचक्र महामंडल विधान के छठवें दिन मुनि संघ के सान्निध्य में अष्टद्रव्य को चांदी की थालियों में सजाकर सैकड़ों इंद्र-इंद्राणियों ने 256 अघ्र्य समर्पित किए। अशोक शाकाहार ने बताया कि विधान में आज 512 अघ्र्य समर्पित किए जाएंगे। त्रिमूर्ति जिनालय में स्थापित 1008 भगवान शांतिनाथ, भगवान कुंथुनाथ एवं भगवान अरहनाथ का प्रतिदिन अभिषेक, पूजन, शांतिधारा संपन्न की जा रही है।
शनिवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री विमलसागर महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में जो कोरोना का काल चल रहा है, उसने संपूर्ण जहां को भयाक्रांत करके रख दिया है। भले ही हम कोरोना पर विजय प्राप्त कर लें, लेकिन इस महामारी ने हम सभी को बहुत बड़ी सीख दी है। व्यक्ति को हमेशा साफ-सफाई, नियमित दिनचर्या, सप्त व्यसनों से दूर रहने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए। धार्मिक अनुष्ठान करने से पुण्य का बंध होता है, इससे बड़ी-बड़ी विघ्न बाधाएं दूर होती हैं। उन्होंने कहा कि हिंसा को मिटाने के लिए अहिंसा का प्रचार आवश्यक है। जब तक युवाओं में धार्मिक संस्कार नहीं आएंगे तब तक संपूर्ण राष्ट्र की उन्नति की बात करना बेमानी है। सबसे पहले प्रत्येक नवयुवक को सप्त व्यसनों का त्याग करना ही चाहिए। मुनिश्री ने कहा कि इंसान प्रकृति की सर्वश्रेष्ठ कृति है, जो कुसंस्कारों से विकृत होकर शैतान बन जाती है, जबकि सुसंस्कारों से परिष्कृत होकर भगवान बन जाती है। आत्मा को परमात्मा की कृति बनाना ही, मानव जीवन का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए। जीवन में आशाएं ही इच्छाओं की जननी है। इच्छाओं की जीवन में कभी पूर्ति हो नहीं सकती है। जानने की इच्छा को जिज्ञासा कहते हैं, संसार में जिज्ञासा की पूर्ति हो सकती है, परन्तु इच्छापूर्ति होना असंभव है। इच्छाओं को जीतना ही महान तपस्या है।

sachendra tiwari Reporting
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