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दो और मौतों के बाद फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, शराब फैक्ट्री बंद कराने नेशनल हाइवे पर किया चक्काजाम

मेहर गांव की दो और बुजुर्ग महिलाओं ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। दोनों बुजुर्ग महिलाएं मेडिकल कॉलेज में भर्ती थीं। गांव में चार मौतों के बाद लोगों का गुस्सा मंगलवार को भड़क उठा। उन्होंने शराब फैक्ट्री बंद कराने सागर-मालथौन नेशनल हाइवे पर चक्काजाम कर दिया।

सागरJul 10, 2024 / 01:37 am

Rizwan ansari

 नेशनल हाइवे पर चक्काजाम

 नेशनल हाइवे पर चक्काजाम

कमिश्नर-कलेक्टर भी पहुंचे गांव लेकिन शराब फैक्ट्री की शिकायत पर नहीं दिया ध्यान


सागर. मेहर गांव की दो और बुजुर्ग महिलाओं ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। दोनों बुजुर्ग महिलाएं मेडिकल कॉलेज में भर्ती थीं। गांव में चार मौतों के बाद लोगों का गुस्सा मंगलवार को भड़क उठा। उन्होंने शराब फैक्ट्री बंद कराने सागर-मालथौन नेशनल हाइवे पर चक्काजाम कर दिया। हाइवे पर दोनों तरफ वाहनों की लंबी-लंबी लाइनें लग गईं। आनन-फानन में प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारी शराब फैक्ट्री की जांच का आश्वासन देते रहे। वहीं मंगलवार को भी गांव से 23 नए मरीज आए जिसमें से 2 को रेफर किया गया है।
इधर चार मौतों के बाद प्रशासन भी हरकत में आ गया है। मंगलवार को विधायक प्रदीप लारिया, संभागायुक्त डॉ. वीरेंद्र सिंह रावत, कलेक्टर दीपक आर्य मेहर गांव पहुंचे। उन्होंने गांव में अतिरिक्त नलकूप खनन के निर्देश दिए। गांव में कीटनाशक का छिडक़ाव, अन्य जल स्त्रोतों की जांच, गांव में चार डॉक्ट्रर्स, पैरामेडिकल स्टाफ और दो एंबुलेंस 24 घंटे उपलब्ध रहने के निर्देश दिए। संभागायुक्त ने कहा कि मेहर गांव के मरीजों को निजी अस्पतालों में भी व्यवस्थाएं कराई जाएं। बीएमसी में अलग से वार्ड एवं पलंग तैयार रखें।
गांव में इनकी हुईं मौतें
लल्लन बंसल 35 वर्ष
कस्तूरी बाई लोधी 55 वर्ष
गोमती रैकवार 75 वर्ष
भागवाई रैकवार 70 वर्ष
कोरोना काल से भी बदतर गांव की स्थिति-
ग्रामीणों ने कहा कि कोरोना के समय भी गांव में ऐसी भगदड़ और दहशत का माहौल नहीं था, जो कि अब देखने मिल रहा है। गांव के हर घर से उल्टी-दस्त के मरीज सामने आ रहे हैं और प्रशासन आंखें बंद किए हुए है। ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच भी नहीं कर रहा। गांव के जल स्त्रोत कहां से दूषित हुए, इसकी जांच नहीं हो रही।
संभागायुक्त-कलेक्टर के गांव छोड़ते ही कर दिया चक्काजाम
संभागायुक्त-कलेक्टर जब रविदास वार्ड का निरीक्षण कर रहे थे, तभी गांव की महिलाएं शराब फैक्ट्री पर सवाल उठाने लगीं। इसके बाद गांव के अन्य लोगाें ने भी शराब फैक्ट्री बंद कराने की मांग की। अधिकारी निरीक्षण के बाद जैसे ही गांव से निकले तो ग्रामीणों ने दोपहर करीब 2.50 बजे शराब फैक्ट्री के बाहर एनएच 44 पर चक्काजाम कर दिया। सूचना पर एसडीएम विजय डेहरिया पहुंचे। ग्रामीणों को शराब फैक्ट्री की जांच कराने का आश्वासन दिया गया। करीब 2 घंटे तक चले विरोध प्रदर्शन से हाइवे के दोनों तरफ सैकड़ों वाहनों की लाइनें लग गईं।
5 महत्वपूर्ण सवाल-
1- जब दूषित बोरवेल बंद है तो एक सप्ताह से रोज नए मरीज कहां से निकल रहे हैं?
2- ग्रामीण पहले दिन से शराब फैक्ट्री पर आरोप लगा रहे, अभी तक फैक्ट्री की जांच क्यों नहीं की?
3- सिर्फ एक बोरवेल के पानी और मरीज के स्टूल (मल) की जांच के बाद निष्कर्ष पर क्यों पहुंचे?
4- शराब फैक्ट्री की बार-बार शिकायत लेकिन प्रदूषण नियंत्रण कार्यालय ने जांच क्यों नहीं की?
5- प्रशासन जल स्त्रोत शुद्ध कर रहा लेकिन कारण खोजने में रुचि क्यों नहीं?
-ग्रामीण हाइवे पर चक्काजाम कर शराब फैक्ट्री बंद कराने की मांग कर रहे थे। सूचना पर मौके पर पहुंचकर शराब फैक्ट्री की जांच का आश्वासन दिया, जिसके बाद हाइवे पर यातायात सुचारू हो गया। – विजय डेहरिया, एसडीएम।
-गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार सक्रिय है और स्थिति कंट्रोल में है। मंगलवार को कुल 23 मरीजों की जांच हुई, जिसमें से 2 मरीजों को एहतियात के तौर पर सागर रेफर किया गया है। विशेषज्ञ डॉक्टर्स व नर्सिंग स्टाफ गांव में मौजूद है।- डॉ. ममता तिमोरी, सीएमएचओ।
-बीती रात 2 और मौतों के बाद गांव के लोग दहशत में हैं, हमने कलेक्टर से फिर से शराब फैक्ट्री की शिकायत की है और जांच की मांग की। यदि प्रदूषण नियंत्रण मंडल समय पर कार्रवाई करता तो आज गांव के लोगों को यह दिन नहीं देखना पड़ता। – सर्वजीत सिंह, जिला पंचायत सदस्य।

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