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सागर

दिखावा : 11 दिनों में 27 निजी स्कूलों में पहुंची टीम, 720 स्कूलों की होनी है 30 जून तक जांच

जिले के निजी स्कूलों की जांच के नाम पर केवल दिखावा हो रहा है। जांच 8 जून से शुरू हुई थी और 19 जून तक जांच के लिए केवल 27 स्कूलों में ही शिक्षा विभाग और प्रशासन की टीम पहुंची है।

सागरJun 20, 2024 / 11:24 am

रेशु जैन

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शहर के 7 स्कूलों की हुई जांच, केवल प्रतिवेदन बना रही है टीम

सागर. जिले के निजी स्कूलों की जांच के नाम पर केवल दिखावा हो रहा है। जांच 8 जून से शुरू हुई थी और 19 जून तक जांच के लिए केवल 27 स्कूलों में ही शिक्षा विभाग और प्रशासन की टीम पहुंची है। जिले में 720 निजी स्कूलों की जांच 30 जून तक की जानी है। इसमें सीबीएसई बोर्ड के ही 52 स्कूल शामिल हैं। 11 दिनों में केवल 27 स्कूलों की जांच हुई है। जिन स्कूलों में शिक्षा विभाग की टीम पहुंची वहां की कमियों को उजागर नहीं किया जा रहा है। शिक्षा विभाग की टीम बार-बार केवल कलेक्टर को प्रतिवेदन सौंपने की बात कर रही है।
स्कूल शिक्षा विभाग टीम को जांच करने के लिए 30 जून तक का समय दिया गया है। अभी शहर में सेंट जोसफ कॉन्वेंट ,अभ्योदय, दीपक मेमोरियल, पारस विद्या बिहार और सेंट मेरी स्कूल पहुंची है। 13 जून के बाद टीम स्कूलों में नहीं पहुंची। 17 जून के बाद विभाग की टीम किसी स्कूल में जांच करने नहीं पहुंची। विभाग के अधिकारी छुट्टी और कार्यक्रमों का बहाना बनाकर स्कूलों में जांच करने के लिए नहीं पहुंच रहे हैं।
स्कूलों में होनी चाहिए ये सुविधाएं

– स्कूल के हर सेक्शन में 40 बच्चों के बैठने की जगह होनी चाहिए। इसके अलावा सभी स्कूलों में क्लास का साइज वही होना चाहिए, जो एफिलिएशन बाई-लॉज में तय की गई।
– सीबीएसई बोर्ड के नियम के अनुसार जिन स्कूलों में साइंस विषय की पढ़ाई होती है वहां कम से कम 600 स्क्वायर फीट की लैब्स में प्रैक्टिकल की पूरी व्यवस्था भी होनी चाहिए

– लाइब्रेरी में पर्याप्त किताबें व बच्चों की संख्या के हिसाब से अन्य सुविधाएं भी होनी चाहिए। लाइब्रेरी में हर क्लास और बच्चों की उम्र के हिसाब से हर विषय की किताबें होनी चाहिए। किताबों में ई-बुक्स, फिक्शन, नॉन फिक्शन, रेफरेंस बुक्स, एन्साइक्लोपीडिया, पीरियॉडिकल्स, मैगजीन, जर्नल और न्यूजपेपर जरूर होने चाहिए।
– कंप्यूटर लैब का आकार कम से कम 600 स्क्वायर फीट में होना चाहिए। अगर स्कूल में सीनियर सेकंडरी लेवल पर कंप्यूटर साइंस या आईटी जैसे विषयों की पढ़ाई करवाई जाती है तो समुचित व्यवस्थाओं के साथ एक अलग लैब भी होनी चाहिए।
– स्कूलों के पास मैथ्स विषय के लिए अलग से एक लैब होनी चाहिए। उसका साइज एक सामान्य क्लास रूम जितना होना जरूरी है।

– स्कूल के हर फ्लोर पर बच्चों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था होनी चाहिए।- स्कूल को हर फ्लोर पर लड़कों व लड़कियों के लिए अलग-अलग साफ-सुथरे वॉशरूम बनवाने चाहिए। प्राइमरी लेवल के स्टूडेंट्स के टॉयलेट अलग होने चाहिए। स्टाफ मेंबर्स के लिए भी अलग वॉशरूम की व्यवस्था होनी चाहिए।
– स्कूल के हर क्लास में बच्चों और स्टाफ की संख्या के हिसाब से सही फर्नीचर होना चाहिए।

– स्कूल में साइंस, होम साइंस, टेक्निकल विषयों, वोकेशनल विषयों और आर्ट एजुकेशन से जुड़े सभी उपकरण और सुविधाएं होनी चाहिए।
– स्कूल में फायर सेफ्टी के नियमों का पालन होना चाहिए।

– स्कूल में एथलेटिक ट्रैक और कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल, बास्केटबॉल आदि आउटडोर गेम्स खेलने के लिए पर्याप्त जगह होनी चाहिए।

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