श्रुतपंचमी आज, वर्षाकालीन चातुर्मास हेतु बिहार होंगे शुरू

जैन आगम मैं श्रुत पंचमी का बहुत महत्व है। पूरे देश भर में जहां-जहां साधु संघ विराजमान है वहां पर इस पर्व पर कार्यक्रम होंगे और वर्षा कालीन चातुर्मास के लिए मुनि संघों को संकेत मिलना भी शुरू हो जाएंगे।

By: Atul sharma

Published: 15 Jun 2021, 11:32 AM IST

सागर. जैन आगम मैं श्रुत पंचमी का बहुत महत्व है। पूरे देश भर में जहां-जहां साधु संघ विराजमान है वहां पर इस पर्व पर कार्यक्रम होंगे और वर्षा कालीन चातुर्मास के लिए मुनि संघों को संकेत मिलना भी शुरू हो जाएंगे। श्रुतपंचमी पर प्रसिद्ध जैन तीर्थ क्षेत्र नर्मदा नदी के तट पर नेमावर में आचार्य विद्यासागर महाराज के ससंघ सानिध्य में पंचकल्याणक महोत्सव का आयोजन 15 जून से 21 जून तक चलने वाले पंचकल्याणक महोत्सव के बाद नेमावर से आचार्य संघ के बिहार की संभावनाएं प्रबल है। श्रुत पंचमी पर पहले जैन तीर्थंकर आदिनाथ भगवान ने ब्रह्मी-सुंदरी और भरत-बाहुबली को पढऩे लिखने के संस्कार दिलाये थे, इसलिए देशभर में जैन मंदिरों में पाठ शालाओं के माध्यम से विशेष कार्यक्रम बच्चों के लिए आयोजित होते हैं।मुनि सेवा समिति के सदस्य मुकेश जैन ढाना ने बताया कि श्रुत पंचमी के बाद आचार्य विद्यासागर महाराज के संघ के मुनिसंघों के बिहार के लिए स्थानों का संकेत भेजा जाता है और संबंधित स्थानों पर मुनि संघ वर्षाकालीन चातुर्मास के लिए पहुंच जाएंगे। स्थानीय जैन समाज वहां पर चातुर्मास कलश स्थापना समारोह का आयोजन करती है। इस बार 23 जुलाई को कलश स्थापना समारोह जहां- जहां साधु संघ विराजमान होंगे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी बुंदेलखंड और आसपास के क्षेत्रों में साधु संतों के वर्षा कालीन चातुर्मास होने की संभावना है। प्रसिद्ध जैन तीर्थक्षेत्र कुंडलपुर के बड़े बाबा के नवनिर्मित मंदिर के पंचकल्याणक महोत्सव भी इस वर्ष के अंत में या अगले वर्ष के प्रारंभ में होने की संभावनाएं हैं। इसी के चलते मुनिसंघ इसी क्षेत्र के आसपास चातुर्मास करेंगे वर्तमान में मुनि समय सागर महाराज सागर में, मुनि सुधा सागर महाराज चंबलेश्वर राजस्थान में, मुनि प्रमाण सागर महाराज गुनायतन शिखरजी में, मुनि प्रशांत सागर, आर्यिका द्रणमति माताजी जबलपुर में, आर्यिका पूर्णमति माताजी रहली में,आर्यिका उपशांतमति माताजी कुंडलपुर में आर्यिका अनंत मति माताजी नेहानगर सागर, आर्यिका गुणमति माताजी बकस्वाहा, आर्यिका ऋजुमति माताजी अभाना, आर्यिका अकम्पमति माताजी पथरिया में विराजमान है। इन सभी संघों को या तो उसी स्थान पर या अन्यत्र किसी तीर्थ क्षेत्र या दूसरे नगरों में चातुर्मास के लिए संकेत मिलना शुरू होंगे।

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