राजस्व-वन विभाग ने नहीं किया सीमांकन, कब्जा कर हो रही खेती

राजस्व-वन विभाग ने नहीं किया सीमांकन, कब्जा कर हो रही खेती

By: manish Dubesy

Published: 01 Jun 2020, 05:30 PM IST

सहजपुरी पंचायत के विकास कार्यों में हो रही लापरवाही
वन कटाई में भी माफिया को मिल रहा सहयोग, सीमांकन न करने में भी घालमेल का लगा आरोप

रहली. सहजपुरी पंचायत में होने वाले विकास कार्यो के लिए शासकीय भूमि की जरूरत है लेकिन वन विभाग से लगी राजस्व भूमि का सीमांकन न होने के कारण विकास कार्य ठप पड़े हैं।
इसका नतीजा यह हो रहा है कि यहां के लोगों ने कई एकड़ पर कब्जा कर लिया है। उस पर खेती कर रहे हैं और जंगल कटाई में वन माफिया का सहयोग भी कर रहे हैं। इस भूमि के सीमांकन की ओर न वन विभाग ध्यान दे रहा है न राजस्व विभाग इस कारण इस पर कब्जे बढ़ रहे हैं।
पंचायत की राजस्व भूमि पर अवैध कब्जा होने के कारण कोई भी निर्माण कार्य नही हो पा रहे है। पंचायत द्वारा कई बार राजस्व एवं वन विभाग को सीमांकन करने के लिए आवेदन दिया गया है लेकिन इसके बाद भी दोनों ही विभाग अवैध कब्जाधारियों पर मेहरवान हैं और इन्हीं की मिली भगत से शासन की हजारो एकड भूमि पर अवैध कब्जा है। यहां कब्जाधारियो ने वन विभाग के मुनारे मिटा दिए हैं और शासकीय भूमि पर बिना किसी रोकटोक के खेती कर रहे है।
दक्षिण वन मंडल की गौरझामर रेंज की सहजपुरी बीट में इन्हीं कब्जाधारियों द्वारा लगातार जंगल की कटाई भी की जाती है और लकड़ी को बाजार में ऊंचे दामों पर बेचकर लाभ कमाया जाता है। ग्राम रोजगार सहायक राहुल ने बताया कि ग्राम में तालाब निर्माण की आवश्यकता है इसके अलावा भी अन्य निर्माण एवं विकास कार्य होना है जो शासकीय भूमि के अभाव में नहीं हो पा रहे हैं। राजस्व रिकॉर्ड में भूमि है लेकिन सीमांकन ना होने के कारण कार्य अटके हुए हैं। वहीं हल्का पटवारी राज नामदेव ने बताया कि राजस्व रेकॉर्ड में सहजपुरी में लगभग 199 हेक्टेयर राजस्व भूमि है जिसमें से करीब 110 में पहाड़ हैं बाकि भूमि पर कब्जा है। पिछले बार तहसीलदार के आदेश पर विभाग जानकारी लेने पहुंचा था तो लगभग 20 कब्जाधारियों की पहचान हो पाई थी यह कब्जा आदिवासियों का कब्जा है।
वन विभाग को नही मालूम कितनी जगह पर है कब्जा- यहां लंबे समय से वन विभाग की भूमि पर अवैध कब्जा है। वन विभाग द्वारा अभी तक वर्षो में एक नोटिस भी अवैध कब्जाधारियों को जारी नहीं किया है। जानकारी के अनुसार कब्जाधारियों द्वारा विभाग को मोटी रकम दी जाती है जिस कारण से वन विभाग कोई भी कार्रवाई नहीं करता। जब कभी भी इस प्रकार के विषय की जानकारी मांगी जाती है तो निरंक भेज दी जाती है और खाना पूर्ति कर दी जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि राजस्व विभाग एवं वन विभाग अपना अपना सीमांकन कर ले तो अवैध कब्जे की तस्वीर सामने
आ जाएगी।

manish Dubesy Desk
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