राजघाट में बांध का जलस्तर गिरा, आज बंद हो सकता है एक पंप

राजघाट में बांध का जलस्तर गिरा

By: sunil lakhera

Published: 25 Jun 2018, 11:57 AM IST

सागर. राजघाट बांध में इनटकवेल पंप हाउस में स्थित दो में से एक पंप सोमवार से बंद हो सकता है। रविवार को बांध का जलस्तर 507.48 मीटर रिकॉर्ड किया गया। राजघाट में एक पंप बंद होने पर शहर की जलापूर्ति और भी दयनीय स्थिति में पहुंच जाएगी। वर्तमान में नगर निगम प्रशासन अघोषित रूप से तीन से चार दिनों में जलापूर्ति करा रहा है।
निगम के जलप्रदाय विभाग के विशेषज्ञों की मानें तो 507.50 मीटर तक ही बांध में स्वाभाविक तरीके से पानी लिफ्ट हो पाता है और फिर एक पंप बंद हो जाता है, जबकि दूसरा पंप 507 मीटर पर जलस्तर पहुंचने के बाद साथ छोड़ देता है। 23 जून की स्थिति में पिछले वर्ष बांध का जलस्तर 507.30 मीटर था, जबकि इस बार करीब 18 सेंटीमीटर पानी ज्यादा है।
एेसे समझें: कैसे पड़ेगा असर
सामान्य दिनों में राजघाट के दोनों पंप चलाए जाते हैं। इनटकवेल पंप हाउस पर प्रतिदिन 20-20 घंटे तक पंप चलाए जाने के बाद ही
सागर, मकरोनिया और कैंट क्षेत्र के लोगों को पेयजल की आपूर्ति हो पाती है। वर्तमान में बांध में बांध से करीब 16 घंटे की पंपिंग ही हो रही है, जिसमें एक पंप बंद होने पर पानी की लिफ्टिंग कम हो जाएगी और जिसका सीधा असर शहर की जलापूर्ति व्यवस्था पर पड़ेगा। अब यदि बारिश में और देरी हुई तो नगर निगम प्रशासन पांच दिनों में एक बार ही जल सप्लाई कर पाएगा।
नहीं बनाई प्लानिंग
राजघाट के मामले में इस वर्ष नगर निगम ने पूरे साल लापरवाही की है। महापौर अभय दरे ने बजट बैठक में पानी बचाओ अभियान शुरू करने की बात कही थी लेकिन एक दिन भी अभियान नहीं चला। वर्तमान में भी निगम के पास लोगों को पानी पिलाने के लिए कोई प्लानिंग नजर नहीं आ रही है।
बैठक में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
रेन वॉटर हार्वेस्ंिटग सिस्टम को लेकर पत्रिका द्वारा चलाया जा रहा अभियान अब रंग लाने लगा है। अभियान से प्रेरित होकर कलेक्टर आलोक कुमार सिंह ने मामले को टाइम लिमिट (टीएल) की बैठक में रखने का निर्णय लिया है। कलेक्टर सिंह अधीनस्थ अधिकारियों को इस दिशा में कार्रवाई आगे बढ़ाने के निर्देश देंगे। ज्ञातव्य है कि नगर निगम सीमा के साथ जिले के नगरीय निकायों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग की स्थिति दयनीय है।
निकायों में जमा हैं करोड़ों रुपए
नगर निगम सागर समेत जिले के सभी निकायों में लोगों के करोड़ों रुपए रेन वॉटर हार्वेस्टिंग के नाम पर जमा हैं। नियमानुसार निकायों को इस मामले में मॉनीटरिंग करने के निर्देश दिए गए हैं और यदि संबंधित व्यक्ति अपने भवन में वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं बनवाता है तो निकायों को धरोहर राशि से सिस्टम बनवाने के निर्देश भी हैं। कलेक्टर सिंह टीएल की बैठक में इसी धरोहर राशि का उपयोग कब, कैसे करना है, इसको लेकर दिशा-निर्देश जारी कर सकते हैं।
दायरे में आएंगे 5 हजार से भी ज्यादा मकान
विशेषज्ञों की मानें तो जिले में हाल ही के वर्षों में भवन बनाने वाले करीब 5 हजार लोग इसके दायरे में आएंगे, जिन्होंने निकायों में नक्शा पास करवाने के लिए धरोहर राशि जमा की है। निगम क्षेत्र में एक हजार से ज्यादा लोगों के पैसे जमा है।
सराहनीय प्रयास
पत्रिका द्वारा रेन वॉटर हार्वेस्टिंग को लेकर अच्छा प्रयास किया जा रहा है। मैं भी इस अभियान के तहत प्रयास करूंगा। टीएल की बैठक में अधीनस्थ स्टाफ को इस दिशा में तेजी से कार्य करने के निर्देश दूंगा।
आलोक कुमार सिंह, कलेक्टर

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