अच्छे, बुरे भाव व विचार ही जीवन में सुख, दु:ख का कारण बनते हैं- मुनिश्री

समवशरण विधान के दूसरे निकाली श्रीजी की शोभायात्रा

By: sachendra tiwari

Published: 06 Jan 2021, 08:00 PM IST

बीना. खिमलासा में निर्माणाधीन त्रिमूर्ति जिनालय में ज्येष्ट मुनिश्री विमलसागर महाराज, मुनिश्री अनंतसागर महाराज, मुनिश्री धर्मसागर महाराज, मुनिश्री अचलसागर महाराज, मुनिश्री भावसागर महाराज और ब्र. नितिन भैया इंदौर, ब्र. दीपक भैया टेहरका के निर्देशन में विश्वशांति महायज्ञ और 24 समवशरण विधान का आयोजन किया जा रहा है।
विधान के दूसरे दिन बुधवार को श्रीजी की शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें में सिर पर कलश लिए इंद्राणियां शामिल हुईं। शोभायात्रा में सबसे आगे धर्मध्वजा लिए श्रद्धालु अश्व पर चल रहे थे। साथ ही विधान के मुख्य पात्र श्रीजी की प्रतिमा सिर पर रखे हुए थे। इसके बाद मुनि संघ और फिर श्रद्धालु जयकारा लगाते हुए चल रहे थे। संपूर्ण नगर में चौक पूरकर श्रद्धालुओं ने श्रीजी की मंगल आरती उतारी। शोभायात्रा मुख्य मार्गों से होते हुए कार्यक्रम स्थल पर संपन्न हुई। इसके बाद मुनि संघ के सान्निध्य में ध्वजारोहण का अनुष्ठान संपन्न कराया। अशोक शाकाहार ने बताया 11 जनवरी तक चलने वाले इस अनुष्ठान में प्रतिदिन सुबह अभिषेक, शांतिधारा आयोजित होगी। सुबह 8 बजे से 24 समवशरण विधान होगा। मुनिश्री विमलसागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि अपने अच्छे, बुरे भावों और विचारों से ही जीवन शांत-अशांत और सुख, दु:ख का कारण बनता है। परिणामों का खेल बड़ा विचित्र है, क्योंकि स्वर्ग, नरक से लेकर मोक्ष तक की स्थिति में भी परिणामों का प्रतिफल ही एकमात्र कारण है। उन्होंने कहा कि परिणामों की जन्मदाता अपनी भावना हंै। विचारों से हम इस शरीर को भी शुद्ध-अशुद्ध, शुभ-अशुभ, नैतिक-अनैतिक का प्रतीक बना सकते हैं। जैसी भावना वैसा ही परिणाम सामने आएगा। भावों के उतार चढ़ाव का क्रम हर व्यक्ति के जीवन में प्रत्येक क्षण चलता रहता है, लेकिन धर्म आचरण ही अपने परिणामों को काले करने से बचाता है। उन्होंने कहा कि आज देश और समाज में मानवीय भावनाओं का विकास न होने से ही चारों तरफ अशांति बढ़ रही है। भौतिक साधनों से इंसान निरंतर आलसी और प्रमादी होता जा रहा है, तब जीवन का उत्थान कैसे होगा। बहुत अधिक आराम ही तो आज नित्य नई-नई बीमारियों व दर्द का कारण बन रहा है।

sachendra tiwari Reporting
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